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भगवान शिव का यह अद्भुत मंदिर 12 महीने डूबा रहता है पानी में, जानें इसकी ख़ासियत

अपनी ख़ासियत की वजह से मशहूर है पूरी दुनिया में

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भारत में सदियों से धर्म को काफ़ी महत्व दिया गया है। भारत में वैसे तो कई धर्म के लोग मिलकर रहते हैं, लेकिन हिंदू धर्म में आस्था रखने वाले सबसे ज़्यादा लोग हैं। हिंदू धर्म में त्रिदेव की पूजा का विशेष महत्व है। इन्ही त्रिदेवों में से एक हैं भगवान शंकर। भगवान शिव के भारत भर में कई मंदिर हैं। कुछ मंदिर अपने चमत्कार की वजह सी पूरी दुनिया में मशहूर है। कुछ मंदिरों का इतिहास इतना ज़्यादा पुराना है, कि उसके बारे में कोई नहीं जनता है।

अपनी ख़ासियत की वजह से मशहूर है पूरी दुनिया में:

भगवान शिव

आज हम आपको भगवान शिव के एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसका इतिहास हज़ारों साल पुराना है। भारत में भगवान शिव के कई अद्भुत मंदिर हैं। इसके साथ ही भगवान शिव के कई मंदिर विदेशों में भी स्थित हैं। लेकिन आज हम आपको जिस मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, वह अपनी ख़ासियत की वजह से पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। क्या आप जानते हैं कि भगवान शिव का एक ऐसा भी मंदिर है जो 12 महीने जाल में डूबा रहता है।

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दर्शन के लिए उतरना पड़ता है पानी में:

मंदिर से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार इस शिवलिंग की स्थापना च्यवन ऋषि ने की थी। उन्ही के आह्वान पर माँ नर्मदा गुप्त रूप से प्रकट हुई थीं और शिवलिंग का पहली बार अभिषेक किया गया था। उसी समय से यहाँ एक वट वृक्ष से जलधारा निकल रही है, जिसकी वजह से शिवलिंग हमेशा जलमग्न रहता है। मान्यताओं के अनुसार चंद्रकेश्वर मंदिर की स्थापना आज से लगभग 3000 साल पहले च्यवन ऋषि ने की थी। इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ भगवान शिव के दर्शन करने के लिए भक्तों को पानी में उतरना पड़ता है।

स्वयं आ रही हूँ आपके मंदिर में:

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इस मंदिर के बारे में पुजारी बताते हैं कि जब च्यवन ऋषि ने तपस्या करने के लिए इस मंदिर की स्थापना की थी, उस समय नर्मदा नदी यहाँ से 60 किलोमीटर दूर बहती थी। ऋषि को स्नान करने के लिए हर रोज़ लम्बा सफ़र तय करना पड़ता था। ऋषि के लगन को देखकर नर्मदा माँ उनसे ख़ुश हुई और कहा कि मैं स्वयं आपके मंदिर में आ रही हूँ। अगले दिन ही मंदिर में जलधारा फूटी और नर्मदा वहीं पहुँच गयी। जानकारी के अनुसार च्यवन ऋषि के बाद कई ऋषियों ने यहाँ तपस्या की, इनमें सप्तऋषि प्रमुख थे। इस मंदिर में सावन के सोमवार को भक्तों की विशेष भीड़ एकत्र होती है। यहाँ आने वाले भक्त पहले नर्मदा कुंड में स्नान करते हैं, फिर भगवान शिव के दर्शन करते हैं।


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