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साल में केवल एक दिन के लिए खुलता है यह मंदिर, जानें ख़ासियत

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शिव-पार्वती के पुत्र गणेश के बारे में तो सब जानते हैं, लेकिन इनके पुत्र कार्तिकेय के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। आपको बता दें कि जैसे गणेश जी की पूजा को बहुत महत्व है, ठीक वैसे ही कार्तिकेय जी के पूजा बहुत ही लाभकारी मानी जाती है। आज हम आपको इन्हीं के एक मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं जो साल में केवल एक बार खुलता है, परंतु जिस दिन इस मंदिर के कपाट खुलते हैं उस दिन यहां भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ती है।

कार्तिकेय के नाम पर पड़ा कार्तिक मास का नाम:

हिंदू धर्म में बारह मासों में से सबसे श्रेष्ठ कार्तिक मास को माना जाता है। इस पूरे माह में भगवान विष्णु की पूजा का विधान रहता है। इसके बारे में तो सब जानते होंगे, लेकिन आपको बता दें कि इस दौरान भगवान कार्तिकेय की भी पूजा का बहुत विधान रहता है। अगर पौराणिक मान्यताओं की मानें इस माह में भगवान विषणु ने शिव-पार्वती के पुत्र कार्तिकेय को धर्म मार्ग को प्रबल करने की प्रेरणी दी थी। इसीलिए ये माह इनके द्वारा की गई साधना का माह माना जाता है। कहा जाता है कि इसीलिए इस माह को कार्तिक मास का नाम दिया गया था।

स्थापित हैं त्रिवेणी की मूर्तियाँ:

माना जाता है यहीं कारण है कि ये भगवान कार्तिकेय का ये मंदिर सालभर में सिर्फ एक बार कार्तिक पूर्णिमा के दिन खुलता है। बता दें कि भगवान कार्तिकेय का ये अद्भुत मंदिर मध्यप्रदेश के ग्वालियर में स्थित है। इसके बारे में ये भी कहा जाता है कि ये भारक देश का इकलौता ऐसा मंदिर है जो करीब 400 साल पुराना है। यहां शिव-पार्वती के पुत्र भगवान कार्तिकेय के साथ-साथ गंगा, यमुना, सस्वती और त्रिवेणी की मूर्तियां भी स्थापित हैं।

मंदिर

पूर्णिमा के दिन खुलता है मंदिर:

यहां के पुजारियों के द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक कार्तिक पूर्णिमा के दिन मंदिर के कपाट सुबह चार बजे खुल जाते हैं। श्रृद्धालु सुबह चार बजे से ही भक्त भगवान की एक छलक पाने के लिए लंबी कतारों में लग जाते हैं। मंदिर प्रांगण में भगवान कार्तिकेय के साथ इस मंदिर में हनुमान जी, गंगा, जमुना, सरस्वती और लक्ष्मीनारायण आदि मंदिर हैं, इन सभी मंदिरों में तो रोज़ दर्शन किए जाते हैं। लेकिन कार्तिकेय जी के दर्शन सिर्फ़ पूर्णिमा के दिन ही किए जा सकते हैं।


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