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राफ़ेल मामले में प्रशांत भूषण पहुँचे CBI के पास तो वही कांग्रेस पहुँची CAG के पास

फ़ोरेंसिक ऑडिट की माँग को लेकर सौंपे दस्तावेज़

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राफ़ेल डील का विवाद थमता हुआ दिखाई नहीं दे रहा है। कांग्रेस इस मामले में लगातार भाजपा पर हमला बोले हुए हैं। वहीं भाजपा इस मामले में अपना बचाव करने की कोशिश में लगी हुई है। कांग्रेस राफ़ेल डील को लेकर बहुत पहले से ही भाजपा पर निशाना साधे हुए है, लेकिन फ़्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ़्रांस्वा ओलांद का बयान आने के बाद से प्रशांत भूषण भी भाजपा और मोदी के ऊपर निशाना साध रहे हैं। जानकारी के अनुसार राफ़ेल मामले को लेकर जहाँ एक तरफ़ कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल दुबारा CAG के पास पहुँचा, वहीं केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी और प्रशांत भूषण ने CBI से जाँच करवाने के लिए शिकायत दर्ज करवाई।

 

फ़ोरेंसिक ऑडिट की माँग को लेकर सौंपे दस्तावेज़:

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बता दें दोनो नें गुरुवार को ही रफ़ेक विमान सौदे की जाँच के लिए CBI से मुलाक़ात की। वहीं कांग्रेस नेताओं ने दुबारा CAG से मुलाक़ात की। कांग्रेस पार्टी फ़्रांस के साथ रक्षा सौदे के मामले में राफ़ेल लड़ाकू विमान सौदे का ऑडिट कराए जानें के लिए दूसरी बार नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) के पास पहुँची। जानकारी के अनुसार पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश और आनंद शर्मा की अगुवाई में पार्टी प्रतिनिधियों ने काग से मुलाक़ात की और मामले की फ़ोरेंसिक ऑडिट कराए जानें की अपनी माँग को लेकर दस्तावेज़ भी सौंपे।

 

इस मामले में होने वाले हैं अभी और कई ख़ुलासे:

CAG से मुलाक़ात करने के बाद आनंद शर्मा ने कहा कि पार्टी नई जनकारियों और राफ़ेल सौदे को ख़ुलासे के साथ CAG से मिली। उन्होंने यह दावा किया कि इस मामले में अभी और भी ख़ुलासे होंने वाले हैं। बता दें कांग्रेस ने इससे पहले राफ़ेल डील को लेकर 19 सितम्बर को CAG से मुलाक़ात की थी। उसके बाद इस मामले की जाँच करवाने को लेकर कांग्रेस केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) के पास भी गयी थी और इस सम्बंध में FIR भी दर्ज करवाई थी। कांग्रेस ने CVC से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा एकतरफ़ा सौदे की घोषणा से सम्बंधित दस्तावेज़ को ज़ब्त करने की माँग की थी।

 

प्रशांत भूषण और अरुण शौरी ने की CBI निदेशक से मुलाक़ात:

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इसी बीच पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी और देश के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने भी गुरुवार को इस मामले को लेकर CBI के निदेशक आलोक वर्मा से मुलाक़ात की। उन्होंने मुलाक़ात के बाद राफ़ेल लड़ाकू विमान सौदे से जुड़ी ऑफ़सेट निविदा में कथित भ्रष्टाचार के जाँच की माँग की। प्रशांत भूषण और अरुण शौरी ने भ्रष्टाचार निरोधक क़ानून के तहत विस्तृत शिकायत के साथ जाँच की ज़रूरत के पक्ष में दस्तावेज़ सौंपे। आपकी जानकारी के लिए बता दें राफेल विमानों के निर्माता दसॉ ने सौदे के ऑफसेट दायित्व को पूरा करने के तहत रिलायंस डिफेंस के साथ करार किया था।

 

कांग्रेस को मिल गया भाजपा पर निशाना साधने का मौक़ा:

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वहीं इस मामले में केंद्र सरकार का कहना है कि दसॉ द्वारा ऑफसेट पार्टनर चुनने में उसकी कोई भूमिका नहीं है। लेकिन सरकार की मुश्किलें तब बढ़ गईं जब फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने एक पत्रिका को दिए इंटरव्यू में एक सवाल के जवाब में कहा कि अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस डिफेंस का नाम भारत की तरफ से आया था। भारत ने उनके ऊपर ज़बरदस्ती रिलायंस का नाम थोपा था। ओलांद के इस बयान के बाद से भारत की राजनीति काफ़ी गरमा गयी है। हर तरफ़ इस समय राफ़ेल विमान सौदे की ही चर्चा हो रही है। ओलांद के बयान के बाद कांग्रेस को एक और मौक़ा मिल गया भाजपा पर निशाना साधने का।


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