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पाकिस्तान के सपनों पर रूस ने फेरा पानी, कहा-भारत की क़ीमत पर नहीं चाहिए सम्बंध

अमेरिका की धमकी के बाद भी किया रूस से समझौता

Xiamen: Prime Minister Narendra Modi greets Russian President Vladimir Putin at the sidelines of the 9th BRICS Summit in Xiamen, China on Monday. PTI Photo/PIB(PTI9_4_2017_000047B)
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पाकिस्तान के बारे में किसी को कुछ बताने की ज़रूरत नहीं है। पाकिस्तान की नियत अब पूरी दुनिया को पता चल गयी है। पूरी दुनिया में पाकिस्तान को आतंक के पनाहगाह के रूप में जाना जाता है। पाकिस्तान का इस समय हितैषी चीन बना हुआ है। भारत को चोट पहुँचाने के लिए पाकिस्तान समय-समय पर कोई ना कोई चाल चलता रहता है। आए दिन सीमा पर अशांति फैलाना पाकिस्तान की आदत बन गयी है। अब पाकिस्तान की नयी चाल है भारत को अन्य देशों से अलग-थलग कर देना। लेकिन पाकिस्तान अपने इस नापाक मंसूबे में कामयाब नहीं हो पाया।

पाकिस्तान बना हुआ है आतंकवाद का अड्डा:

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आपकी जानकारी के लिए बता दें में रूसी राजदूत निकोलई क़ुदाशेव ने गुरुवार को दिल्ली में कहा कि पाकिस्तान के साथ रूस के सम्बंध के लिए चिंता की बात नहीं होनी चाहिए। उन्होंने को विश्वास दिलाया कि भारत के साथ रूस के सम्बंध रणनीतिक और दीर्घकालिक हैं। क़ुदाशेव ने आगे कहा कि पाकिस्तान के साथ उनके देश के सम्बंध का मक़सद पाकिस्तान में स्थिरता लाना है। रूस का पाकिस्तान से सम्बंध का मक़सद क्षेत्रीय स्थिरता में सहयोग करना और आतंकवाद से मुक़ाबला करना है। पाकिस्तान इस समय आतंकवाद का अड्डा बना हुआ है।

अमेरिका की धमकी के बाद भी किया रूस से समझौता:

कुछ दिनों पहले रूस चीन और पाकिस्तान के काफ़ी क़रीब आने लगा था। इस वजह से भारत में यह अटकलें लगाई जा रही थी कि की अमेरिका के साथ बढ़ती नज़दीकियों की वजह से रूस ने चीन और पाकिस्तान सी नज़दीकियाँ बढ़ानी शुरू कर दी है। लेकिन भारत ने सबकी अटकलों पर लगाम लगाते हुए अमेरिका के प्रतिबंध के बाद भी रूस के साथ S-400 मिसाइल तकनीकी का सौदा करके बता दिया कि आज भी भारत और रूस बहुत क़रीब हैं। उनके सबंधों के बीच अमेरिका की धमकी नहीं आने वाली है। इसके अलावा भारत ने प्रतिबंधित ईरान से भी तेल का व्यापार शुरू रखा।

हमें चाहिए एक स्थिर पाकिस्तान:

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जब क़ुदाशेव से यह पूछा गया कि राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच पिछले सप्ताह बैठक के दौरान बढ़ते रूसी-पाकिस्तान सम्बन्धों को लेकर क्या भारत की तरफ़ से कोई चिंता जताई गयी? इस सवाल के जवाब में क़ुदाशेव ने कहा कि, इस सम्बंध में चिंता की क्या बात है। सम्बंध बहुत साफ़ है। हमें एक स्थिर पाकिस्तान चाहिए। जहाँ तक मैं समझता हूँ, भारतीय पक्ष भी भी यही विचार है। पाकिस्तान के साथ सैन्य अभ्यास के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह आतंकवाद निरोधक अभ्यास था और इसके बहुत अधिक मायने नहीं निकाले जानें चाहिए।

यह असम्भव है कि रूस भारत की क़ीमत पर पाकिस्तान से बनाए सम्बंध:

क़ुदाशेव ने आगे कहा, भारत की तुलना में पाकिस्तान के साथ हमारा सैन्य और रणनीतिक सहयोग लगभग शून्य है।’ रूस-पाकिस्तान संबंधों में पिछले कुछ वर्षों में नए घटनाक्रम पर उन्होंने कहा, ‘क्षेत्रीय मुख्यधारा में पाकिस्तान को लाए जाने के लिए कुछ नया होना चाहिए। पाकिस्तान का शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) में शामिल होना, इस बात का सबूत है कि ये प्रयास सफल हो रहा है। मुझे नहीं लगता कि भारत के लिए कोई चिंता की बात है। भारत के साथ हमारे संबंध रणनीतिक और दीर्घकालिक हैं।’ रूसी राजदूत क़ुदाशेव ने कहा, ‘रूस में कोई भी समझदार व्यक्ति यह नहीं कहेगा कि हम पाकिस्तान के साथ संबंध भारत की कीमत पर बनाएं। यह असंभव है।

तालिबान था सम्मेलन में भाग लेने का इच्छुक:

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अफगानिस्तान पर एक शांति सम्मेलन के बारे में बात करते हुए क़ुदाशेव ने कहा कि अफगानिस्तान की तरफ़ से आए अनुरोध पर इस बैठक को स्थगित किया गया था। बता दें यह बैठक हाल ही में रूस की राजधानी मॉस्को में होने वाली थी। तालिबान ने संकेत दिया था कि वह सम्मेलन में भाग लेने का इच्छुक है। जब उनसे पूछा गया कि सम्मेलन में भाग लेने को लेकर भारत की तरफ़ से कुछ कहा गया था तो क़ुदाशेव ने कहा, (भारत की ओर से भाग लेने के संबंध में) कोई इनकार नहीं किया गया था।


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