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कैसेट किंग गुलशन कुमार के जीवन की इन बातों से अनजान होंगे आप, जानें

गाने सुनकर महेश भट्ट ने लिख दी फ़िल्म की कहानी

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1947 के दौर में गुलशन कुमार के पिता जी दिल्ली बसकर दरियागंज में फल बेचा करते थे। धीरे धीरे वो जूस कार्नर का बिजनेस करने लगे। गुलशन कुमार भी जैसे जैसे बड़े हुए अपने पिता जी के साथ जूस बेचने लगे। 1970 के दशक में गुलशन कुमार ने अपने पिता जी के साथ मिलकर एक कैसेट की दुकान खोली। 1970 में किसी रेडियो कम्पनी ने एक ऐसा रेडियो बनाया जिसमें रेडियो के साथ कैसेट भी लगते थे। भारतीय बाजार में पहली बार ऑडियो केसेट सिस्टम आया। लेकिन उस दौर में लोग रेडियो में गीत सुनते थे और रिकॉर्ड ग्रामोफ़ोन के एलपी रिकॉर्ड मार्किट में आते थे। जिनको रसूखदार बड़े घरानों के पैसे वाले लोग खरीदते थे।

 

बनाने शुरू किए फ़िल्मी गानों के कवर:Gulshan Kumar

बड़ी म्युजिक कम्पनियों को कैसेट रिकॉर्ड में कोई रुचि नही थी। तब सत्तर के दशक में गुलशन कुमार ने एक कैसेट की दुकान खोली जिसमें उसने बड़ी कंपनियों के एलपी रिकॉर्ड को कैसेट में डब कर बाजारों मे बेचना शुरू किया। इस तरह धीरे धोरे इनकी अच्छी आमदनी होने लगी और बाद में उनको लगा कि पायरेसी काम ठीक नही है। तब इन्होंने पुराने फिल्मी गानों के कवर एल्बम बनाने शूरू किए। कॉपीराइट के लिए सुप्रीम कोर्ट से उस समय यह नियम था। कम से कम 3 साल पुराने एल्बम कवर नही बनेंगे।

 

देश के कोने-कोने से खोज निकाला गायकों को:

पुराने गानों में बन सकता तब गुलशन कुमार ने पूरे देश से नए नए गायकों खोजा। मोहम्मद रफी आवाज के लिए सोनू निगम तो किशोर कुमार की आवाज के लिए कुमार सानू , पुराने फिल्मी गीतों के कवर गीतों ने गुलशन कुमार के साथ टी सीरीज कम्पनी को फेमस कर दिया। 7 रुपये की लागत वाली ऑडियो कैसेट बाजार में 25 रुपये में बिकती थी। अनुराधा पौडवाल, सोनू निगम, कुमार सानू टी सीरीज से काफी बड़े स्टार बन गए। संगीतकार नदीम श्रवण और गीतकार समीर भी टी सीरीज से बहुत लोकप्रिय हुए।

 

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गाने सुनकर महेश भट्ट ने लिख दी फ़िल्म की कहानी:

पहले यह कम्पनी नॉएडा में खुली, बाद में मुम्बई में भी खुली। टी सीरीज ने सभी भारतीय भाषाओं में गीत एल्बम बनाये। भजनों में टी सीरीज और गुलशन कुमार दोनों को जगप्रसिद्ध कर दिया। टी सीरीज ने समय के साथ कई अन्य प्रोडक्ट बाजार में उतारे, किंतु प्रसिद्धि म्यूजिक कम्पनी की रही। टी सीरीज ने फ़िल्म निर्माण में भी काफी काम किया। 90 के दशक में टी सीरीज ने आशिकी कर के एक म्यूजिक एल्बम बनाया। जिसके गाने इतने हिट हुए कि इन गानों सुन फिल्ममेकर महेश भट्ट ने आशिकी की फ़िल्म की कहानी लिखी और फ़िल्म का निर्देशन किया।

 

कर दिया घर-घर तक लोकप्रिय:

यह फ़िल्म भी काफी हिट रही । आज ऑडियो कैसेट कम्पनी टी सीरीज you tube में भी बहुत लोकप्रिय है। टी सीरीज आज भारत का नम्बर you tube चैनल है। गुलशन कुमार को संगीत बाजार की गहरी समझ थी, इसी कारण वो म्यूजिक उद्योग के कैसेट किंग बन गए आज गुलशन कुमार की टी सीरीज कम्पनी को उनके पुत्र भूषण कुमार देखते है। गुलशन कुमार ने ऑडियो कैसेट के माध्यम से संगीत रिकॉर्ड को कम दामों में घर घर तक लोकप्रिय कर दिया ।


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