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उज्ज्वला से 1968 में पहली बार मिले थे एनडी तिवारी, 46 साल बाद की थी शादी

नाज़ुक लड़की आ गयी तिवारी की नज़र में

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एनडी तिवारी के बारे में किसी को बताने की ज़रूरत नहीं है। एनडी तिवारी एक ऐसा नाम है, जिसे देशभर में सभी लोग जानते हैं। ये इकलौते ऐसे व्यक्ति थे, जिन्होंने दो प्रदेशों की सत्ता पर राज किया। 18 अक्टूबर को अपने जन्मदिन के दिन ही एनडी तिवारी ने लम्बी बीमारी से लड़ते हुए इस दुनिया को अलविदा कह दिया। राजनीति से हटकर एनडी तिवारी का निजी जीवन बेहद विवादों में रहा खासकर जीवन के 80 वसंत देखने के बाद लंबी चली कानूनी लड़ाई के बाद उन्होंने 88 साल की उम्र में दूसरी शादी की थी।

आख़िरकार देना ही पड़ा तिवारी को सैम्पल:

एनडी तिवारी

एनडी तिवारी अपने जवानी के दिनों में रंगीनमिजाजी के लिए मशहूर थे। उन्हें अपने जीवन के 80वें दशक के अंतिम दौर में उस समय सबसे मुश्किल दौर का सामना करना पड़ा, जब रोहित शेखर नाम के एक युवा ने एनडी तिवारी के ऊपर पितृत्व का केस कर दिया और उन्हें अपना जैविक पिता माना। कोर्ट ने इसके लिए तिवारी का डीएनए सैंपल टेस्ट लेने का आदेश दिया, जिसके लिए काफी नानुकूर करने के बाद तिवारी को यह सैंपल देना ही पड़ा। आपको बता दें एनडी तिवारी की उज्ज्वला शर्मा से पहली मुलाकात आज से करीब 50 साल पहले हुई थी। रोहित शेखर की मां उज्ज्वला शर्मा की तिवारी से पहली मुलाकात 1968 में अपने पिता के घर पर हुई थी तब वह उम्र के तीसरे दशक में थीं।

नाज़ुक लड़की आ गयी तिवारी की नज़र में:

उस समय तिवारी युवा कांग्रेस के अध्यक्ष थे। उज्ज्वला के पिता प्रो. शेर सिंह अविभाजित पंजाब में प्रताप सिंह कैरों के मुख्यमंत्रित्व काल में उप-मंत्री रह चुके थे। 1967-80 में वे शिक्षा और रक्षा उत्पादन मंत्रालय में केंद्रीय मंत्री बने। उज्ज्वला और उनके पति बीएल शर्मा ने जब अलग होने का फैसला किया तो उनके गर्भ में बड़ा बेटा सिद्धार्थ आ चुका था। जैसा कि वे बताती हैं, मेरे और शर्मा जी (पति बीएल शर्मा) के बीच बहुत ज़्यादा तालमेल नहीं था, इसलिए हमने अलग होने का फैसला किया। जब वे तिवारी से मिलीं तब दिल्ली विवि में संस्कृत पढ़ाती थीं। उसी समय यह नाजुक युवा लड़की तिवारी की निगाह में आ गई।

1977 में हो गई अंतरंग सम्बंध बनाने को तैयार:

उज्ज्वला याद करते हुए आगे बताती हैं, धीरे-धीरे हमारा परिचय बढ़ा और उनके प्रणय निवेदन शुरू हो गए। एनडी तिवारी ने कहा, तुम एकाकी जीवन जी रही हो। वे सादगीपूर्ण बताती हैं, आख़िरकार 1977 में मैं उनके साथ अंतरंग संबंध बनाने को तैयार हुई, जिसके लिए एनडी तिवारी पिछले 6-7 साल से कोशिश कर रहे थे। मामले की शुरुआत 2008 में हुई जब एनडी तिवारी के खिलाफ रोहित पहली बार अदालत की शरण में गए। वहाँ उन्होंने दावा किया कि वो पूर्व कांग्रेस नेता और अपनी मां उज्जवला शर्मा के पुत्र हैं। तिवारी ने दिल्ली उच्च न्यायालय में इस केस को खारिज करने की गुहार कोर्ट में लगाई लेकिन मार्च, 2010 में उसे खारिज कर दिया गया।

कोर्ट ने उसकी अपील को मानने से कर दिया इनकार:

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हाईकोर्ट ने 23 दिसंबर, 2010 को इस दावे की सच्चाई का पता लगाने के लिए डीएनए टेस्ट कराने का आदेश दिया। लेकिन इसके लिए एनडी तिवारी आसानी से राजी नहीं हुए। सुप्रीम कोर्ट में भी उन्होंने इसकी गुहार लगाई, जहां से उन्हें निराशा ही हाथ लगी। एनडी तिवारी को कोर्ट की सख्ती के बाद 29 मई 2011 को डीएनए जांच के लिए अपना खून देना पड़ा। इस डीएनए जांच की रिपोर्ट 27 जुलाई 2012 को दिल्ली हाईकोर्ट में खोली गई। लेकिन तिवारी की तरफ़ से कोर्ट में यह अपील भी दायर की गई कि रिपोर्ट को सार्वजनिक ना किया जाए। लेकिन कोर्ट कहाँ उनकी सुनने वाला था, कोर्ट ने उनकी इस अपील को मानने से इनकार कर दिया और रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ कि तिवारी रोहित के जैविक पिता हैं और उज्जवला जैविक माता।

डीएनए रिपोर्ट ने साबित किया रोहित मेरा बेटा है:

खास बात यह है कि जब तिवारी डीएनए टेस्ट देने से कतरा गए तो रोहित के कानूनी पिता बीएल शर्मा अपना डीएनए सैंपल 2010 में अदालत में देने को तैयार हो गए। जबकि शर्मा से उज्ज्वला पहले ही तलाक ले चुकी थीं। टेस्ट के नतीजे से प्रमाणित हो गया कि वे रोहित के पिता नहीं हैं। कोर्ट की ओर से रोहित को एनडी तिवारी का जैविक पिता माने जाने के बाद उन्होंने इस मामले में मीडिया से उनकी निजता को बनाए रखने की गुजारिश की। 6 साल चले पितृत्व केस हारने के बाद 3 मार्च, 2014 को नारायण दत्त तिवारी ने रोहित शेखर को अपना बेटा स्वीकार कर लिया। तब उन्होंने कहा, मैंने स्वीकार कर लिया है कि रोहित शेखर मेरा बेटा है। डीएनए रिपोर्ट ने भी यह साबित किया है कि वो मेरा जैविक बेटा है।

उच्च न्यायालय की तरफ़ से ख़ारिज कर दी गयी थी मध्यस्थता की गुज़ारिश:

इस पर उनके बेटे रोहित ने भी प्रतिक्रिया दी, मैं अचंभित हूं कि एनडी तिवारी ने आख़िरकार मुझे अपना बेटा स्वीकार लिया है। लेकिन यह भी याद रखने वाली बात है कि उन्होंने रोहित को अपना बेटा तब माना जब हाईकोर्ट की ओर से मध्यस्थता की गुजारिश खारिज कर दी गई। साथ ही रोहित की मां उज्ज्वला शर्मा ने भी इस मामले में मध्यस्थता की गुजारिश को यह कहते हुए नकार दिया था, कि यह उनकी प्रॉपर्टी से जुड़ा मामला नहीं बल्कि केवल इतना है कि रोहित उनका बेटा है। उज्ज्वला शर्मा ने कहा, डीएनए रिपार्ट ने यह साबित कर दिया था कि वो ही रोहित के पिता हैं। वो तभी इस पर बीच का रास्ता निकाल सकते थे लेकिन वो कोर्ट चले गए।

तीन महिलाओं संग दिख रहे थे आपत्तिजनक हालत में:

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डीएनए रिपोर्ट आने के 2 साल के अंदर 14 मई, 2014 को एनडी तिवारी ने लखनऊ में रोहित की मां उज्ज्वला के साथ शादी कर ली। विवाह के समय उनकी उम्र 88 साल थी। इससे पहले 2009 में टीवी पर एनडी तिवारी की एक कथित सेक्स सीडी सामने आई, जिसने पूरे देश की राजनीति में भूचाल ला दिया। हर तरफ उसकी चर्चा होने लगी। उस सीडी में तिवारी तीन महिलाओं संग आपत्तिजनक स्थिति में दिख रहे थे। उस वीडियो क्लिप को तेलुगू चैनल ने प्रसारित किया था। इस सीडी के सियासत ने ऐसा रंग दिखाया कि उन्हें आंध्र प्रदेश राज्यपाल पद से इस्तीफा देकर वापस लौटना पड़ा।

तीन बार रहे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री:

आपकी जानकारी के लिए बता दें एनडी तिवारी 3 बार उत्तर प्रदेश (1976–77, 1984–85, 1988–89) और एक बार उत्तराखंड (2002–2007) के मुख्यमंत्री रहे हैं। इसके अलावा वह प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल के दौरान विदेश मंत्री भी रह चुके थे। साथ ही वह 2007 से 2009 के बीच आंध्र प्रदेश के राज्यपाल रहे। वह दो प्रदेश के मुख्यमंत्री का पद संभालने वाले देश के एकमात्र नेता रहे।


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