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जानिए गणित का नोबल ‘फ़िल्ड्स पुरस्कार’ पानें वाले भारतीय मूल के अक्षय वेंकटेश के बारे में

13 साल की उम्र में यूनिवर्सिटी की पढ़ाई करने चले गए आस्ट्रेलिया

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भारतियों के दिमाग़ का लोहा आज के समय में पूरी दुनिया मान चुकी है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारतियों का दिमाग़ पूरी दुनिया में सबसे बेहतर दिमाग़ माना जाता है, भारतियों का दिमाग़ किसी कम्प्यूटर से कम नहीं होता है। कुछ ऐसे विषय हैं, जिनमें भारतियों को पीछे कर पाना मुश्किल ही नहीं मनुमकिन भी है। गणित एक ऐसा ही विषय है। आपको जानकर हैरानी होगी कि गणित के क्षेत्र में दिया जाने वाला रामानुजन पुरस्कार एक भारतीय गणितज्ञ के नाम पर ही दिया जाता है। इन्हें दुनिया का सबसे महान गणितज्ञ माना जाता था।

 

स्टैनफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी में प्रोफ़ेसर हैं वेंकटेश:

Akshay Venkatesh

हाल ही में भारतीय मूल के गणितज्ञ अक्षय वेंकटेश को फ़िल्ड्स मेडल के सम्मान से नवाज़ा गया है। आपको बता दें इसे गणित के क्षेत्र का नोबल पुरस्कार भी माना जाता है। रियो डी जनेरियो में बुधवार को गणितज्ञों की अन्तर्राष्ट्रीय कांग्रेस में वेंकटेश को यह पुरस्कार दिया गया। आपको बता दें कि गणित के क्षेत्र में दिया जाने वाला फ़िल्ड्स मेडल चार साल में एक बार 40 साल से कम उम्र के उभरते हुए गणितज्ञ को दिया जाता है। जानकारी के अनुसार वेंकटेश स्टैनफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं। इस पुरस्कार पर क़ब्ज़ा करने वाले वह भारतीय मूल के दूसरे व्यक्ति हैं।

 

समारोह में चोरी हो गया कौचर का मेडल:

इससे पहले 2014 में यह पुरस्कार मंजुल भार्गव ने जीता था, इस बार तीन अन्य विजेताओं में कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर कौचर बिरकर (40), स्विस फ़ेडरल इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नॉलजी के एलिसो फिगाली (34) और बॉन यूनिवर्सिटी के पीटर स्कूल्ज हैं। सभी विजेताओं को सोने के मेडल के साथ 15000 कनाडाई डॉलर का नक़द पुरस्कार भी दिया गया। लेकिन आपको जानकर काफ़ी हैरानी होगी कि समारोह के दौरान ही कौचर बिरकर का मेडल चोरी हो गया। कौचर बिरकर ने बताया कि उन्हें जब मेडल मिला तो उन्होंने इसे अपने सूटकेस में रख लिया था, कुछ देर बाद ही उन्हें पता चला कि उनका सूटकेस ग़ायब है।

 

बचपन से ही वेंकटेश को थी गणित में रुचि:

जब उन्होंने इसके बारे में सुरक्षा अधिकारियों को जानकारी दी तो अधिकारियों ने इसकी खोज शुरू कर दी। कुछ देर बाद सूटकेस मिल भी गया, लेकिन वह ख़ाली था। इस मामले में पुलिस ने दो संदिग्धों की पहचान भी कर ली है। बताया जा रहा है कि मेडल की क़ीमत लगभग 4000 डॉलर है। अगर भारतीय मूल के अक्षय वेंकटेश की बात करें तो वेंकटेश का जन्म नई दिल्ली में हुआ था। जब वो दो साल के थे तभी उनके माता-पिता आस्ट्रेलिया चले गए थे। अक्षय की बचपन से ही गणित में ख़ास रुचि थी। वो बचपन से ही गणित में माहिर थे। वेंकटेश का जीवन बचपन से ही काफ़ी शानदार रहा है।

 

13 साल की उम्र में यूनिवर्सिटी की पढ़ाई करने चले गए आस्ट्रेलिया:

Akshay Venkatesh

उन्होंने बचपन से ही उपलब्धियाँ हासिल करनी शुरू कर दी थी। हाईस्कूल के दौरान वेंकटेश ने फ़िज़िक्स और मैथ ओलम्पियाड में हिस्सा भी लिया था। आपकी जानकारी के लिए बता दें हाईस्कूल के छात्रों के लिए यह बहुत ही प्रतिष्ठित प्रतियोगिता होती है। 11-12 साल की उम्र में ही उन्होंने इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेकर अपनी प्रतिभा का लोहा पूरी दुनिया को मनवा दिया था। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि उन्होंने 13 साल की उम्र में ही अपनी हाईस्कूल की पढ़ाई ख़त्म कर ली थी, उसके बाद वो यूनिवर्सिटी की पढ़ाई करने के लिए आस्ट्रेलिया चले गए थे।

 

20 साल की उम्र में पूरी कार्ल ली पीएचडी:

1997 में 16 साल की उम्र में वेंकटेश ने प्रथम श्रेणी में मैथ आनर्स पास किया। 2002 में जब वेंकटेश मात्र 20 साल के थे तभी उन्होंने अपनी पीएचडी भी पूरी कर ली थी। इसके बाद वेंकटेश को एमआईटी में पोस्ट डॉक्टरल पोज़ीशन मिली और वो क्ले रीसर्च फ़ेलो बन गए। इस समय वो स्टैनफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी में प्रोफ़ेसर हैं। जानकारी के अनुसार वेंकटेश 15 अगस्त से प्रिंसटन के इंस्टीट्यूट फ़ॉर एडवांस स्टडी में कार्यभार सम्भालेंगे। अक्षय को 2008 में तमिलनाडु की शनघुम आर्ट्स, साइंस, टेक्नॉलजी एंड रीसर्च एकेडमी की तरफ़ से रामानुजन मेडल भी दिया गया था। 2016 में उन्हें इंफ़ोसिस साइंस फ़ाउंडेशन ने भी सम्मानित किया था।

 


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