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पुलवामा आतंकी हमला: सुरक्षा एजेंसियों ने दो दिन पहले ही दी थी चेतावनी, आया था जैश का वीडियो भी सामने

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जम्मू कश्मीर के पुलवामा में 14 फ़रवरी को हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को दुखी कर दिया है। इस हमले में CRPF के 40 जवान शहीद हुए हैं। यह हमला CRPF की क़ाफ़िले पर उस समय हुआ जब क़ाफ़िले में लगभग 2500 शामिल थे। आतंकियों ने 350 किग्रा विस्फोटक सामग्री से लदी गाड़ी को जवानों ने बस के आगे भिड़ा दी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पहली बार घाटी मी मानव बम का इस्तेमाल हुआ है। हमले की ज़िम्मेदारी जैश-ए-मोहम्मद ने ली है। सूत्रों ने जानकारी दी कि दो दिन पहले आतंकी संगठन जैश ने हमले की धमकी दी थी। हमले के तरीके की तरफ इशारा करते हुए जैश ने एक वीडियो ऑनलाइन अपलोड किया था। वीडियो में अफगानिस्तान में एक हमला दिखाया गया था, जिसमें विस्फोटकों से भरे वाहन का इस्तेमाल किया गया था।

अपनी ड्यूटी करके लौट रहे थे जवान:

बता दें कि खुफिया एजेंसी ने 8 फरवरी को IED हमले का अलर्ट जारी किया था। सुरक्षा एजेंसियों ने अलर्ट जारी किया था कि किसी भी जगह पर तैनाती से पहले पूरे इलाके को अच्छी तरह से सुरक्षित कर लिया जाए, क्योंकि ऐसी सूचना मिली है कि IED का इस्तेमाल हमले के लिए किया जा सकता है। उधर, अधिकारियों ने आशंका जताई है कि पुलवामा जिले में बड़ी संख्या में सीआरपीएफ के जवानों की आवाजाही के बारे में आतंकवादियों को जानकारी मिली होगी, जिसके बाद उन्होंने इस घटना को अंजाम दिया है। हमले के समय केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के 2,500 से अधिक जवान घाटी में अपनी ड्यूटी ज्वाइन करने के लिए लौट रहे थे। इनमें से ज्यादातर छुट्टियों के बाद वापस लौट रहे थे। ये जवान 78 वाहनों के काफिले में लौट रहे थे इसी दौरान दक्षिण कश्मीर के अवंतीपुरा में श्रीनगर-जम्मू राजमार्ग पर यह हमला हुआ।

एजेंसी करेगी सभी पहलुओं की जाँच:

सामान्यत: लगभग 1 हजार जवान एक काफिले का हिस्सा होते हैं, लेकिन इस बार यह संख्या 2,547 थी। अधिकारियों ने बताया कि मानक संचालन प्रक्रियाओं के उल्लंघन की बात से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि खामियों की स्पष्ट तस्वीर व्यापक जांच के बाद ही साफ हो सकेगी। एक सुरक्षा अधिकारी ने आशंका जताई, ‘सैनिकों की इतनी बड़ी आवाजाही को बहुत सारे लोग जानते होंगे। इस जानकारी के आतंकवादियों तक पहुंचने की आशंका है।’ उन्होंने बताया कि इसके अलावा, घाटी जाने वाले कर्मियों की संख्या अधिक थी, क्योंकि खराब मौसम और अन्य प्रशासनिक कारणों से राजमार्ग पर पिछले दो से तीन दिनों से कोई आवाजाही नहीं थी। उन्होंनें बताया कि संबंधित एजेंसियां सभी पहलुओं से हमले की जांच करेगी।


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