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पत्रिका के कवर पर माडल द्वारा स्तनपान वाले फोटोसूट पर मची खलबली

गृहलक्ष्मी मैगज़ीन के कवर पे स्तनापान कराती महिला की तस्वीर पर कोर्ट ने कहा, अश्लीलता देखने वाले की नज़र में !

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गृहलक्ष्मी मैगज़ीन के कवर पे स्तनापान कराती महिला की तस्वीर पर कोर्ट ने कहा, अश्लीलता देखने वाले की नज़र में है 

 

दरअसल इसी साल फरवरी के महिने में केरल से प्रकाशित पत्रिका गृहलक्ष्मी ने अपने मलयालम अंक के कवर पर स्तनपान कराती मांडल का फोटो प्रकाशित किया था. इसे अश्लील बताकर याचिका दाख़िल की गई थी.

याचिकाकर्ता फेलिक्स एमए ने याचिका में दायर किया था कि मैगजीन का कवर पेज यौन अपराधों से बच्चों की सुरक्षा कानून (पांक्सो) और किशोर न्याय कानून की धारा 45 का उल्लंघन करता है, उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि इससे महिलाओं का अश्लील प्रतिनिधित्व (निषेध) अधिनियम, 1986 का उल्लंघन होता है और संविधान के अनुच्छेद 39(ई) और (एफ) का भी उल्लंघन है. जबकि केरल से छपने वाली पत्रिका गृहलक्ष्मी ने एक कैंपेन चलाया था जिसमें खुले में स्तनपान कराने के बारे में शर्मनाक क्या है? केरल पत्रिका ने एक अभियान शुरु किया, जिसमें पत्रिका में दो महिलाओं की स्तनपान कराने वाले शिशुओं की तस्वीरें हैं (उनमें से एक मांडल है), और माताओं से उपाख्यानों को भर दिया गया है,

malayalam-grihalaxmi-magazine-cover-photo-shot-breastfeedingगृहलक्ष्मी पत्रिका के मलयालम अंक के कवर पर माडल और अभिनेत्री गिलु जोसेफ की बच्चे को स्तनपान कराती एक तस्वीर लगी थी. जिसने राज्य में काफी विवाद को जन्म दे दिया था, इसे समाज के एक बङे हिस्से का इसे समर्थन मिला लेकिन कई अन्य लोगों के गुस्से का भी सामना करना पङा, कई लोगो ने इसे अश्लीलता की दृष्टी से देखा तो कई ने इसे कलात्मक दृष्टी से देखा, जबकि मैगजीन के मूल उद्देश्य यह था कि सार्वजनिक स्थानों पर भी स्तनपान कराने को जनता के बीच सामान्य बनाना था, जैसा कि आप देखते है कि कहीं भी कोई औरत अपने बच्चे को भूख से तङपते देख, उसको स्तनपान कराती है,

पत्रिका की सोच थी कि औरते अपने बच्चे को दूध पिलाते वक्त अपने को शर्मिदा महसूस न करे. इस पर सोशल मीडिया पर बङा ही बवाल मचा था, लोगो ये भी कहा था कि इसमें मांडल को दूसरे का बच्चा लेकर फोटो खिचवाने की क्या जरुरत पङा.

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अदालत ने ये भी कहा कि एक व्यक्ति के लिए जो चीज अभद्रता है वही दूसरो के लिए काव्यात्मक है,

हालांकि जोसेफ ने इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए कहा था, मैंने वही किया जो मुझे ठीक लगा. मै असफल हो सकती थी, लेकिन मुझे कोई पछतावा नहीं है. महिलाओं को स्वतंत्र रुप से बिना किसी डर और पाबंदी के स्तनपान करना चाहिए और लेख में मेरा संदेश यही था लेकिन लोगों ने मेरी आलोचना शुरु कर दी, बिना पढ़े ही कि मेरा कहना था. malayalam-grihalaxmi-magazinecover-photo-shot-breastfeeding

जबकि अदालत का कहना है कि भारतीय मानसिकता जमाने से इतनी परिपक्व रही है कि पवित्रता में कामुकता देख सकती है उदाहरण आदेश में विभिन्न अदालतों के कई फैसलों और साहित्यिक कार्यों को उद्दधतल करते हुए अंतिम निर्णय में कहा गया, समकालीन सामुदायिक मानकों के साथ जाते हुए हम देख सकते हैं कि दिए गए विशेष मुद्रा और इसकी बैकग्राउंड सेटिंग्स (स्तनपान कराना जैसा कि पत्रिका में चित्रित किया गया है, यह अश्लील या कामुक नहीं है और ऐसा संकेत भी नहीं देती है.

इस याचिका पर कोच्चि केरल उच्च न्यायलय ने फैसला देते हुए इस याचिका को खारिज कर दिया, इसमें दो जजो की पीठ ने जस्टिस एंटनी डांमिनिक और जस्टस दामा शेषद्री नायडू की पीठ ने अपने आदेश में कहा, हमें तस्वीर में कुछ भी अश्लील नहीं लग रहा है, न ही इसके कैप्शन में कुछ आपत्तिजनक है. हम तस्वीर को उन्हीं नजरों से देख रहे है पीठ ने कहा, चूंकि सौंदर्य देखने वाले की नजर में होता है उसी तरह अश्लीलता भी संभवत नजर में होती है !


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