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आरक्षण बिल पर मोदी सरकार की आज लोकसभा में परीक्षा, एक दिन के लिए बढ़ी राज्यसभा की कार्यवाही

Prime Minister Narendra Modi during the Inaugurate the Partners Fourm 2018 at Vigyan Bhawan in Delhi on Wednesday express photo by Prem Nath Pandey 12 Dec 18
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लोकसभा चुनाव को देखते हुए मोदी सरकार ने बहुत बड़ा चुनावी दाव खेला है। मोदी कैबिनेट ने कमज़ोर आर्थिक वर्ग के सवर्णों को भी 10 प्रतिशत आरक्षण देने का ऐलान किया है। काफ़ी समय से सवर्ण जातियों की माँग थी कि उनके ग़रीब तबक़ों को आरक्षण दिया जाए। सूत्रों के मुताबिक सामाजिक न्याय मंत्री थावरचंद गहलोत मंगलवार को संसद में विधेयक पेश कर सकते हैं। इसे पारित करने के लिए दो-तिहाई सदस्यों का समर्थन जरूरी है। सूत्रों ने बताया कि लोकसभा में पारित होने के बाद इसे राज्यसभा को भेजा जाएगा। भाजपा ने व्हिप जारी करके अपने सभी सांसदों से लोकसभा में रहने के लिए कहा है। वहीं, कांग्रेस ने शनिवार को अपने सांसदों को व्हिप जारी कर उनसे सोमवार और मंगलवार को संसद में मौजूद रहने को कहा था।

दोनों सदनों मी जुटाना होगा दो तिहाई बहुमत:

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इस विधेयक के जरिए पहली बार गैर-जातिगत एवं गैर-धार्मिक आधार पर आरक्षण देने की कोशिश की गई है। प्रस्तावित आरक्षण अनुसूचित जातियों (एससी), अनुसूचित जनजातियों (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्गों (ओबीसी) को मिल रहे आरक्षण की 50 फीसदी सीमा के अतिरिक्त होगा, यानी ‘आर्थिक रूप से कमजोर’ तबकों के लिए आरक्षण लागू हो जाने पर यह आंकड़ा बढकर 60 फीसदी हो जाएगा। प्रस्ताव पर अमल के लिए संविधान संशोधन विधेयक संसद से पारित कराने की जरूरत पड़ेगी, क्योंकि संविधान में आर्थिक आधार पर आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है। इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 15 और अनुच्छेद 16 में जरूरी संशोधन करने होंगे। संसद में संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए सरकार को दोनों सदनों में कम से कम दो-तिहाई बहुमत जुटाना होगा।

8 लाख सालाना आय से कम वालों को मिलेगा लाभ:

संविधान संशोधन विधेयक के जरिए संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 में एक धारा जोड़कर शैक्षणिक संस्थाओं और सरकारी नौकरियों में आर्थिक रूप से कमजोर तबकों के लिए आरक्षण का प्रावधान किया जाएगा। अब तक संविधान में एससी-एसटी के अलावा सामाजिक एवं शैक्षणिक तौर पर पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण का प्रावधान है, लेकिन इसमें आर्थिक रूप से कमजोर लोगों का कोई जिक्र नहीं है। प्रस्तावित कानून का लाभ ब्राह्मण, राजपूत (ठाकुर), जाट, मराठा, भूमिहार, कई व्यापारिक जातियों, कापू और कम्मा सहित कई अन्य अगड़ी जातियों को मिलेगा। सूत्रों ने बताया कि अन्य धर्मों के गरीबों को भी आरक्षण का लाभ मिलेगा। इस विधेयक में प्रावधान किया जा सकता है कि जिनकी सालाना आय 8 लाख रुपए से कम और जिनके पास पांच एकड़ से कम कृषि भूमि है, उन्हें आरक्षण का लाभ मिल सकता है।


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