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आख़िर क्यों उत्तर बिहार बना हुआ है आतंकियों की पसंदीदा जगह, जानें आतंक से क्या है इसका सम्बंध

गौरवशाली इतिहास को दबाने पर तुला है आतंकवाद

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अगर आपको याद होगा तो जब 2013 में बिहार में पीएम मोदी की पटना में रैली हुई थी तो सिलसिलेवार कई बम धमाके हुए थे। उसी समय इन घटनाओं की जाँच में यह ख़ुलासा हुआ था कि राज्य में आतंक (Terrorism) की जड़ें काफ़ी गहरी हो चुकी हैं। ख़ासतौर से सीमांचल और मिथिलांचल इलाक़ा आतंकियों की पसंदीदा जगह बना हुआ है। हाल ही में ख़ुफ़िया विभाग ने 36 आतंकियों (Terrorist) की एक सूची तैयार की और उसे एंटी टेरेरिस्ट सेल को सौंपी है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि बिहार में इस समय तीन दर्जन ऐसे आतंकी हैं जो देश को दहला सकते हैं।

 

नेपाल की सीमा से सटा हुआ है उत्तरी बिहार:

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इसकी वजह से ख़ुफ़िया विभाग ने अलर्ट भी जारी किया है। विभाग ने एटीएस को जिन आतंकियों की सूची सौंपी है, उनकी पहचान देश के अलग-अलग हिस्सों में गिरफ़्तार आतंकियों ने की है। इसमें सबसे बड़ा सवाल यह है कि आतंकियों ने बिहार को ही छुपने के लिए सबसे सुरक्षित जगह क्यों माना है। इसका जवाब यह है कि आतंकवादी बिहार को इसलिए भी छुपने के लिए चुनते हैं, क्योंकि उत्तरी बिहार नेपाल की सीमा (Border of Nepal) से सटा हुआ है। इसी वजह से आतंकियों का देश में घुसना और यहाँ से फ़रार हो जाना बहुत ही आसान है।

 

बिना रोक-टोक आतंकी करते हैं आवाजाही:

अगर हम उत्तरी बिहार की बात करें तो ये आतंकियों के छुपने की सबसे पसंदीदा जगह है और आतंकवाद से इसका गहरा सम्बंध भी है। इसके कई जिले आतंकियों की पनाहगाह हैं। दरभंगा, समस्तीपुर, सीतामढ़ी, मुज़फ़्फ़रपुर और मोतिहारी का नाम सामने आता है। यहाँ से सटे हुए कई जगहों पर नेपाल की सीमा भी खुलती है। इस रास्ते से आतंकी बिना किसी रोक-टोक के आसानी से आवाजाही करते हैं। पहली बार सन 2000 में सीतामढ़ी जिले से दो आतंकियों की गिरफ़्तारी हुई थी। उस समय आतंकी संगठन हिज़बुल मुजाहिदीन के सदस्य मक़बूल और ज़हीर की गिरफ़्तारी की गयी थी।

 

गौरवशाली इतिहास को दबाने पर तुला है आतंकवाद:

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इस घटना के बाद ही जाँच एजेंसियों के कान खड़े हो गए थे। इसके बाद बिहार में दुबारा आतंकी 2006 में सक्रिय हुए और धीरे-धीरे सीमांचल और मिथिलांचल से लगातार आतंकियों के तार जुड़ते रहे और गिरफ़्तारियाँ भी होती रहीं। 2006 में मुंबई की लोकल ट्रेन में बम ब्लास्ट (Mumbai local train bomb blast 2006) की घटना के बाद पहली बार बिहार के मधुबनी जिले का नाम आतंकी घटना में सामने आया।

उस समय बासोपट्टी के मोहम्मद कमाल को एटीएस की टीम ने गिरफ़्तार किया था। इसी दौर में सिमी पर भी प्रतिबंध लगाया गया था। बता दें मिथिला की धरती पर पनप रहा आतंकवाद गौरवशाली अतीत और वर्तमान को दाग़दार बनाने पर तुला हुआ है।

 

पढ़ने के लिए पिता ने भेजा दरभंगा:

यहाँ आइएम की दस्तक के बाद हर कोई चिंतित है। इसके बारे में एनआईए भी कई बार कह चुका है कि मिथिलांचल में आइएम चुपके-चुपके अपने संगठन को बढ़ाने में लगा हुआ है। 2006 में आतंकवादी नए ठिकाने के तौर पर दरभंगा में पनाह लेते रहे हैं। यहाँ से असादुल्लाह रहमान सर्फ़ दिलकश, कफ़ील अहमद, नकी अहमद जैसे सरगना पकड़े जा चुके हैं। हैदराबाद में हुए सीरियल ब्लास्ट के बाद तहसीन का नाम इंडियन मुजाहिदीन के सक्रिय सदस्य के रूप में सामने आया था। वह समस्तीपुर का ही रहने वाला है। उसे पढ़ने के लिए उसके पिता ने दरभंगा भेजा था, जहाँ से वह ग़ायब हो गया था।

 

चुनते हैं घनी आबादी वाले मुस्लिम इलाक़े को:

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बाद में जब उसका नाम आतंकी घटनाओं में सामने आया तो उसकी गिरफ़्तारी की गयी। जाँच एजेंसियों की जाँच में यह बात सामने आयी कि आइएम का शातिर अहमद सिद्दी बप्पा उर्फ़ यासीन भटकल ने बेरोज़गार युवाओं को गुमराह करके आतंकवाद का प्रशिक्षण देने के लिए दरभंगा जिले का ही चुनाव किया था।

ख़ुफ़िया सूत्रों की मानें तो आइएम के सदस्य अपना हित साधने के लिए मुस्लिमों की घनी आबादी वाले इलाक़े को ही चुनते हैं। देश में अलग-अलग जगहों पर हुए बम विस्फोटों में कथित संलिप्तता के आरोप में गिरफ़्तार हुए आइएम से जुड़े हुए 13 लोगों में से 12 लोग दरभंगा के ही थे।

 

चढ़ चुके हैं कई कुख्यात हत्थे:

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बता दें असादुल्लाह रहमान उर्फ दिलकश, कफील अहमद, तलहा अब्दाली उर्फ इसरार, मोहम्मद तारिक अंजुमन, हारुण राशिद नाइक, नकी अहमद, वसी अहमद शेख, नदीम अख्तर, अशफाक शेख, मोहम्मद आदिल, मोहम्मद इरशाद, गयूर अहमद जमाली और आफताब आलम उर्फ फारुक हैं। जानकारी के अनुसार इनमें से एक मोहम्मद आदिल करांची (पाकिस्तान) का है। बाकी 12 दरभंगा के हैं। अगर हम बिहार के मोतिहारी जिले की बात करें तो इसकी सीमा से इंडियन मुजाहिदीन के यासीन भटकल व अब्दुल असगर उर्फ हड्डी को गिरफ्तार किया गया था। अब तक अब्दुल करीम उर्फ टुंडा सहित कई कुख्यात हत्थे चढ़ चुके हैं।

 

गया की तर्ज़ पर पटना में दिया था आतंकी घटना को अंजाम:

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वहीं ब्लास्ट मामले में एनआइए द्वारा गवाह के तौर पर दरभंगा से हिरासत में लिए गए मेहरे आलम मुजफ्फरपुर के स्टेशन रोड स्थित होटल सिद्धार्थ के कमरा नंबर 110 से भाग निकला था। 27 अक्टूबर को पटना में सीरियल बम ब्लास्ट के बाद से पूरे बिहार में सनसनी फैल गई थी। यह साजिश छोटी-मोटी नहीं थी। इसमें कई लोगों की जान चली गई थी और दर्जनों घायल हुए थे।

बोध गया की तर्ज पर पटना में आतंकी घटना को अंजाम दिया गया था। खुफिया विभाग को ठेंगा दिखाते हुए दहशतगर्द अपने मकसद में कामयाब हो गए। इसके बाद तो पूरे सुरक्षा चक्र पर सवाल खड़ा हो गया था। उत्तर बिहार की सुरक्षा के इंतजाम के बारे में बात करें तो यहां थाने में जंग खाईं राइफलें, बूढ़े पुलिसकर्मियों के भरोसे संवेदनशील इलाके की सुरक्षा, इस बात के गवाह हैं कि ‘व्यवस्था’ कितनी चौकस है।

 

सकते में हैं सुरक्षा कर्मी भी:

समय-समय पर खुफिया विभाग चेतावनी दे रहा कि आतंकी हमला कर सकते हैं। लेकिन सुरक्षा की स्थिति यह है कि भीड़-भाड़ वाले इलाकों में सुरक्षा दिख रही तथा कई महत्वपूर्ण जगहों पर लगे सीसीटी कैमरे खराब पड़े हैं। मुजफ्फरपुर के एसएसपी मनोज कुमार ने कहा कि आतंकी अलर्ट जैसी कोई खुफिया इनपुट जिला पुलिस प्रशासन को प्राप्त नहीं है। संदिग्ध गतिविधियों को लेकर सतर्कता हर वक्त बरती जाती है। भीड़ वाली जगहों पर सादी पोशाक में भी पुलिस तैनात रहती है। शांति का पाठ पढ़ाने वाला उत्तर बिहार आज आतंक का पनाहगाह बन गया है और ये इलाका अब अशांत कहा जा रहा है। आतंकी हमले में यहां के कई लोगों की संलिप्तता सामने आने के बाद आम आदमी भी हैरान है और अब आतंकी हमले की आशंका का पता चलने के बाद सुरक्षाकर्मी भी सकते में हैं।

 

बिहार में हुई अब तक की गिरफ़्तारियाँ:

    • 20 जुलाई, 2006 को मुंबई की एटीएस ने मधुबनी जिले के बासोपट्टी बाजार से मो. कमाल को मुंबई लोकल ट्रेन धमाके में संलिप्तता के आरोप में गिरफ्तार किया था।
    • पहली जनवरी, 2008 को रामपुर (यूपी) सीआरपीएफ कैंप में हुए विस्फोट के तार मधुबनी से जुड़े। पुलिस ने लखनऊ से 2 जनवरी, 2008 को सबाऊद्दीन को गिरफ्तार किया था। वह मधुबनी जिले के सकरी थाने के गंधवारी गांव का है।
    • 2009-10 में दिल्ली ब्लास्ट मामले में मधुबनी के बासोपट्टी के बलकटवा से मदनी की गिरफ्तारी हुई थी।
    • 26 नवम्बर, 2011 को दिल्ली पुलिस ने मधुबनी के सिंघानिया चौक व सकरी के दरबार टोला से क्रमश: अफजल व गुएल अहमद जमाली को पकड़ा था।
    • 19 नवम्बर, 2011 को दरभंगा के केवटी अंतर्गत बाढ़ समैला के कतील सिद्दीकी उर्फ साजन की दिल्ली में गिरफ्तारी हुई थी।
    • दिल्ली विस्फोट के सिलसिले में 12 जनवरी, 2012 को बिहार के दरभंगा जिले के जाले थाना क्षेत्र स्थित देवड़ा बंधौली गांव निवासी नदीम और नक्की को गिरफ्तार किया गया था। दोनों की निशानदेही पर विस्फोट में प्रयुक्त मोटरसाइकिल मिली थी।
    • 21 फरवरी 2012 को एटीएस की टीम ने शिवधारा से साइकिल मिस्त्री कफील अहमद को पकड़ा था। उसे आइएम का मेंटर बताया गया।
    • जिले के केवटी थाने के समैला गांव से गत छह मई की अलस्सुबह कर्नाटक पुलिस ने संदिग्ध आतंकी मो. कफील अख्तर को गिरफ्तार किया था। बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम विस्फोट में उसकी संलिप्तता सामने आई थी।
    • 13 मई को सऊदी अरब में केवटी के बाढ़ समैला गांव के फसीह महमूद को भारतीय सुरक्षा एजेंसी ने स्थानीय पुलिस के सहयोग से पकड़ा था। आइएम चीफ रियाज भटकल और इकबाल भटकल से जुड़ा फसीह 2008 में बटला हाउस मुठभेड़ के बाद सऊदी अरब भाग गया था। जहां से आइएम को धन देता रहा।
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