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जानिए मोछंग (विणई ) लोक वाद्य के उस्ताद राकेश भरद्वाज ” राही ” के बारे में

जापान में भी बजता है मोछंग

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मोछंग उत्तराखंड का एक वोकल वाद्य यंत्र है, जो किसी धातु पत्ती की छड़ का बना होता है. जिसको उत्तराखंड के पहाड़ी समाज मे हर सुख दुःख के अवसरो में बजाया जाता है. मोछंग को विणई भी कहते है. पहाड़ी समाज जब पहाड़ के लोकधुनों और लोकगीतों में विणयी बजती है, सुनने वाला मंत्रमुग्ध हो जाता है. इस वाद्ययंत्र को आज बहुत कम लोग बजाने वाले रह गए है. उत्तराखंड में कभी जमानो में मोछंग लोकवाद्य में लोकेगायक चन्द्र सिंह राही ने भी बहुत शोध कार्य कर इसको मंच में बजाया लोक वाद्यों के जानकर रामचरण जुयाल ने भी मोछंग वाद्य को लाने में मंचो में कही प्रस्तुतियां दी है.

 

लगातार कर रहे हैं लोकवाद्य में काम:

आज वर्तमान में राकेश भरद्वाज राही जी राही घराने से है और इस लोकवाद्य में लगातार काम कर रहे है. यूफोरिया जैसे इंटरनेशनल म्यूजिक बैंड में भी प्रकाशन म्यूजिक में मोछंग बजाकर उत्तराखंड के फोक विस्तार दिया। वही कुछ समय उत्तराखण्ड म्यूजिक के नाम से पहाड़ी सुल करके म्युजिक बैंड और यु ट्यूब चैनल राकेश भरद्वाज ने बनाया है, जो पहाड़ी म्यूजिक को एकोस्टिक म्यूजिक के साथ फ्यूजन बना रहा है.

 

जापान में भी बजता है मोछंग:

उत्तराखंड के फ्यूजन सँगीत में भी देश विदेशो तक मोछंग लोकवाद्य को उत्तराखंड म्यूजिक के साथ प्ले किया है. राकेश भरद्वाज उन गिने चुने या एकमात्र कलाकार है जो उत्तराखंड मोछंग को इंटरनेशनल म्यूजिक में कन्वर्ट कर रहे  हैं, साथ ही वो नई पीढ़ी तक इस विधा लो ले जाना चाहते है. साथ ही यह वाद्य यंत्र उत्तराखंड के अलावा राजस्थान , साउथ इंडिया, और जापान में भी बजता है, जिसमें थोड़ी बहुत बनावट और साउंड में फर्क आता है.

 

थोड़ी-बहुत धुनों में हैं अंतर:

मोछंग चीन मे भी बजता है पर बनावट चेंज है. थोड़ा बजाने का प्रचलन और धुने अलग हो सकती पर काफी समानता है. उत्तराखण्ड में मोछंग बांसुरी और शहनाई की तरह स्थान रखता है. मांगलिक कार्यो में मोछंग अब विलुप्ति के कगार में है, राकेश भरद्वाज इस विधा को बचाने के लिए लगातार प्रयासरत है. किसी जमाने में गढवाली भाषा ने मूर्धन्य कवि गीतकार चक्रधर बहुगुणा जी ने मोछंग काव्य ग्रन्थ की रचना की थी, जिसकी मुखड़ा इस प्रकार है.

धारमं बैठिकी पूर्ण निश्चिन्त हैवे
आ, सुणौदौं सुणा आज मोछंग कू।
साज मां साज ली, राग मां बाजली
चित्त की क्वो छिपीं आह भी खोलली।

राकेश भरद्वाज का मोछंग वाद्य प्रस्तुति नीचे यू ट्यूब लिंक पर भी सुना जा सकता है।


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