THE ADDA
THE ADDA: Hindi News, Latest News, Breaking News in Hindi, Viral Stories, Indian Political News

सिस्टम की विफलता की वजह से कारगिल वॉर का हीरो आज बर्तन धोने के लिए हैं मजबूर

सिस्टम से लड़ते-लड़ते आख़िरकार मान ली हार

4,185

1999 में हुए कारगिल युद्ध के बारे में किसी को कुछ बताने की ज़रूरत नहीं है। उस युद्ध के दौरान कई सैनिकों ने अपनी जान गँवाई थी एवं कई हज़ारों सैनिक घायल हुए थे। उन्ही में से एक सैनिक आज जूस की दुकान पर बर्तन धोने के लिए मजबूर है। जी हाँ आजकल कारगिल वॉर के हीरो सतवीर सिंह एक जूस की दुकान पर बर्तन धोते हुए दिखाई पड़ते हैं। इन्हें इस हाल में लाने वाले कोई और नहीं बल्कि सरकारी सिस्टम की विफलता है। बीते दिनों 26 जुलाई को पूरे देश में कारगिल विजय दिवस मनाया गया। लेकिन देश की राजधानी दिल्ली में यह योद्धा बुरे दौर से गुज़र रहा है।

 

गोली लगने की वजह से ठीक से नहीं चल पाते सतवीर:

कारगिल वॉर
Source: Navbharat times

परिवार का गुज़ारा करने के लिए सतवीर ने एक जूस की दुकान खोली है और वहाँ ख़ुद ही झूठे बर्तन धोते हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें लांस नायक सतवीर सिंह दिल्ली के ही मुखमेलपुर गाँव में रहते हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि ये कारगिल युद्ध के दौरान दिल्ली के एकमात्र जबाँज हैं। 19 साल पहले कारगिल युद्ध के समय लगी एक गोली आज भी इनके पैरों में फँसी हुई है। इसकी वजह से ठीक से चल भी नहीं पाते हैं। चलने के लिए इन्हें बैसाखी का सहारा लेना पड़ता है।

 

सिस्टम से लड़ते-लड़ते मान ली हार:

सतवीर सिंह जैसे कई योद्धा जो कारगिल का युद्ध तो जीत गए लेकिन सिस्टम से लड़ते-लड़ते हार मान ली। सतवीर अपने बारे में बताते हैं कि, ‘13 जून 1999 की सुबह के समय वह कारगिल के तोलोलिंग पहाड़ी पर थे। वहाँ घात लगाकर बैठी पाकिस्तानी टुकड़ी से सामना हो गया। पाकिस्तानी सैनिक 15 मीटर की दूरी पर थे। मैंने हैंड ग्रेनेड फेंका और फटते ही पाकिस्तान के 7 सैनिक मारे गए। हालाँकि हमारे भी 7 सैनिक शहीद हुए। उसी दौरान उन्हें भी गोली लग गयी। उसमें से एक गोली उनकी पैर की एड़ी में आज भी फँसी हुई है।’

 

सरकार ने किया था ज़मीन और पेट्रोल पम्प देने का वादा:

सतवीर आगे बताते हैं कि, ‘वह लगभग 17 घंटे तक वहीं पहाड़ी पर पड़े रहे। उनका पूरा ख़ून बह चुका था। हेलिकॉप्टर लेने के लिए आया था लेकिन पाकिस्तानी गोलीबारी की वजह से उतर नहीं पाया। बाद में हमारे ही जवान ले गए। एयरबस से श्रीनगर लाया गया बाद में वहाँ से दिल्ली शिफ़्ट कर दिया गया।’ आपको बता दें कारगिल युद्ध 26 जुलाई 1999 को भारत की जीत के साथ समाप्त हुआ था। उस युद्ध में शहीद हुए अफ़सरों और सैनिकों को विधवाओं और घायल हुए सैनिकों और अफ़सरों को उस समय की सरकार ने पेट्रोल पम्प और खेती की ज़मीन देने की बात की थी।

 

पैसे की कमी से छूट गयी दोनो बच्चों की पढ़ाई:

कारगिल वॉर

सतवीर बताते हैं कि, ‘लगभग एक साल तक उनका इलाज चलता रहा। मुझे भी अन्य लोगों की तरह पेट्रोल पम्प आवंटित होने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी, लेकिन किसी वजह से पेट्रोल पम्प मिल नहीं सका। इसके बाद जीवन गुज़ारने के लिए लगभग 5 बीघा ज़मीन दी गयी। उसपर मैंने फलों का एक बाग़ लगाया। वह ज़मीन मेरे पास लगभग 3 साल तक रहा लेकिन बाद में छिन लिया गया। 2 बेटों की पढ़ाई पैसे की कमी की वजह से छूट गयी। अब पेंशन और इस जूस की दुकान से मुश्किल से घर चल रहा है।’

 

मना करने पर छिन लिया सबकुछ:

सतवीर ने बताया कि, ’13 साल 11 महीने नौकरी करने के बाद उन्हें मेडिकल ग्राउंड पर अनफ़िट क़रार दिया गया। वह दिल्ली से अकेले सिपाही थे। उन्हें सर्विस सेवा का स्पेशल मेडल भी मिला। सरकार ने ज़मीन के साथ पेट्रोल पम्प देने का वादा किया था। उस समय एक बड़ी पार्टी के नेता ने उनसे सम्पर्क किया था। उन्होंने ऑफ़र दिया कि पेट्रोल पम्प उनके नाम कर दूँ। मैंने इनकार किया तो सबकुछ छिन लिया गया। पिछले 19 साल से फ़ाइलें पीएम, राष्ट्रपति और मंत्रालयों में फ़ाइलें घूम रही हैं, लेकिन आज तक कोई नहीं मिला। ना ही अब तक कोई मदद मिली है और ना ही कोई सम्मान।

झूठे बर्तन धो रहा कारगिल युद्ध का हीरो, रुला देगी इसकी कहानी 


और पढ़े:

Comments
Loading...

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More