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मोदी सरकार के अंतिम बजट की तैयारियाँ शुरू, बजट बनाने में जुटा वित्त मंत्रालय

जो सरकार जीतकर आती है वह पेश करती है पूर्ण बजट

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मोदी सरकार का कार्यकाल अगले साल ख़त्म होने वाला है और अगले साल ही लोकसभा के चुनाव भी होने वाले हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए मोदी सरकार अगले लोकसभा चुनाव से पहले पेश किए जानें वाले अपने अंतिम बजट की तैयारियों में लग गयी है। जानकारी के अनुसार वित्त मंत्रालय 12 अक्टूबर से सभी विभागों के साथ बजट अनुमानों को लेकर चर्चा शुरू करने जा रहा है। इसके बाद केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली अलग-अलग क्षेत्र के विशेषज्ञों के साथ बजट पूर्व चर्चा भी करेंगे।

 

जो सरकार जीतकर आती है वह पेश करती है पूर्ण बजट:

सूत्रों से पता चला है कि वित्त मंत्रालय की बजट डिविज़न ने बजट सर्कुलर 2019-20 जारी कर दिया है। इसी के साथ ही बजट की तैयारियों की औपचारिक शुरुआत भी हो गयी है। चुनावी साल में सरकार पूर्ण बजट पेश करने की बजाय लेखानुदान पेश करती है, जिसे अंतिम बजट भी कहा जाता है। इसमें सरकार अगले वित्त वर्ष के शुरुआती कुछ महीनों के लिए धनराशि की माँग करती है। चुनाव के बाद जीतकर जो भी सरकार सत्ता में आती है, वह फिर पूर्ण बजट पेश करती है।

 

कितनी धनराशि का आवंटन होगा यह तय होगा 15 जनवरी को:

सूत्रों से यह भी पता चला है कि बजट पूर्व बैठकों की शुरुआत 12 अक्टूबर से होनी है। सभी मंत्रालयों के वित्तीय सलाहकारों को उनके विभागों से सम्बंधित बजट अनुमानों का ब्यौरा देने को कहा गया है। सभी विभागों को वित्त वर्ष 2018-19 के लिए संशोधित अनुमान तथा 2019-20 के बजट के लिए विभगवार व योजनावार राशि का भी उल्लेख करने के लिए कहा गया है। बजट पूर्व होने वाली बैठकों का दौर नवम्बर के पहले सप्ताह तक चलेगा। हालाँकि किस योजना के लिए कितनी धनराशि का आवंटन किया जाएगा, यह वित्त मंत्रालय सरकार के पास उपलब्ध संसाधनों का आंकलन करने के बाद 15 जनवरी तक तय करेगा।

 

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पिछले साल से कम नहीं होनी चाहिए आवंटित धनराशि:

सूत्रों ने कहा कि इस साल के आम बजट में स्वायत्त संस्थाओं के लिए अलग से फ़ंड बनाया जा रहा है। इस फ़ंड में से स्वायत्त संस्थाओं को आवंटन किया जाएगा। आम बजट में जिन योजनाओं का आवंटन 10 करोड़ रुपए या उससे अधिक है, उनका विशेष रूप से उल्लेख किया जाएगा। वित्त मंत्रालय ने सभी विभागों से साफ़-साफ़ कहा कि 2019-20 के बजट में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के सब प्लान में आवंटित धनराशि चलु वित्त वर्ष एवं पिछले साल के आम बजट में आवंटित राशि से कम नहीं होनी चाहिए।

 

देश की जनता को करना पड़ रहा है काफ़ी परेशानियों का सामना:

बता दें अरुण जेटली ने एक फ़रवरी 2018 को चलु वित्त वर्ष के लिए 24.42 लाख करोड़ रुपए का बजट पेश किया था। माना जा रहा है कि अगले वित्त वर्ष के लिए भी बजट एक फ़रवरी को ही पेश किया जा सकता है। बता दें मोदी सरकार का पूरा ध्यान इस समय 2019 के लोकसभा चुनाव पर है। भाजपा किसी भी तरह से जनता को ख़ुश करने में जुटी हुई है। लेकिन मोदी सरकार की इस रणनीति को महँगाई और महागठबंधन से बहुत ज़्यादा ख़तरा है। यह बात किसी से छुपी हुई नहीं है कि मोदी सरकार में पेट्रोल-डीज़ल की क़ीमतों में काफ़ी बढ़ोत्तरी हुई है। इससे देश की जनता को काफ़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।


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