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जोशी की कमेटी ने PMO को भेजा नोटिस, पूछा रघुराम राजन की NPA लिस्ट पर क्या एक्शन लिया

दिग्गज नेताओं को कर दिया राजनीति की मुख्यधारा से बाहर

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मोदी सरकार की मुश्किलों का अंत होता हुआ दिखाई नहीं दे रहा है। एक तरफ़ मोदी सरकार अपनी साख सुधारने में लगी हुई है और दूसरी तरफ़ राफ़ेल डील की वजह से भारत ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में मोदी सरकार की छवि ख़राब हो रही है। भाजपा आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनाव में अच्छा प्रदर्शन करना चाहती है, लेकिन राफ़ेल डील शायद भाजपा का काम बिगाड़ दे। पहले तो राफ़ेल डील पर केवल कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और अन्य विपक्षी दलों के नेता भाजपा पर हमला करते थे, लेकिन अब ख़ुद भाजपा के ही कई नेता पीएम मोदी के ख़िलाफ़ होते हुए दिख रहे हैं।

 

संसदीय कमेटी ने खड़ी कर दी मोदी के सामने मुश्किल:

हाल ही में अभिनेता से नेता बने शत्रुघ्न सिन्हा ने पीएम मोदी समझाते हुए कहा था कि अगर राफ़ेल डील में कोई ग़लती हुई है तो पीएम देश से माफ़ी क्यों नहीं माँग लेते। उसके बाद अब पता चल रहा है कि भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी की अध्यक्षता वाली एक संसदीय कमेटी ने मोदी सरकार के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी कर दी है। जानकारी के अनुसार संसद की प्राक्कलन समिति ने प्रधानमंत्री कार्यालय से पूछा है कि वह समिति को पूरा ब्यौरा उपलब्ध कराए जिसमें बैंकों की एनपीए की समस्या से लड़ने के लिए केंद्र सरकार ने ऐसे बड़े औद्योगिक घरानों के ख़िलाफ़ क्या करवाई की है, जिसके चलते बैंकों के एनपीए में बढ़ोतरी हुई है।

 

क्यों उनके ही क्षेत्र में हुआ इज़ाफ़ा:

बता दें कि एनपीए के लिए ज़िम्मेदार उद्योगपति घरानों की यह लिस्ट पूर्व रिज़र्व बैंक गवर्नर रघुराम राजन ने अपने कार्यकाल के दौरान प्रधानमंत्री कार्यालय को दी थी। मोदी सरकार के लिए मुरली मनोहर जोशी की समिति ने सिर्फ़ यही चुनौती रखी है। समिति ने केंद्र सरकार की कोयला और ऊर्जा मंत्रालय को भी नोटिस भेजते हुए सफ़ाई माँगी है कि क्यों उनके क्षेत्र में बैंक के एनपीए में लगातार इज़ाफ़ा हो रहा है।

 

दिग्गज नेताओं को कर दिया राजनीति की मुख्यधारा से बाहर:

रघुराम राजन ने संसदीय समिति को हाल ही में दिए अपने बयान में कोयला और ऊर्जा क्षेत्र को बैंकिंग क्षेत्र के एनपीए के लिए सबसे बड़ा ज़िम्मेदार बताया था। ग़ौरतलब है कि कोयला मंत्रालय की कमान इस समय केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के हाथ में है। वहीं हाल ही में केंद्रीय मंत्री आरके सिंह को ऊर्जा मंत्रालय दिए जानें से पहले इस मंत्रालय की कमान भी पीयूष गोयल के हाथ में ही थी। बता दें जब से भाजपा की मोदी सरकार बनी है तब से पार्टी के कई दिग्गज नेताओं को मुख्यधारा की राजनीति से दरकिनार कर दिया गया है।

 

एनपीए की समस्या से निपटने के लिए माँगी थी राजन से मदद:

उन्ही में से एक मुरली मनोहर जोशी भी हैं, जिन्हें भाजपा की मुख्यधारा की राजनीति से दरकिनार करते हुए उन्हें पार्टी के सभी मुख्य फ़ैसलों से अलग कर दिया गया था। मोदी सरकार ने 2014 में सत्ता सम्भालने के बाद जोशी सहित लालकृष्ण आडवाणी को मर्गदर्शक मंडल में भेजते हुए पार्टी में उनकी गतिविधियों को सीमित कर दिया था। अब सूत्रों के अनुसार पता चला है कि मुरली मनोहर जोशी की अध्यक्षता वाली इस लोकसभा समिति ने प्रधानमंत्री कार्यालय को हाज़िरी के लिए तालाब करते हुए रघुराम राजन की लिस्ट पर की गई कार्यवाई का ब्यौरा माँगा है। बता दें हाल ही में प्राक्कलन समिति ने एनपीए की समस्या से निपटने के लिए रघुराम राजन की मदद माँगी थी।

 

 

पुराने नेताओं ने कर दी भाजपा के ख़िलाफ़ आवाज़ प्रखर:

जिस तरह से भाजपा के पुराने नेता भाजपा के ख़िलाफ़ अपनी आवाज़ तेज़ कर रहे हैं, उससे यही लगता है कि भाजपा में अंदरूनी तौर पर फूट पड़ चुकी है। जो भाजपा सबका साथ-सबका विकास का नारा लगाती है, उसकी अपनी ही पार्टी के नेता उसके ख़िलाफ़ हो रहे हैं। भाजपा ने जब से पार्टी के सीनियर नेताओं को पार्टी से बाहर करके नए मंत्रिमंडल का गठन किया है, तब से पार्टी के कई पुराने नेता भाजपा के ख़िलाफ़ अपनी आवाज़ प्रखर कर रहे हैं। कई सीनियर नेताओं ने तो भाजपा को अलविदा कहते हुए अपनी नई पार्टी का गठन भी किया है।


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