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केरल बाढ़ के बाद बीमारियाँ ही नहीं कीड़े-मकोड़े और साँप भी मचा रहे हैं कोहराम

करना पड़ रहा है लोगों को तरह-तरह की परेशानियों का सामना

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जब भी कोई प्राकृतिक आपदा आती है तो इससे लाखों लोगों का जीवन प्रभावित होता है। कई बार प्राकृतिक आपदा स्वयं ही होती है। कई बार इसके पीछे अप्रत्यक्ष रूप से इंसानों का हाथ होता है। जिस तरह से आज लोगों ने अपने जीवन में बदलाव किए हैं, उसका नतीजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है। बढ़ते प्रदूषण की वजह से पृथ्वी का तापमान लगातार बढ़ता ही जा रहा है, जो आने वाले समय में और भी भयावह रूप लेगा। इससे भी लोगों को काफ़ी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।

 

10 लाख से ज़्यादा लोग हुए हैं बेघर:

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केरल में आयी भयानक बाढ़ ने लोगों का जीवन ही बदलकर रख दिया है। केरल में अब हालाँकि बाढ़ का प्रकोप धीरे-धीरे कम हो रहा है। जानकारी के अनुसार केरल में इस तरह की बाढ़ पिछले सौ सालों में पहली बार आयी है। ऐसी बाढ़ का सामना केरल की जनता को सौ सालों में पहली बार करना पड़ा है। इस भयानक बाढ़ की वजह से लगभग 370 लोगों की मौत हो चुकी है और लगभग 10 लाख से ज़्यादा लोग बेघर हो गए हैं। इस बाढ़ में करोड़पति लोग भी सड़क पर आ गए। लोगों का बसा-बसाया बसेरा उजड़ गया।

 

करना पड़ रहा है लोगों को तरह-तरह की परेशानियों का सामना:

केरल बाढ़ के बाद निजी सम्पत्ति के साथ सार्वजनिक सम्पत्ति को भी भारी नुक़सान हुआ है। केरल बाढ़ ने लोगों का जीवन पूरी तरह से बदल कर रख दिया है। बाढ़ के समय सेना के जवानों के साथ नेवी और NDRF ने ख़ूब मदद की है। जगह-जगह सेना और NDRF बचाव अभियान चलाकर लोगों की जान बचा रहे थे। ऐसी आपदा की स्थिति में सेना के जवान काफ़ी मदद करते हैं। केरल बाढ़ के बाद लोगों को तरह-तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बाढ़ की वजह से जमा हुए कचरे और गंदगी के कारण लोग कई तरह की बीमारियों से भी ग्रसित हो रहे हैं।

 

बाढ़ के बाद अब ज़हरीले जीवों का क़हर:

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केरल के लोगों को केवल बीमारियों से ही ख़तरा नहीं है बल्कि बाढ़ की वजह से कई तरह के ख़तरनाक जीव भी अपनी जान बचाने के लिए लोगों के बीच में आ गए। कई कीड़े-मकोड़ों के साथ ही ज़हरीले साँप भी लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। केरल में बाढ़ का पानी कम होने के बाद लोग धीरे-धीरे राहत शिविरों से अपने घर की तरफ़ रवाना हो रहे हैं। लोगों को साँपो और अन्य जीवों का सामना करना पड़ रहा है। मल्लपुरम में साँप पकड़ने वाला एक व्यक्ति मुस्तफ़ा इस समय बहुत व्यस्त है।

 

 

पकड़ चुका है अब तक 100 से ज़्यादा साँप:

आपको जानकर हैरानी होगी कि पिछले दो दिनों में बाढ़ का पानी कम होने के बाद वहाँ लगभग 100 से ज़्यादा ज़हरीले साँपो को पकड़ा जा चुका है। एर्नाकुलम जिले के अंगमली में एक अस्पताल में साँप द्वारा काटे गए 52 लोगों का इलाज चल रहा है। ऐसे में लोगों को साँपो और अन्य ज़हरीले जीवों से बचकर रहने की सलाह दी जा रही है। बाढ़ से बचने के बाद लोगों के सिर पर अब ज़हरीले जीवों का ख़तरा मँडरा रहा है। त्रिसूर जिले के चलकुडी में सोमवार रात अपने घर की हालत देखने आए एक आदमी के घर में मगरमच्छ मिला।

 

घर में दिखा मगरमच्छ:

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आदमी अपने घर में मगरमच्छ देखकर हैरान हो गया। जल्दी से उसने अपने पड़ोसियों की मदद से उस मगरमच्छ को रस्सी से बाँध दिया। लगभग एक सदी में सबसे भयानक और विनाशकरी बाढ़ की वजह से सबसे ज़्यादा त्रिसूर जिले के लोग परेशान हुए हैं। इसके साथ ही बाढ़ की त्रासदी अलप्पुझा, पथनामथित्ता, इडुक्की, कोझिकोड, एर्नाकुलम, मल्लपुरम और वायनाड जिले को झेलनी पड़ी है। आपको बता दें जहाँ-जहाँ भी बाढ़ की त्रासदी होती है, उसके बाद साँप और कीड़े-मकोड़ों का प्रकोप झेलना ही पड़ता है। बाढ़ की वजह से ये ज़हरीले जीव भी प्रभावित होते हैं। ये अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते हैं।

 

 

उपलब्ध कर दी गयी हैं विष-रोधी दवाएँ:

साँप पकड़ने वाले व्यक्ति ने बताया कि, ‘बाढ़ के पानी के साथ साँप का आना स्वाभाविक है। तालाबों नदियों में बाढ़ आने की वजह से कई कीड़े भी आ जाते हैं। ऐसे में आपने घरों की तरफ़ लौट रहे लोगों को सतर्क रहने की ज़रूरत है। उन्हें जूते, टूटे हुए टाइलों या गिली लकड़ी में हाथ नहीं डालना चाहिए।’ पथनामथित्ता से आयी एक ख़बर के अनुसार, अपने घरों को साफ़ करने आए कई लोगों ने जब वहाँ साँप देखा तो वहाँ से भाग गए। केरल सरकार ने घोषणा की है कि प्रभावित स्थानों पर विष-रोधी दवाएँ उपलब्ध करवा दी गयी हैं।

 


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