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रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने फ़्रांस में राफ़ेल प्लांट का किया दौरा

रणनीतिक और रक्षा तालमेल मज़बूत करने पर की चर्चा

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भारत में इस समय बहुत ज़्यादा राजनीतिक उथल-पुथल मची हुई है। मोदी सरकार इस समय एक नहीं बल्कि कई मुद्दों को लेकर घिरी हुई है। इसमें इस समय सबसे बड़ा मुद्दा राफ़ेल डील का है। कांग्रेस के अनुसार इस डील में मोदी सरकार द्वारा गड़बड़ी की गयी है। इन सबके बीच भारत की रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को दसॉ एविएशन के पेरिस स्थित उस संयंत्र का दौरा किया, जिसमें भारत को आपूर्ति के लिए राफ़ेल विमानों का बनाया जा रहा है। सीतारमण के इस दौरे की अधिकारिक सूत्रों से जानकारी मिली। बता दें सीतारमण की फ़्रांस यात्रा फ़्रांसीसी कम्पनी दसॉ एविएशन से 36 राफ़ेल लड़ाकू विमानों की ख़रीद को लेकर देशभर में मचे विवाद के बीच में हुई है।

 

राहुल गांधी ने नहीं दिया किसी का जवाब:

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गुरुवार को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ़्रेन्स करके राफ़ेल डील पर मोदी सरकार से आठ सवाल पूछे थे। राहुल गांधी ने कहा था कि इस सौदे में सीधे पीएम मोदी पर आरोप लग रहे हैं और वह उन आरोपों का जवान नहीं दे सके हैं। इसलिए पीएम मोदी को इस्तीफ़ा देना चाहिए। वहीं राहुल गांधी के इस सवाल के जवाब में शुक्रवार को केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने फ़्रेस कॉन्फ़्रेन्स करके कहा कि, राहुल गांधी ने राफ़ेल डील को लेकर देश से आठ झूठ बोले हैं। उन्होंने आगे कहा कि राहुल गांधी ने अब तक अरुण जेटली, रविशंकर प्रसाद और निर्मला सीतारमण के सवालों का जवाब नहीं दिया है।

 

रणनीतिक और रक्षा तालमेल मज़बूत करने पर की चर्चा:

बता दें सूत्रों के अनुसार रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने अर्जेंतेउल संयंत्र के भ्रमण के दौरान दसॉ एविएशन के अधिकारियों के साथ बातचीत की। इसके साथ ही उन्होंने भारत को भेजे जाने वाले राफेल विमान के विनिर्माण का जायजा भी लिया। आपकी जानकारी के लिए बता दें दसॉ एविएशन ही राफेल जैसी अत्याधुनिक लड़ाकू विमान बनाती है। भारत ने फ्रांस से 36 राफेल विमान खरीदने के लिए 58 हजार करोड़ रुपये का करार किया है। भारत को इस विमान की आपूर्ति अगले साल सितंबर से शुरू होगी। समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक सीतारमण ने गुरुवार शाम को फ्रांस की रक्षा मंत्री फ्लोरेंस पार्ली के साथ दोनों देशों के बीच रणनीतिक एवं रक्षा तालमेल मजबूत करने पर चर्चा की।

 

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नहीं उठाया गया बातचीत के दौरान राफ़ेल का मुद्दा:

यह बातचीत भारत-फ्रांस के रक्षा मंत्रियों की सालाना वार्ता के तहत हुई जिस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांसीसी राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों के बीच शिखर वार्ता दौरान सहमति बनी थी। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि दोनों रक्षामंत्रियों के बीच परस्पर हित के विभिन्न द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के बाद आपस में भी बातचीत हुई। दोनों पक्षों ने अपने सशस्त्र बलों खासकर समुद्री क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के अलावा दोनों देशों द्वारा सैन्य मंचों और हथियारों के सह-उत्पादन पर चर्चा की गई। फिलहाल यह पता नहीं चल पाया है बातचीत के दौरान राफेल सौदा का मुद्दा उठा या नहीं।

 

जब फ़्रांस के राष्ट्रपति थे ओलांद तभी हुआ था सौदा:

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बुधवार को समाचार संगठन मीडियापार्ट ने खबर दी थी कि राफेल विनिर्माता दसॉ एविएशन को इस सौदे को हासिल करने के लिए भारत में अपने ऑफसेट साझेदार के तौर पर अंबानी की कंपनी रिलायंस डिफेंस को चुनना पड़ा। जब इन आरोपों के बारे में पूछा गया तो सीतारमण ने कहा कि सौदे के लिए ऑफसेट दायित्व अनिवार्य था, न कि कंपनियों के नाम। मीडियापार्ट की यह नवीनतम रिपोर्ट पूर्व फ्रांसीसी राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के उस बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि फ्रांस को दसॉ के लिए भारतीय साझेदार चुनने के लिए कोई विकल्प नहीं दिया गया था। भारत सरकार ने इसी भारतीय कंपनी का नाम प्रस्तावित किया था। ओलांद जब फ्रांस के राष्ट्रपति थे तभी यह सौदा हुआ था।

 

भारतीय राजनीति में आ गया था भूचाल:

ओलांद के इस बयान के बाद भारतीय राजनीति में जैसे भूचाल आ गया था। हर तरफ़ से मोदी सरकार के ऊपर हमले शुरू होने हो गए। देश की सभी विपक्षी पार्टियों ने भाजपा को अपने घेरे में लिए। हालाँकि इसके बाद भी भाजपा ने साफ़ कर दिया कि कुछ भी हो जाए, यह डील किसी भी क़ीमत पर रद्द नहीं होगी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कांग्रेस इस सौदे में भारी अनियमितताओं का आरोप लगा रही है। कांग्रेस का कहना है कि सरकार 1670 करोड़ रुपये प्रति विमान की दर से राफेल खरीद रही है, जबकि यूपीए सरकार के समय कीमत 526 करोड़ रुपये प्रति विमान तय हुई थी। कांग्रेस दसॉ के ऑफसेट पार्टनर के तौर पर रिलायंस डिफेंस के चयन को लेकर भी सरकार पर सवाल उठा रही है।

 

 


 

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