THE ADDA
THE ADDA: Hindi News, Latest News, Breaking News in Hindi, Viral Stories, Indian Political News

गांधी जयंती: क्या आप जानते हैं महात्मा गांधी कैसे मनाते थे अपना जन्मदिन, जानें

पूरे विश्व में मनाया जाता है अन्तर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में

5,944
SHEIN -Your Online Fashion Jumpsuit

मोहनदास करमचंद गांधी यानी महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। वो भारत एवं भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के एक प्रमुख राजनैतिक एवं आध्यात्मिक नेता थे। वे सत्याग्रह (व्यापक सविनय अवज्ञा) के माध्यम से अत्याचार के प्रतिकार के अग्रणी नेता थे, उनकी इस अवधारणा की नींव सम्पूर्ण अहिंसा के सिद्धान्त पर रखी गयी थी, जिसने भारत को आजादी दिलाकर पूरी दुनिया में जनता के नागरिक अधिकारों एवं स्वतन्त्रता के प्रति आन्दोलन के लिये प्रेरित किया। उन्हें दुनिया में आम जनता महात्मा गांधी के नाम से जानती है। संस्कृत भाषा में महात्मा अथवा महान आत्मा एक सम्मान सूचक शब्द है।

  1. पूरे विश्व में मनाया जाता है अन्तर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में:

गांधी को महात्मा के नाम से सबसे पहले 1915 में राजवैद्य जीवराम कालिदास ने संबोधित किया था। उन्हें बापू (गुजराती भाषा में બાપુ बापू यानी पिता) के नाम से भी याद किया जाता है। सुभाष चन्द्र बोस ने 6 जुलाई 1944 को रंगून रेडियो से गांधी जी के नाम जारी प्रसारण में उन्हें राष्ट्रपिता कहकर सम्बोधित करते हुए आज़ाद हिन्द फौज़ के सैनिकों के लिये उनका आशीर्वाद और शुभकामनाएँ माँगीं थीं। हर साल 2 अक्टूबर को उनका जन्म दिन भारत में गांधी जयंती के रूप में और पूरे विश्व में अन्तर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस के नाम से मनाया जाता है।

अस्पृश्यता के विरोध में चलाए कई कार्यक्रम:

सबसे पहले गांधी ने प्रवासी वकील के रूप में दक्षिण अफ्रीका में भारतीय समुदाय के लोगों के नागरिक अधिकारों के लिये संघर्ष हेतु सत्याग्रह करना शुरू किया। 1915 में उनकी भारत वापसी हुई। उसके बाद उन्होंने यहाँ के किसानों, मजदूरों और शहरी श्रमिकों को अत्यधिक भूमि कर और भेदभाव के विरुद्ध आवाज उठाने के लिये एकजुट किया। 1921 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की बागडोर संभालने के बाद उन्होंने देशभर में गरीबी से राहत दिलाने, महिलाओं के अधिकारों का विस्तार, धार्मिक एवं जातीय एकता का निर्माण व आत्मनिर्भरता के लिये अस्पृश्यता के विरोध में अनेकों कार्यक्रम चलाये। इन सबमें विदेशी राज से मुक्ति दिलाने वाला स्वराज की प्राप्ति वाला कार्यक्रम ही प्रमुख था।

आत्मशुद्धि के लिए रखे लम्बे-लम्बे व्रत-उपवास:

Mahatma Gandhi

गाँधी जी ने ब्रिटिश सरकार द्वारा भारतीयों पर लगाये गये नमक कर के विरोध में 1930 में नमक सत्याग्रह और इसके बाद 1942 में अंग्रेजो भारत छोड़ो आन्दोलन से खासी प्रसिद्धि प्राप्त की। दक्षिण अफ्रीका और भारत में विभिन्न अवसरों पर कई वर्षों तक उन्हें जेल में भी रहना पड़ा। गांधी जी ने सभी परिस्थितियों में अहिंसा और सत्य का पालन किया और सभी को इनका पालन करने के लिये वकालत भी की। उन्होंने साबरमती आश्रम में अपना जीवन गुजारा और परम्परागत भारतीय पोशाक धोती व सूत से बनी शाल पहनी जिसे वे स्वयं चरखे पर सूत कातकर हाथ से बनाते थे। उन्होंने सादा शाकाहारी भोजन खाया और आत्मशुद्धि के लिये लम्बे-लम्बे उपवास रखे।

गांधी जी नहीं मनाते थे अपना जन्मदिन:

SHEIN -Your Online Fashion Blouse

- Advertisement -

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती के मौक़े पर केंद्र सरकार, राज्य सरकार और गांधीवादी संस्थाओं की तरफ़ से कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। सफ़ाई से लेकर अहिंसा के पाठ और अन्य जीवन के कई अहम सबक़ के लिए लोग महात्मा गांधी को याद करते हैं। लेकिन क्या आप यह बात जानते हैं कि जिस महात्मा गांधी के जन्मदिन को पूरी दुनिया बड़े धूम-धाम से मनाती है, वो महात्मा गांधी अपने जन्मदिन को कैसे मनाते थे और अपने जन्मदिन के दिन क्या करते थे? गांधीवादी रामचंद्र राही के अनुसार, शायद गांधीजी अपना जन्मदिन नहीं मनाते थे।

जन्मदिन के दिन मौन रहते थे गांधी जी:

Mahatma Gandhi

रामचंद्र राही आज से 100 साल पहले गांधी जी के कहे कथनों का ज़िक्र करते हुए कहते हैं कि, आज से 100 साल पहले जब महात्मा गांधी ने अपना जन्मदिन मनाने वालों से कहा था, ‘मेरी मृत्यु के बाद मेरी कसौटी होगी कि मैं जन्मदिन मनाने लायक हूँ कि नहीं।’ रामचंद्र राही ने कहा कि गांधी जी के लिए उनका जन्मदिन का दिन बहुत ही गंभीर होता था। वह इस दिन भगवान की प्रार्थना करते थे, चरख़ा चलाते थे और ज़्यादातर समय मौन रहते थे। किसी भी ख़ास दिन को गांधी जी इसी तरह से मनाते थे। जब राही से यह कहा गया कि, आज सरकार गांधी जयंती के दिन तरह-तरह के कार्यक्रमों का आयोजन कर रही है। इसके जवाब में उन्होंने कहा कि सरकार कोई भी आयोजन अपने मतलब से करती है।

राजनीतिक पार्टियाँ इस्तेमाल करती है गांधी को:

राही ने आगे कहा कि सरकार को गांधी जी के विचारों से कोई मतलब नहीं है। सरकार अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा को पूरा करने के लिए केवल गांधी जी के नाम का इस्तेमाल करती है। उन्होंने आगे कहा कि अगर सच में सरकार गांधी जी का जन्मदिन मानना चाहती है तो उसे गांधी के विचारों के अनुसार इस समाज को आगे ले जानें की कोशिश करनी चाहिए। लेकिन ऐसा कुछ होता हुआ नहीं दिखाई दे रहा है। वर्तमान सरकार गांधी जी के जन्मदिन को सफ़ाई के साथ जोड़ती है। बता दें मोदी सरकार ने गांधी जयंती को स्वच्छता दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया है।

मृत्यु के मुँह में धकेलना, सरकार के लिए है शर्म की बात:

Mahatma Gandhi

गांधी जयंती के उपलक्ष्य में सरकार की तरफ़ से स्वच्छ अभियान चलाए जा रहे हैं। इस पर राही ने कहा कि, अगर सफ़ाई के बारे में सोचा जाए तो सबसे पहला काम यह होना चाहिए कि, देश में सफ़ाई करने वालों को ऐसी सुविधाएँ मुहैया करवाई जानी चाहिए, जिससे उन्हें गटर में उतरकर सफ़ाई ना करनी पड़े। सफ़ाई कर्मियों को मृत्यु के मुँह में धकेलना सरकार के लिए शर्म की बात है। बता दें पिछले दिनों एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में हर तीन दिन में एक सफ़ाई कर्मी की मौत हो जाती है। सीवर की सफ़ाई के दौरान उचित उपकरणों की कमी से ये हादसे होते हैं। जिसपर केंद्र सरकार की तरफ़ से कोई क़दम नहीं उठाया जा रहा है।


यह भी पढ़ें:-

Loading...
Loading...

- Advertisement -

SHEIN -Your Online Fashion Blouse

- Advertisement -

Comments
Loading...

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More