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जानिए 51 शक्तिपीठों में आख़िर क्यों ख़ास है विंध्याचल धाम

श्रीकृष्ण के जन्म के दिन ही हुआ था माता का जन्म

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नवरात्रि का पावन समय चल रहा है। इस दौरान हर जगह माँ के भक्त माता के जयकारे लगाते हुए दिखाई पड़ जाते हैं। माता के मंदिरों में ही नहीं बल्कि घरों में भी स्तुति गायन सुनने को मिलता है। इन दिनों में हर कोई माता को ख़ुश करना चाहता है, ताकि उसे सुखी जीवन का वरदान मिल सके। भारत भर में माता के 51 शक्तिपीठ हैं और सबका अपना-अपना महत्व है। आज हम आपको इन्ही 51 शक्तिपीठों में से एक ऐसे शक्तिपीठ के बारे में बताने जा रहे हैं, जो माता के प्रमुख शक्तिपीठों में गिना जाता है।

धार्मिक के साथ है भौगोलिक महत्व भी:

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जी हाँ आज हम आपको बताने जा रहे हैं विंध्याचल यानी विंध्य्वसिनी धाम की। माता का यह प्रमुख धाम वाराणसी से लगभग 70 किलोमीटर की दूरी पर स्थित मिर्ज़ापुर जिले में स्थित है। धार्मिक स्थल होने के साथ-साथ इसका भौगोलिक महत्व भी है। आज हम आपको माता के इस प्रमुख धाम से जुड़े कुछ रहस्यों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसके बारे में जानकर आप हैरान हो जाएँगे।

श्रीकृष्ण के जन्म के दिन ही हुआ था माता का जन्म:

आपकी जानकारी के लिए बता दें माँ विंध्यवसिनी को देवी दुर्गा का ही एक स्वरूप माना जाता है, जिन्होंने महिषासुर का वध किया था। मार्कण्डेय पुराण के अनुसार देवी दुर्गा ने सभी देवी-देवताओं को बताया था कि वे नंद और यशोदा के घर उनकी पुत्री के रूप में जन्म लेंगी, जिससे वो सभी असुरों का नाश कर सकेंगी। माता ने उसी दिन जन्म लिया जिस दिन भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था।

कंस हत्या करने के लिए पहुँचा कारागार में:

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पहले ही यह भविष्यवाणी हो चुकी थी कि देवकी और वासुदेव की आठवीं संतान ही कंस के मौत की वजह बनेगी। मौत के डर से कंस ने देवकी और वासुदेव की सभी संतानों को मौत के घाट उतार दिया था। देवकी और वासुदेव की आठवीं संतान के रूप में श्रीकृष्ण ने जन्म लिया था। श्रीकृष्ण की रक्षा करने के लिए वासुदेव ने नंद और यशोदा की पुत्री से उन्हें बदल दिया था। जब कंस को इस बात का पता चला कि देवकी और वासुदेव की एक और संतान ने जन्म लिया है तब शक्तिपीठों वह उसकी हत्या करने के लिए कारागार में पहुँचा।

कन्या आ गयी अपने असली रूप में:

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लेकिन जब वो कारागार में पहुँचा तो उसे देखकर हैरानी हुई, क्योंकि वहाँ पुत्र नहीं बल्कि पुत्री थी। जबकि भविष्यवाणी यह हुई थी कि शक्तिपीठों देवकी और वासुदेव का आठवाँ पुत्र कंस का वध करेगा। इसके बाद भी कंस इतना डर गया कि उसने कन्या को मारने का निर्णय ले लिया। जैसे ही कंस ने मारने के लिए कन्या को उठाया, कन्या अपने असली रूप में आ गयी। देवी दुर्गा शक्तिपीठों ने चेतावनी देते हुए कहा कि तुम्हारी हत्या करने वाला गोकुल में सुरक्षित है। उसके बाद माता अंतर्ध्यान हो गयी और विंध्य पर्वत पर आकर निवास किया।

यहाँ काजल देवी के नाम से जाना जाता है माता को:

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विंध्य पर्वत पर माता विंध्यवासिनी मंदिर स्थित है, जहाँ इनकी पूजा देवी काली के रूप में शक्तिपीठों की जाती है। इन्होंने महिषासुर का वध किया था, इस वजह से इन्हें महिषासुर मर्दिनी के नाम से भी जाना जाता है। देवी सती के 51 अंगों में से एक अंग यहाँ भी गिरा था, जिस वजह से यह स्थान भी शक्तिपीठ के रूप में जाना जाता है। यहाँ माता को काजल देवी के नाम से भी जाना जाता है।


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