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बेटी की मौत के बाद चपरासी पिता ने भरी 45 ग़रीब लड़कियों की स्कूल फ़ीस

ग़रीब व्यक्ति की परेशानी केवल एक ग़रीब ही समझ सकता है

Source:ANI
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कहा जाता है कि हर माँ-बाप का सपना होता है कि उनके बच्चे उनसे ज़्यादा समय तक जिएँ और उनके आख़िरी समय में उनका सहारा बने। लेकिन सच ही कहा गया है कि जो होना होता है, वही होता है। किसी के चाहने से कुछ नहीं होता है। हर इंसान लम्बी और अच्छी ज़िंदगी चाहता है, लेकिन लम्बी ज़िंदगी सभी को नसीब नहीं होती है। कई लोग समय से पहले ही इस दुनिया को छोड़कर चले जाते हैं। ऐसे में बस उनकी यादें ही अपनों के लिए जीने का सहारा बनती हैं।

 

चैरिटी करके बन जाते हैं भगवान:

जब किसी का कोई अपना चला जाता है तो वह दुःख के सागर में डूब जाता है, जबकि कुछ लोग दुःख के सागर में डूबने की बजाय कुछ ऐसा काम कर जाते हैं, जिसकी वजह से उसकी चर्चा पूरी दुनिया में होने लगती है। आजकल भी ठीक ऐसा ही हो रहा है। जानकारी के अनुसार पिछले दिनों कर्नाटक में कुछ ऐसा हुआ है, जिसकी चर्चा केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में हो रही है। कई लोगों को आपने देखा होगा कि वो लोगों की चैरिटी करके मदद करते हैं। ऐसे लोग भगवान बन जाते हैं।

 

रच दिया है एक नया इतिहास:

लेकिन एक बाप ने कुछ ऐसा कर दिखाया है, जिसके बारे में जानकर आप भी सोचेंगे कि काश दुनिया का हर बाप ऐसा होता तो आज दुनिया का रूप ही बदल गया होता। इस बाप ने कुछ ऐसा किया है कि आजकल हर जगह इसकी तारीफ़ हो रही है। आपको बता दें कर्नाटक के एक गाँव के MPHS सरकारी हाई स्कूल में चपरासी का काम करने वाले बासवराज ने 45 ग़रीब लड़कियों के स्कूल की फ़ीस भरकर एक नया इतिहास रच दिया है। इस वजह से बासवराज की हर जगह तारीफ़ हो रही है। बताया जा रहा है कि इन्होंने ऐसा अपनी बेटी की याद में किया है।

 

बासवराज के क़दम से काफ़ी ख़ुश हैं स्कूल की लड़कियाँ:

बासवराज की बेटी की मौत हो चुकी है। बासवराज ने इस बारे में कहा कि, ‘इस साल से में उन ग़रीब लड़कियों की फ़ीस भरूँगा जो स्कूल में पढ़ाई करती हैं।’ बासवराज कर्नाटक के कालाबुर्गी शहर के रहने वाले हैं, कुछ समाऊँ पहले इनकी बेटी की मौत बीमारी की वजह से हुई थी। जिसकी वजह से बासवराज ने कुछ नया करने के बारे में सोचा। इन्होंने उन ग़रीब बच्चियों की ज़िंदगी में उजाला करने के बारे में सोचा जो पैसों के अभाव में पढ़ाई बीच में ही छोड़ देती हैं। बासवराज के इस क़दम से स्कूल की लड़कियाँ काफ़ी ख़ुश हैं।

 

ग़रीब व्यक्ति की परेशानी केवल एक ग़रीब ही समझ सकता है:

फ़ातिमा नाम की एक लड़की ने बताया कि, ‘हम बहुत ही ग़रीब परिवार से हैं। हम स्कूल की फ़ीस भरने में असमर्थ हैं। बासवराज सर ने अपनी बेटी की याद में बहुत ही नेक काम किया है। भगवान उनकी बेटी की आत्मा को शांति दे।’ आपकी जानकारी के लिए बता दें ANI ने बासवराज की इस कहानी को अपने ट्वीटर हैंडल पर शेयर भी किया है। लोग बासवराज की ख़ूब तारीफ़ कर रहे हैं। ट्वीट पर एक व्यक्ति ने लिखा है कि, ‘क्या कोई आमिर आदमी ऐसा कर सकता है। सिर्फ़ एक ग़रीब व्यक्ति ही लोगों की परेशानियों को समझ सकता है। अमीर आदमी अपने पैसों की बर्बादी और शादी-पार्टी में पैसा ख़र्च करते हैं।’

 

पेश की है इंसानियत की बेहतरीन मिसाल:

बासवराज का यह क़दम वाक़ई क़ाबिले-तारीफ़ है। समाज में ऐसे और बासवराज की ज़रूरत हैं जो किसी की याद में काइयों का भला करते हैं। बासवराज के इस क़दम से अब हर कोई उनकी मृत बेटी की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना कर रहा है। अब बासवराज की कहानी को जानकर शायद कई अन्य लोग भी इस रास्ते पर चलने लगें, इससे देश की बेटियों की शिक्षा भी बढ़ेगी और समाज का कल्याण भी होगा। हालाँकि लोग ऐसा करते हैं या नहीं, यह तो समय ही बताएगा, लेकिन एक बात तो है कि बासवराज ने इंसानियत की बेहतरीन मिसाल पेश की है।


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