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शारीरिक रोगों से हमेशा के लिए मुक्ति दिलाता है यह चमत्कारी मंदिर, जानें

500 सालों से बना हुआ है आस्था का केंद्र

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हिंदू धर्म में कई देवी-देवताओं की पूजा की जाती हैं। इन्ही में से शीतला माता भी एक हैं। हिंदू धर्म में इनका बहुत ज़्यादा महत्व है। प्राचीनकाल से ही शीतला माता को प्रसिद्धि प्राप्त है। मान्यताओं के अनुसार माता शीतला का वाहन गधा है। ये हाथ में कलश, सूप, झाड़ू और नीम का पत्ता लिए रहती हैं। इन्हें चेचक की देवी के रूप में माना जाता है। चेचक बीमारी के बारे में बताने की ज़रूरत नहीं है। इसे ज़्यादातर लोग स्मॉलपॉक्स या चिकनपॉक्स नाम से जानते है।

चेचक की देवी हैं माता शीतला:

चेचक की देवी होने की वजह से शीतला माता त्वचा रोग, रक्त संक्रमण जैसे रोगों से मुक्ति दिलाने का काम करती हैं। जहाँ-जहाँ भी माता शीतला का मंदिर है, वहाँ भक्तों की ख़ूब भीड़ एकत्र होती है। आज हम आपको शीतला माता के एक ऐसे चमत्कारी मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जहाँ जाने से आपको शारीरिक रोगों से छुटकारा मिल सकता है। रोगों से मुक्ति पानें के लिए यहाँ दूर-दूर से लोग आते हैं।

मंदिर

साल में दो बार यहाँ लगता है मेला:

आपकी जानकारी की लिए बता दें शीतला माता का यह चमत्कारी मंदिर हरियाणा के गुड़गाँव में स्थित है। इस मंदिर में देशभर से श्रद्धालु मन्नत माँगने के लिए आते हैं। माता का यह मंदिर देशभर के भक्तों के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है। यहाँ पर हर साल दो बार मेला लगता है। नवरात्रि के समय माता के दर्शन के लिए भक्त भारी संख्या में इस मंदिर में आते हैं।

500 सालों से बना हुआ है आस्था का केंद्र:

इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि इसका सम्बंध महाभारत काल से है। ऐसा बताया जाता है कि महाभारत के समय में भारतवंशियों के कुल गुरु कृपाचार्य की नगरी गुड़गाँव में उनकी पत्नी शीतला देवी के रूप में शीतला माता की पूजा होती थी। लगभग 500 सालों से यह मंदिर लोगों के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है। इस मंदिर में देशभर से लोग माता की पूजा-अर्चना करने के लिए आते हैं।

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60 लाख से ज़्यादा लोग आते हैं मेले में:

मान्यता के अनुसार यहाँ पूजा करने से शरीर में निकलने वाले दाने, जिसे लोग चिकनपॉक्स के नाम से जानते हैं, से मुक्ति मिलती है। यहाँ पर नए जन्मे बच्चे का मुंडन भी किया जाता है। ऐसा करने से उस बच्चे के शरीर पर कोई भी रोग नहीं होता है। हर साल यहाँ एक महीने तक मेले में मुंडन किया जाता है। इसके लिए यहाँ 60 लाख से ज़्यादा लोग आते हैं।


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