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पाकिस्तान के इस मंदिर में बने स्कूल में पढ़ाती है मुस्लिम महिला, सलाम के जवाब में बच्चे कहते हैं….

काफ़ी समय से धमकी दे रहे हैं भू माफ़िया

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भारत-पाकिस्तान के बँटवारे के बाद भारत एक सेक्यूलर राष्ट्र बना वहीं पाकिस्तान एक मुस्लिम राष्ट्र बना। 1947 में दोनो देशों के बीच धर्म के आधार पर ही बँटवारा हुआ था। बँटवारे के समय जो जहाँ रहना चाहता था, वहाँ रह सकता था। लेकिन भारत के ज़्यादातर मुस्लिम पाकिस्तान चले गए, वहीं पाकिस्तान में रहने वाले लगभग सभी हिंदू भारत चले आए थे। लेकिन बँटवारे के समय भारत में भी काफ़ी मुस्लिम रुक गए थे। उसी तरह पाकिस्तान में भी कुछ हिंदू रुके हुए हैं।

 

करते हैं दोनो समुदायों के बीच प्यार का बीज बोने का काम:

भारत में रहने वाले मुस्लिम समुदाय के लोगों की स्थिति अच्छी है। उन्हें सभी अधिकार भी दिए गए हैं, लेकिन पाकिस्तान में रहने वाले हिंदुओं की स्थिति ऐसी नहीं है। आज भी वहाँ हिंदुओं को कई अधिकार नहीं मिले हैं। कहने के लिए तो वो पाकिस्तान के ही नागरिक हैं, लेकिन उन्हें कई ऐसे काम करने की आज़ादी नहीं है जो वहाँ के मुस्लिम समुदाय के लोग करते हैं। हालाँकि आज हम इस विषय पर बात नहीं करने वाले हैं। आज इतने नफ़रत के बीच भी कई ऐसे लोग हैं, जो दोनो समुदायों के बीच में प्यार का बीज बोने के काम करते हैं, हम उन लोगों के बारे में बात करेंगे।

 

काफ़ी समय से धमकी दे रहे हैं भू माफ़िया:

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पाकिस्तान में एक हिंदू मंदिर स्थित है, जहाँ मंदिर के अंदर ही स्कूल लगता है। यहाँ एक मुस्लिम टीचर बच्चों को पढ़ाने आती हैं। जी हाँ आपकी जानकारी के लिए बता दें मंदिर में लगने वाले स्कूल में टीचर अनुम आगा हिजाब पहनकर बच्चों को पढ़ाने आती हैं। क्लास में दाख़िल होते ही अनुम आगा बच्चों को सलाम करती हैं, उसके जवाब में बच्चे उन्हें जय श्रीराम कहते हैं। जानकारी के अनुसार काफ़ी समय से इस मंदिर पर भू-मफ़ियाओं की नज़र है। वो इसे हथियानें के लिए काफ़ी समय से धमकी भी दे रहे हैं, लेकिन अनुम आगा डरी नहीं और अपने फ़र्ज पर डंटी रहीं।

 

मंदिर में मुस्लिम महिला का पढ़ाना है बड़ी बात:

मंदिर के आस-पास बदहाल घरों में लगभग 80-90 हिंदू परिवार रहते हैं। पढ़ाने के बाद अनुम बच्चों के घर जाकर उनसे बात भी करती हैं। अनुम ने कहा कि, ‘जब मैं लोगों को मंदिर में चल रहे स्कूल के बारे में बताती हूँ तो वो सुनकर हैरान हो जाते हैं। लेकिन हमारे पास कोई अन्य जगह नहीं है, जहाँ स्कूल चलाया जा सके।’ बच्चों की क्लास मंदिर के जिस भाग में लगती है, वहीं पर देवी-देवताओं की मूर्तियाँ स्थापित हैं। मुस्लिम समुदाय के लोग मंदिरों में नहीं जाते हैं, ऐसे में एक मंदिर में जाकर किसी मुस्लिम महिला का पढ़ाना बहुत बड़ी बात है।

 

1960 के दशक में सिंध के कबाइली इलाक़े से आए थे कई हिंदू:

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हिंदू समुदाय के नेता शिव धारणी बताते हैं कि, यहाँ हिंदू सुरक्षित नहीं है। पिछले चार साल में दो घटनाएँ हो चुकी हैं, जिसमें हिंदुओं को उनके ही घरों में ज़िंदा लगा दिया गया। यहाँ के हिंदुओं को यह इलाक़ा छोड़ने के लिए हमेशा धमकाया जा रहा है। यहाँ की प्रशासन भी हिंदुओं के साथ नाइंसाफ़ी करती है। कुछ दिन पहले प्रशासन ने हिंदुओं के घरों की बिजली-पानी का कनेक्शन भी काट दिया था। 1960 के दशक में सिंध के कबाइली इलाक़े घोटकी से कई हिंदू परिवार कराची आए थे। उसके बाद से ही यहाँ हिंदुओं और मुस्लिमों में तनातनी रहती है।

 

हिंदू समुदाय के लिए काफ़ी काम कर रहे हैं आरिफ़:

कुछ समय पहले भी यहाँ पर तनाव हुआ था। उस समय एक मुस्लिम इलाक़े में मंदिर की ज़मीन पर मस्जिद बनाने का प्रस्ताव दिया गया था। मानवाधिकार कार्यकर्ता आरिफ़ हबीब कहते हैं कि, ‘भू माफ़िया मौलवियों को इस बात के लिए उकसाते रहते हैं कि हिंदुओं का मुस्लिम पड़ोस में रहना जायज़ नहीं है। हिंदुओं से हमें ख़तरा है। कुल मिलाकर भू माफ़िया यह चाहते हैं कि हिंदू समुदाय के लोग मंदिर वाली ज़मीन को ख़ाली कर दें।’ आपकी जानकारी के लिए बता दें आरिफ़ हिंदू समुदाय की भलाई के लिए काफ़ी काम करते रहते हैं। उन्होंने ही अनुम को हिंदू बच्चों को पढ़ाने के लिए यहाँ लाया है।

 

यहाँ के हिंदुओं को नहीं पता है अपने मूल अधिकारों के बारे में भी:

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अनुम कहती हैं कि मंदिर के पास रहने वाले मुस्लिम नहीं चाहते हैं कि उनके आस-पास हिंदू समुदाय के लोग रहें। यहाँ के मुस्लिम हिंदुओं को निचले दर्जे का समझते हैं। में स्कूल में पढ़ाने के लिए इसलिए जा रही हूँ कि उन्हें अपने मूल अधिकारों के बारे में भी पता नहीं है। यहाँ के हिंदुओं के बच्चों को शिक्षा की बहुत ज़रूरत है। इलाक़े के हिंदू इस बात से काफ़ी ख़ुश हैं कि उनके बच्चों और ख़ासतौर से लड़कियों को पढ़ने के लिए दूर नहीं जाना पड़ता है। पाकिस्तान के कराची में यह हालत है तो सोचिए अन्य जगहों पर क्या हालत होगी। पाकिस्तान में रहने वाले हिंदुओं की लगभग हर जगह यही हालत है।

 


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