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उत्तर भारतीय लोक संगीत की धुनों के कलावंत सतीश नेगी

सतीश नेगी उर्फ सतेंद्र सिंह की पूरी कहानी

2,011

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गढवाली कुमाऊनी राजस्थानी भोजपुरी पंजाबी हरियाणवी एल्बम में रिदम संगत औऱ रिदम अरेंजर के रूप में लोकप्रिय 10 हजार से ऊपर रिदम रिकॉर्डिंग जिसमे लगभग 500 एल्बम उत्तराखंड से जुड़ी है

उत्तराखंड ऑडियो संगीत में सबसे अनुभवी रिदम कलाकार है सतीश नेगी उर्फ सतेंद्र सिंह

satish negiउत्तराखंड ऑडियो संगीत में 80 के दशक एक ऐसा कलाकार संगत कर रहा जिसके तबले की थाप लोकगायक चन्द्र सिंह राही, गढ़ गौरव नरेंद्र सिंह नेगी से लेकर लोकगायक गोपाल गोस्वामी , हीरा सिंह राणा. जगदीश बकरोला से लेकर प्रीतम भरतवाण और आज के युग के नये नये गायको के गीतों में रिदम दी है ।

हम अक्सर कैसेट कवर या एल्बम में उसके गाने वालों को तो याद रखते पर जिन कलावंत साजदानो ने उन गीत को खूबसूरत बनाया है अपने शिल्पी हाथों से उनके योगदान को भूल जाते या उन पर लिखना पढ़ना भूल जाते है आज ऐसे कलाकार की बात हो रही जिसकी तालों में गायकों ने खूब गीत गाये दर्शको ने जिसकी तालों को सुनकर खूब नाचे कैसेट कवर में रिदम आर्टिस्ट का नाम कवर पेज लिखने का रिवाज शुरू से होता तो लगभग हर उत्तराखंड से जुड़ी एल्बम सतीश नेगी उर्फ सतेंद्र सिंह जी नाम भी आता

वो उत्तराखण्ड के गीत संगीत में 500 ज्यादा एल्बम में रिदम में संगत कर चुके है

वर्तमान में सतीश नेगी उर्फ सतेंद्र सिंह अपने पिता चन्द्र सिंह राही के गीत संगीत की परम्परा को आगे बढ़ा रहे जिसको राही घराना नाम दिया यह लोक संगीत और उतराखण्ड संगीत को सवंर्धन और विस्तार के लिए सक्रिय है !

अस्सी के दशक से 90 दशक तक सतीश नेगी के रिदम का जादू हर एल्बम में छाया।

satish negiसतेंद्र नेगी जी उत्तराखण्ड के अलावा हिंदी , पंजाबी , भोजपुरी सभी रीजनल लोक भाषाओं में रिदम संगीत दे चुके उन्होंने कई नाटकों और फिल्मो बेकग्रौंड में रिदम दी है वो रिदम के अरेंजर आरटिस्ट भी है उन्होंने दिल्ली दूरदर्शन और आल इंडिया के कार्यक्रमो रिदम बजायी वो अब तक लगभग 10 हजार से ज्यादा प्रोग्राम में रिदम बजा चुके है और साथ ही उनकी लगभग 10 हजार रिकॉर्डिंग हो चुकी है गीतों में सन् 2017 तक वो देश भर से लेकर दुबई तक उनकी रिदम का जादू चला ! कार्यक्रमों में सतीश नेगी जी ने लोक वाद्य अपने पिता स्वर्गीय श्री चन्द्र सिंह राही जी से सीखे और क्लासिकल दशमल जी और गाल्डविन चार्ल्स जी से सीखा इसके आलावा लाइट क्लासिकल ढोलक, तबला बसन्त लाल जी से सीखा , सतीश नेगी जी प्रयाग संगीत समिति इलाहबाद से संगीत विशारद हैं ! उतराखण्ड ही नही उत्तर भारत के लोक संगीत के रिकॉर्डिंग एल्बम में एक रिदम युग सतीश नेगी उर्फ सतेंद्र सिंह ।

 


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