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उत्तराखंडी लोक गीत संगीत आडियो क्रांति का जनक नेगी दा

लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी जी की गीत संध्या जो नेगी नाईट से फेमस हुई !

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आजकल जब हम रियलटी शो में देखते दो साल, पांच साल के बच्चे मंचो पर गाते हैं ! सिंगर भी कहते हम दो या पांच साल या 10 साल से बचपन से गा रहे किन्तु इस अपवाद से अलग एक सिंगर कलाकार गायक संगीतकार ऐसा जिसने बचपन मे स्कूल कालेज के दौर में एक भी गीत न गाया था उनके अंदर गायक कवि संगीतकार का जन्म वयस्क उम्र में हुआ सरकारी नौकरी उस पर घर परिवार के जिम्मेदारियों के साथ जो आज भी उनकी रचनात्मक यात्रा चल रही देश मे होगें कही लिटिल चैम्पस पर अगर देश के लोक की बात होगी तो श्री नरेंद्र सिंह नेगी जी का नाम सर्वोपरि होगा ऐसे गढ़ गौरव को नमन ।

कैसे हुई संगीत की शिक्षा: 

Naredner Singh Negi The Father of Uttarakhandi audio castes era folk musicपट्टी नदाल्स्यु ग्राम पौडी गांव में एक फौजी पृष्ठ भूमि वाले परिवार में फौजी उमारव सिंह नेगी और समुद्रा देवी के घर माता पिता की तीसरी संतान के रूप बालक नरु उर्फ लोक गायक नरेन्द्र सिंह नेगी का जन्म हुआ ! एक बहन और एक भाई वाले भरे पूरे परिवार में पले बढे नेगी दा को बचपन से फिल्मों और फ़िल्मी गानों का शौक था, किन्तु कभी उन्होंने अपने स्कूल के दिनों मे कभी किसी मंच पर कोई गाना नहीं गाया अंतर्मुखी स्वाभाव बालक नरु संगीत आने का कारण उनके ताऊ जी लडके अजीत सिंह नेगी थे, जो एक म्यूजिक टीचर और क्लासिकल वोकल आर्टिस्ट थे उनको संगीत मे संगीत संगत के लिये एक तबला वादक की आवश्यकता थी इस कारण नेगी दा को उनने तबला सिखाया धीरे धीरे नेगी दा तबला प्रभाकर किया साथ संगीत भी सीखा और पौड़ी रामलीला में पाठ भी खेले. नेगी दा पास उस वक्त अपने वाद्ययन्त्र भी नहीं थे वो उनके साथ बैठ घण्टो रियाज संगत करते थे.

क्या कहते हों पौड़ी के लोग:-

Naredner Singh Negi The Father of Uttarakhandi audio castes era folk musicकांडई गौ में बन्दुक दुकान वाले रंगकर्मी वीरेंद्र कश्यप जी ने भी उनकी साहित्य संगीत को निखारने नेगी दा की काफी सहायता की भजन सिंह , शमशेर सिंह रावत ,धरणीधर चंदोला , सुखदेव सिंह रावत आदि संगीत और साहित्य विद्वानों ने नेगी जी कला को निखारा। नरेंद्र सिंह नेगी के गीतकार और म्यूजिक कंपोजर जो गुण वो बेमिशाल है दुनिया बहुत कम लोगो के पास है उनका थोडा कमजोर साइड गायन रहा शुरुवाती सालों कही पत्रिका पढ़ा था उनके तार सप्तक स्वर नहीं लगते पर उनके रियाज का प्रतिफल है आज वो आवाज उत्तरखण्ड सबसे बड़ी आवाज उभर के उभरी.

 

गीत-संगीत की यात्रा:-

सत्तर के दशक के पौड़ी के कई लोग बताते हैं कि नेगी जी धारा रोड उषा मशीन वाले बहुगुणा जी की दुकान पर उनके साथ Naredner Singh Negi The Father of Uttarakhandi audio castes era folk musicघंटो रियाज करते थे. बहुगुणा जी को भी गीत संगीत का शौक था और नेगी जी 1974 में अपने पिता का आपरेशन कराने विकासनगर देहरादून ले गये, और वहीँ अपने पहला गीत अस्पताल मे रचा किन्तु 1976- 1977 तक नेगी जी मंच गढ़वाली गाना सुना रहे थे किन्तु मंचो मे एक तबला वादक के रूप मशहुर थे. झंकार ग्रुप लैंसीडाउन वालों के साथ जब नेगी दा एक बार लखनऊ गड्वाली गायकों के साथ तबला वादन के लिये गये थे तभी नेगी जी एक कोने बैठकर ग्रीनरूम मे गीत ‘सैरा बस्ग्याल हारमुनियम के साथ गुन गुना रहे थे तभी लोक और ढोल के पंडित केशव अनुरागी ( जो रेडियो स्टेशन में केंद्र निदेशक रहे ) जी ने उनको सुना पूछा बहुत अच्छा गा रहे हो किस का गीत-संगीत है ये… नेगी दा ने कहा मेरा ही रचा गीत-संगीत है . ये सुनकर केशव अनुरागी जी बहुत खुश हुए उन्होंने नेगी दा के हाथों रेडियो स्टेशन स्वर एग्जाम का फॉर्म पकड़ा दिया कुछ दिन बाद नेगी दा को रेडियो वालो ने स्वर एग्जाम के लिए बुलाया किन्तु नेगी जी का गला Naredner Singh Negi The Father of Uttarakhandi audio castes era folk musicउस दिन बहुत खराब था ये बात उन्होंने केशव अनुरागी जी को बताई अनुरागी जी ने कहा कोई बात नहीं तुम गीत गाओ अनुरागी जी ने एग्जामनर को कहा ये लड़का बहुत अच्छा गाता आज इसकी तबीयत सही नहीं है और फिर नेगी जी का स्वर एग्जाम पास कर लिया और वो आल इंडिया रेडियो बी ग्रेड वोकल आर्टिस्ट लेबल पर चयन हुआ और इस तरह नेगी दा कि रेडियो आर्टिस्ट के तौर पर पारी की शुरुआत हुई. जिसको मेल ऑफ डिमांड के आधार पर लोकप्रिय उतराखंड से जिसको उत्तरप्रदेश के राज्यपाल द्वारा सम्मानित किया उसके बाद तो नेगी दा पहाड़ के गीत-संगीत मे आडियो क्रांति ले आये, जो आज तक जारी है. नेगी दा को अगर पहाड़ी गीत-संगीत आडियो क्रांति का जनक कहाँ जाए तो गलत नहीं होगा. नरेंद्र सिंह नेगी जी ने गढवाली गीत संगीत और गढवाली फ़िल्मी संगीत में अतुलनीय काम किया गीतों की नई शैली के लिए नरेंद्र सिंह नेगी को जाना जाता है.

 

लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी जी गीत संध्या जो नेगी नाईट से फेमस हुई

Naredner Singh Negi The Father of Uttarakhandi audio castes era folk musicउत्तराखण्ड के गीत संगीत वो भी एक दौर जब स्टेज शो की ऑडियो एल्बम निकल जाती खासतौर गढ़वाळी गीत संगीत के ऑडियो कैसेट किंग लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी जी गीत संध्या जो नेगी नाईट नाम से पॉपुलर रही उनके कही स्टेज शो टी सीरीज कंपनी से आये. वो भी क्या दौर था. यूट्यूब और फेसबुक लाइव और वाट्सप के दौर में स्टेज शो एल्बम बढ़ी बात न हो पर ऑडियो कैसेट जमाने स्टेज शो ऑडियो रिकॉर्ड निकलना क्लाकारो के लिए स्टेटस सिंबल होता था !

क्रमश ……..


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