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जानिए कहानी उस समय की जब लोकसभा चुनाव में हारने के बाद जेपी से मिलकर रोई थी इंदिरा गांधी

देश के अलग-अलग हिस्सों में किया आंदोलन का नेतृत्व

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इंदिरा गांधी के बारे में किसी को बताने की ज़रूरत नहीं है। इंदिरा गांधी भारत की पूर्व प्रधानमंत्री रह चुकी हैं। इसके साथ ही इंदिरा गांधी को देश की सबसे प्रभावशाली महिलाओं में से भी एक माना जाता है। हालाँकि इंदिरा गांधी को उनके ही एक सुरक्षा गार्ड ने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी थी। हालाँकि आज हम आपको उसके बारे में नहीं बताने जा रहे हैं। आज हम आपको उनसे जुड़े एक ऐसे क़िस्से के बारे में बताने जा रहे हैं, जो यक़ीनन आप पहले से नहीं जानते होंगे।

 

जयप्रकाश नारायण के बारे में लिखा रामधारी सिंह दिनकर ने भी:

जेपी का नाम तो आपने सुना ही होगा। जी हाँ हम जेपी यानी जयप्रकाश नारायण की बात कर रहे हैं। इन्होंने आज़ादी के बाद पहली बार जन आंदोलन का नेतृत्व किया था। 8 सितम्बर को जयप्रकाश नारायण की पुण्यतिथि थी। इस मौक़े पर उनके गाँव सिताबदियारा सहित पूपूरे बिहार ने उन्हें नमन किया। आपातकाल का जब भी नाम आता है बिना जयप्रकाश नारायण के पूरी नहीं होती है। जयप्रकाश नारायण स्वाधीनता संग्राम सेनानी और प्रसिद्ध समाजसेवी थे। जयप्रकाश नारायण के बारे में प्रसिद्ध कवि रामधारी सिंह दिनकर ने भी लिखा है।

 

लाखों लोगों के सामने पढ़ी थी कविता:

आपकी जानकारी के लिए बता दें रामधारि सिंह दिनकर ने यह कविता 1946 में जयप्रकाश नारायण के जेल से रिहा होने के बाद लिखी थी और पटना के गांधी मैदान में जयप्रकाश नारायण के स्वागत में उमड़ी लाखों लोगों की भीड़ के सामने पढ़ी थी।

 

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कहते हैं उसको जयप्रकाश जो नहीं मरण से डरता है

ज्वाला को बुझते देख, कुंड में स्वयं कूद जो पड़ता है

है जयप्रकाश वह जो न कभी सीमित रह सकता घेरे में

अपनी मशाल जो जला बांटता फिरता ज्योति अंधेरे में

हां जयप्रकाश है नाम समय की करवट का, अंगड़ाई का

भूचाल, बवंडर, के दावों से, भरी हुई तरुणाई का

है जयप्रकाश वह नाम जिसे इतिहास समादार देता है

बढ़कर जिनके पदचिह्नों को उर पर अंकित कर लेता है।

 

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पढ़ाई करने के लिए गए थे अमेरिका:

1946 में इस कविता के रचे जानें से पहले जयप्रकाश नारायण का युवावस्था बहुत ही रोमांचक और तूफ़ानी था। जेपी जब केवल 20 साल के थे तभी वे उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए अमेरिका चले गए। वहाँ उन्होंने 1922-1929 तक रहकर समाज शास्त्र का अध्ययन किया। हालाँकि अमेरिका में पढ़ाई बहुत महँगी थी तो पढ़ाई का ख़र्च निकालने के लिए जेपी खेतों, कम्पनियों और रेस्टोरेंट में काम करते थे। अमेरिका में मज़दूरी करके वहाँ के कई विश्वविद्यालयों में बीए और उसके बाद समाजशास्त्र में एमए की पढ़ाई करने के बाद वो पीएचडी करने की तैयारी कर रहे थे, तभी अचानक माँ की बीमारी का संदेश मिला और स्वदेश लौट आए।

 

देश के अलग-अलग हिस्सों में किया आंदोलन का नेतृत्व:

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1929 में जब जयप्रकाश नारायण से लौटे तब भारतीय स्वतंत्रता संग्राम अपने चरम पर था। उनका सम्पर्क गांधी जी के साथ तो हुआ ही, इसके अलावा उनके साथ काम करने वाले जवाहर लाल नेहरु से भी हुआ। वे आंदोलन का हिस्सा बने। 1932 में गांधी, नेहरु और कई अन्य महत्वपूर्ण कांग्रेसी नेताओं के जेल जानें के बाद जयप्रकाश नारायण ने देश के अलग-अलग हिस्सों में संग्राम का नेतृत्व किया। भारत को आज़ादी मिल गयी और पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु के कुछ समय बाद प्रधानमंत्री की कुर्सी पर उनकी बेटी इंदिरा गांधी बैठीं। बात 1977 की है, जब जेपी के आंदोलन की वजह से इंदिरा गांधी को हराकर जनता पार्टी सत्ता में पहुँची तो 24 मार्च को दिल्ली के रामलीला मैदान में रैली का आयोजन किया गया।

 

जेपी से मिलकर इंदिरा गांधी के आ गए आँसू:

हालाँकि उस रैली में ख़ुद जेपी ही नहीं पहुँच पाए। अपनी राजनीतिक विजय के सबसे बड़े दिन जेपी गांधी शांति प्रतिष्ठान से निकलकर रामलीला मैदान जाने की जगह सफदरजंग रोड की एक नंबर कोठी में गए, जहां पहली बार हारी हुई इंदिरा बैठी थीं। जेपी से मिलकर इंदिरा के आंसू आ गए, लेकिन उससे भी ज्यादा हैरानी की बात यह थी कि अपनी पराजित पुत्री के सामने जीते हुए जेपी भी रो रहे थे। वह इंदिरा गांधी की प्रशासनिक नीतियों के विरुद्ध थे। 1974 में ही पटना में छात्रों ने आंदोलन की शुरुआत की। यह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक रहेगा, इस शर्त पर जेपी ने उसकी अगुवाई करना मंजूर किया।

 

इंदिरा गांधी का सत्ता में रहना मुश्किल होने लगा:

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गिरते स्वास्थ्य के बावजूद जेपी इस आंदोलन से जुड़े और यह आंदोलन बाद में बिहार में सरकारी भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ा आंदोलन बनकर उभरा और आखिर में जेपी के कारण ही यह आंदोलन ‘संपूर्ण क्रांति’ आंदोलन बना। इसके बाद देश में जो सरकार विरोधी माहौल बना और इंदिरा गांधी का सत्ता में रहना मुश्किल होने लगा तो 1975 में इंदिरा गांधी ने आपातकाल की घोषणा की, जिसके अंतर्गत जेपी सहित 600 से भी अधिक विरोधी नेताओं को बंदी बनाया गया और प्रेस पर सेंसरशिप लगा दी गई। जेल मे जेपी की तबीयत और भी खराब हुई। 7 महीने बाद उनको मुक्त कर दिया गया। राष्ट्रीय जनता दल के लालू प्रसाद यादव, जनता दल यूनाइटेड के नीतीश कुमार और भारतीय जनता पार्टी के सुशील मोदी, ये तीनों जेपी आंदोलन में विद्यार्थी नेता के रूप में उभरे और बुलंद मुक़ाम हासिल किया।

 

आपातकाल का विरोध करने पर गए थे जेल:

सुशील मोदी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से आए थे। आपातकाल के बाद वहीं लौट गए। लालू और नीतीश ने बिहार से होते हुए केंद्र की सियासत में भी अपना सिक्का जमाया। राम विलास पासवान जेपी आंदोलन में शामिल नहीं हुए लेकिन आपातकाल के विरोध में जेल जाने वालों में उनका भी नाम आता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें 8 अक्टूबर 1979 को दिल की बीमारी और डायबीटीज के कारण पटना में जयप्रकाश नारायण की मृत्यु हो गई। तत्कालीन प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह ने लोकनायक की मृत्यु पर 7 दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की थी।


 

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