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मोहन भागवत ने कहा, अगर हम कहेंगे मुसलमान नहीं चाहिए तो हिंदुत्व भी नहीं बचेगा

हिंदुत्व आज की राजनीति में बन गया है विवाद का विषय

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आरएसएस के हिंदुत्व एजेंडे को लेकर हमला करने वाले राजनीतिक दलों और संगठनों को संघ के मुखिया मोहन भागवत ने भारतीय संविधान की मंशा और हिंदुत्व दर्शन की समानता दिखाकर चुप कराने की कोशिश की है। संविधान की प्रस्तावना में भ्रातृत्व भावना के विकास का उल्लेख करते हुए भागवत ने कहा कि, विविधता में एकता, समभाव और एक दूसरे के प्रति सम्मान हिंदुत्व का सार भी है। मोहन भागवत ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि अगर कोई कहेगा कि मुसलमान नहीं चाहिए तो हिंदुत्व भी नष्ट हो जाएगा।

 

हिंदुत्व दर्शन का नहीं है किसी सम्प्रदाय से अलगाव:

मोहन भागवत ने कहा कि, संघ संविधान की प्रस्तावना के एक-एक शब्द से ना सिर्फ़ सहमत है बल्कि पूरी श्रद्धा के साथ उसका पालन भी करता है। संघ के लिए संविधान की भावना हिंदू दर्शन से अलग नहीं है और इसलिए खुलकर हिंदुत्व की बात करता है। उन्होंने कुछ राजनीतिक दलों का नाम लिए बिना ही उनपर तंज कसते हुए कहा कि, कुछ लोग राजनीतिक रूप से फ़िट बैठने के लिए भले ही हिंदुत्व शब्द से परहेज़ करते हों, लेकिन सही मायनों में हिंदुत्व दर्शन में किसी भी सम्प्रदाय से अलगाव नहीं है।

 

हिंदुत्व आज की राजनीति में बन गया है विवाद का विषय:

आपकी जानकारी के लिए बता दें भविष्य का भारत विषय पर संघ की तीन दिवसीय चर्चा के दूसरे दिन भागवत ने उस मुख्य मुद्दे यानी हिंदुत्व को छुआ जो आज के समय में राजनीति में विवाद का विषय बन गया है। संघ के सहारे भाजपा को निशाना बनाया जाता है और साम्प्रदायिकता चुनावी मुद्दा बनता है। बता दें मोहन भागवत ने किसी भी राजनीतिक दल का नाम लिए बिना ही हिंदुत्व और संविधान को आमने-सामने रख दिया। संविधान की प्रस्तावना पढ़ते हुए भागवत ने कहा ख़ुद अम्बेडकर ने कहा था कि संविधान की मंशा नागरिकों में भ्रातृत्व पैदा करना और हर व्यक्ति के लिए सम्मान सुनिश्चित करना है।

 

सुप्रीम कोर्ट ने भी हिंदुत्व को धर्म से अलग बताया है:

मोहन भागवत ने कहा कि आपस में लड़ाई पैदा करना ना तो संविधान की मंशा है और ना ही हिंदुत्व दर्शन है। उन्होंने अपने सम्बोधन के दौरान कहा कि, जिस दिन हम कहेंगे कि मुसलमान नहीं चाहिए, उसी दिन हिंदू भी नहीं रहेंगे। जिस दिन यहाँ कहेंगे कि केवल वेद चलेंगे, दूसरे ग्रंथ नहीं चलेंगे, उसी दिन हिंदुत्व भी ख़त्म हो जाएगा। उन्होंने कहा कि हिंदुत्व में वसुधैव कुटुम्बकम शामिल है। जितने भी सम्प्रदाय जन्में हैं, सबकी मान्यता है। वैसे तो हिंदुत्व की यह व्याख्या बार-बार होती रहती है और तो और सुप्रीम कोर्ट ने भी हिंदुत्व को धर्म से अलग बताया हुआ है।

 

हिंदुत्व को साम्प्रदायिकता से जोड़ने वाले कर रहे हैं समाज तोड़ने की कोशिश:

लेकिन आज के समय के राजनीतिक माहौल में भागवत के बयान बहुत महत्वपूर्ण हैं। भागवत का यह बयान भाजपा के उन नेताओं के लिए भी थप्पड़ है जो अक्सर हिंदुत्व और सम्प्रदाय को लेकर विवादित बयान देते रहते हैं और चर्चा में छाए रहते हैं। भागवत ने बार-बार हर धर्म और धर्मावलंबियों के लिए हिंदुत्व के सम्मान की बात दुहराते हुए यह स्थापित करने की कोशिश की कि जो लोग हिंदुत्व को साम्प्रदायिकता से जोड़ने की कोशिश करते हैं, असल में वह समाज को तोड़ने की कोशिश में लगे होते हैं।

 

मुसलमान से पहले हैं वो एक भारतीय:

हिंदुत्व की विशाल अवधारणा का उल्लेख करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि राष्ट्र की पहचान के रूप में संघ ने हिंदू को अपनाया है। कुछ लोग चुप रहते हैं। इसी क्रम में भागवत ने सर सैय्यद अहमद खान का भी उल्लेख किया और कहा कि सर सैय्यद अहमद खान बैरिस्टर बने तो लाहौर के आर्य समाज ने उनका स्वागत किया और कहा कि वह मुसलमानों के पहले बैरिस्टर हैं। सर सैय्यद उठे तो उन्होंने आपत्ति जताई और कहा कि वह एक मुसलमान से पहले एक भारतीय हैं। लेकिन आज के समय में यह बहुत कम देखने को मिलता है।

 

भगवान झंडा है संघ का गुरु:

आपको बता दें कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल हमेशा से ही संघ और भाजपा के प्रति कड़े रूख अपनाता आया है। जब भी मौक़ा मिलता है विपक्षी दल संघ के ऊपर निशाना साधने से चूकते नहीं हैं। अभी हाल ही में अपनी विदेश यात्रा के दौरान राहुल गांधी ने भी संघ के ऊपर जमकर निशाना साधा था। राहुल गांधी ने कहा था कि संघ में एक भी महिला आपको नहीं दिखाई देगी। क्योंकि संघ महिलाओं को बराबरी का दर्जा देना ही नहीं चाहता है। इसके अलावा संघ के ऊपर हमेशा से यह आरोप लगता आया है कि संघ तिरंगे को सम्मान नहीं देता है, बल्कि संघ का अपना भगवा झंडा है। इसके बारे में भी संघ प्रमुख मोहन भागवत ने सफ़ाई दी।

 

संघ के कार्यक्रम में शामिल हुई बॉलीवुड हस्तियाँ:

तिरंगे के बारे में मोहन भागवत का कहना है कि संघ तिरंगे का बहुत सम्मान करता है, लेकिन भगवा झंडा संघ का गुरु है। संघ के कार्यकर्ता भगवा झंडे के नीचे ही खड़े होकर शपथ लेते हैं। बता दें संघ के इस तीन दिवसीय कार्यक्रम में लगभग 700 लोग शामिल हुए हैं। इसमें विभिन्न दलों ने नेताओं के साथ बॉलीवुड की भी कुछ हस्तियाँ शामिल हुई हैं। संघ यह दिखाना चाहता है कि वह सबको साथ लेकर चलता है। राहुल गांधी को भी संघ के कार्यक्रम में बुलाए जानें की बात हो रही थी, लेकिन कांग्रेस ने इस बात से इनकार किया है कि उसे कोई निमंत्रण मिला है।

 


 

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