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भारतीय सांख्यिकीविद पी॰ सी॰ महालनोबिस की १२५ वीं जन्मतिथि पर डूडल ने किया सलाम

पी॰ सी॰ महालनोबिस की पूरी स्टोरी जानिये

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पी॰ सी॰ महालनोबिस यानी प्रशांत चंद्र महालनोबिस प्रसिद्द भारतीय वैज्ञानिक और सांख्यिकीविद थे. और आज उनकी १२५ वीं जन्मतिथि है. इस मौके पर गूगल ने उनके जीवन पर डूडल बना के उन्हें सम्मानित किया है. पी॰ सी॰ महालनोबिस एक प्रसिद्द सांखिय्कीविद हैं. और उन्होंने इस क्षेत्र में कईं योगदान दिये हैं. भारत सरकार ने उनके सम्मान में उनके जन्मदिन को सांख्यिकी दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी.

भारतीय सांख्यिकी में योगदान

महालनोबिस को ‘महालनोबिस दूरी’ की खोज के लिए जाना जाता है. ‘महालनोबिस दूरी’ उनके द्वारा खोजी गयी एक सांख्यिकीय माप है। इसके अलावा उन्होंने द्वितीय पंचवर्षीय योजना के लिये ड्राफ्ट भी तैयार किये थे. उन्होंने कोलकाता में ‘भारतीय सांख्यिकी संस्थान’ की स्थापना की और बड़े पैमाने के ‘सैंपल सर्वे’ के डिजाईन में अपना योगदान दिया. आज़ादी के बाद उन्हें मंत्रिमंडल का सांख्यिकी सलाहकार भी बनाया गया। उन्होंने बेरोज़गारी समाप्त करने के सरकार के प्रमुख उद्देश्य को पूरा करने के लिए योजनायें बनायीं.

प्रारंभिक जीवनPrasanta Chandra Mahalanobis 125th birth anniversary

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पी॰ सी॰ महालनोबिस का जन्म कोलकाता में २९ जून, १८९३ को हुआ था. उनके पिता प्रबोध चंद्र महालनोबिस ‘साधारण ब्रह्मो समाज’ के सक्रिय सदस्य थे और उनकी माँ निरोदबसिनी बंगाल के एक पढ़े-लिखे कुल से सम्बन्ध रखती थीं. यही कारण था की उनकी संगत बचपन से ही विद्वानों और सुधारकों के साथ की रही. उन्होंने अपनी प्राथमिक शिक्षा अपने दादा द्वारा स्थापित ‘ब्रह्मो ब्वायज स्कूल’ में ली. उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा भी इसी विद्यालय से सन १९०८ में पास की. इसके बाद उन्होंने सन १९१२ में प्रेसीडेंसी कालेज से भौतिकी विषय में आनर्स किया और उसके बाद वो हायर एजुकेशन के लिए लंदन चले गए. प्रेसीडेंसी कॉलेज में जगदीश चन्द्र बोस, सारदा प्रसन्न दास और प्रफुल्ल चन्द्र रॉय जैसे शिक्षकों ने उन्हें पढाया. यहां मेघनाद साहा उनसे एक कक्षा जूनियर थे तथा सुभाष चन्द्र बोस 2 कक्षा जूनियर.

जब पी॰ सी॰ महालनोबिस लंदन में थे किसी ने उन्हें बायोमेट्रिक्स पड़ने को कहा. ये एक सांख्यिकी जर्नल था उन्हें ये पढ़ के काफी अच्छा लगा. बायोमेट्रिक्स पढ़ने के बाद उन्हें  इसके कईं उपयोग नजर आये. उन्होंने भारत लौटते वक्त ही इस पर काम करना प्रारंभ कर दिया.
महालनोबिस के कई सहयोगियों ने सांख्यिकी में दिलचस्पी लेना प्रारंभ किया और धीरे-धीरे ये समूह बढ़ता ही गया. ये सभी लोग प्रशांत के प्रेसीडेंसी कॉलेज कमरे में इकठ्ठे होते थे. १७ दिसम्बर १९३१ को भारतीय सांख्यिकी संस्थान की स्थापना हुई और २८ अप्रैल १९३२ को औपचारिक तौर पर पंजीकरण करा लिया गया.

आज उनके १२५ वें जन्मदिन पर २९ जून को उपराष्ट्रपति ऍम वेंकैया नायडू १२५ रूपये का सिक्का जारी करने जा रहे हैं. सरकार ने ये सिक्का महालबोनिस की १२५ वीं जयंती पर उन्हें सम्मानित करने के लिए जारी किया है.


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