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मुज़फ़्फ़रपुर बालिका गृह रेप केस में कब क्या हुआ जानिए

क्या पूरा होगा बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का सपना सच

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बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर बालिका गृह में 34 लड़कियों के साथ हुए रेप का मामला सामने आने के बाद से पूरा देश ग़ुस्से में है। जगह-जगह लोग नीतीश सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे हैं। जानकारी के अनुसार इस रेप केस में बड़े-बड़े लोगों के शामिल होने की बात भी सामने आयी है। बताया जा रहा है कि बालिका गृह का संचालक ब्रजेश ठाकुर बहुत पहुँच वाला व्यक्ति है और इसके सम्बंध बड़े-बड़े नेताओं से भी हैं। यह नेताओं की छत्र-छाया में ही इतना आगे तक बढ़ पाया है।

 

क्या पूरा होगा बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का सपना सच:

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जिन लड़कियों का बालिका गृह में रेप हुआ, वो सभी लड़कियाँ नाबालिग़ हैं। लड़कियों की उम्र 7 साल से लेकर 17 साल के बीच है। मामले के ख़ुलासे के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अफ़सोस भी जाता चुके हैं। इस मामले ने देश को एक बार फिर से सोचने पर मजबूर कर दिया है। क्या पीएम मोदी का बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का नारा हक़ीक़त बन पाएगा या नहीं? जब बेटियों के साथ इतनी बड़ी संख्या में कुकृत्य हो रहा है तो आख़िर बेटियाँ सुरक्षित कैसे हो सकती हैं। इस केस में कब क्या हुआ आइए जानते हैं।

 

 

 

आख़िर ऐसे लोगों को कहाँ से मिलती है हिम्मत:

31 मई 2018 को टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ़ सोशल साइंस मुंबई की रिपोर्ट फ़रवरी 2018 में सरकार को सौंपी गयी। इसके कई महीने बाद 31 मई 2018 को ब्रजेश ठाकुर सहित 11 लोगों के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज किया गया। इसके बाद एक स्पेशल जाँच टीम बनाई गयी। इसी दिन बालिका गृह से सभी लड़कियों को दूसरे बालिका गृह भेजा गया। 3 जून को ब्रजेश ठाकुर सहित 8 लोगों को गिरफ़्तार किया गया। गिरफ़्तार होने के बाद हाल ही में ब्रजेश ठाकुर की एक हँसते हुए तस्वीर वायरल हुई थी, जिसने एक सवाल सबके सामने खड़ा कर दिया कि ऐसे लोगों को आख़िर हिम्मत कहाँ से मिलती है।

 

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ऐसी घटनाओं से बचने के सुझाए उपाय:

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14 जून को शेल्टर होम को सील कर दिया गया। महिला और बाल कल्याण मंत्रालय ने इसकी जानकारी दी। 26 जुलाई को सरकार ने इस मामले की जाँच सीबीआई से करवानें की सिफ़ारिश की। 29 जुलाई को एक अन्य शेल्टर होम से 15 महिलाओं और बच्चों के ग़ायब होने की वजह से ब्रजेश ठाकुर पर एक अन्य एफआईआर दर्ज किया गया। 1 अगस्त को बिहार के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को एक पत्र लिखकर इस घटना को हृदय विरादक कहा। उन्होंने ऐसी घटनाओं से बचने के लिए सरकार को उपाय भी सुझाए।

 

दोषियों को दी जाएगी कड़ी से कड़ी सज़ा:

2 अगस्त को सप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से इस मामले पर जवाब माँगा। इसके साथ ही सीबीआई को शेल्टर होम की फ़ोरेंसिक जाँच के भी आदेश दिए। 3 अगस्त को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मुज़फ़्फ़रपुर बालिका गृह मामले में अफ़सोस जताते हुए कहा कि वह इस बात को सुनिश्चित करेंगे कि राज्य में क़ानून व्यवस्था ठीक तरह से लागू हो। इस घटना में चुप्पी तोड़ते हुए उन्होंने कहा कि दोषियों को कड़ी से कड़ी सज़ा दी जाएगी।

 


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