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राफ़ेल डील पर समीक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, यह कोर्ट का नहीं विशेषज्ञों का काम

क़ीमतों को किया जाना चाहिए सार्वजनिक या नहीं

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राफ़ेल डील का मामला बढ़ता ही जा रहा है। राफ़ेल डील की वजह से केंद्र सरकार की पूरे देश में जमकर किरकिरी हो रही है। विपक्ष राफ़ेल डील के मामले को लेकर आए दिन मोदी सरकार पर निशाना साधने का काम कर रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष अपने सभी भाषणों में राफ़ेल डील के मामले को उठा रहे हैं। अब राफ़ेल डील का मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुँच गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर कहा है कि राफ़ेल डील पर समीक्षा करना सुप्रीम कोर्ट का नहीं बल्कि विशेषज्ञों का काम है।

 

सिलबंद लिफ़ाफ़े में सौंप दी कोर्ट को:

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बता दें केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को 36 राफेल लड़ाकू विमानों के दाम से संबंधी गोपनीयता उपबंध का बचाव किया। कोर्ट में केंद्र सरकार ने कहा कि वह सौदे की जानकारियां सार्वजनिक नहीं कर सकती। सरकार की ओर से पेश हुए अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ से कहा कि इन विषयों पर विशेषज्ञों को गौर करना है और ‘हम कह रहे हैं कि संसद को भी विमानों के पूरे दाम के बारे में नहीं बताया गया है।’ वेणुगोपाल ने कहा कि केन्द्र ने राफेल विमानों की पूरी जानकारी पहले ही सीलबंद लिफाफे में कोर्ट को सौंप दी हैं।

 

हमारे विरोधी उठा सकते हैं इसका लाभ:

केन्द्र ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को सीलबंद लिफाफे में राफेल विमानों के दाम के बारे में जानकारियां दी थीं। वेणुगोपाल ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि न्यायालय न्यायिक रूप से यह फैसला करने के लिए सक्षम नहीं है कि कौन सा विमान और कौन से हथियार खरीदने जाएं क्योंकि यह विशेषज्ञों का काम है। राफेल विमानों के दाम से जुड़े गोपनीयता उपबंध का बचाव करते हुए उन्होंने कहा, ‘अगर दाम की पूरी जानकारी दे दी गई तो हमारे विरोधी इसका लाभ उठा सकते हैं।’ दाम के बारे में जानकारी सार्वजनिक करने से इनकार करते हुए वेणुगोपाल ने कहा कि वह दाम के मुद्दे पर न्यायालय की इससे आगे कोई मदद नहीं कर पाएंगे।

 

क़ीमतों को किया जाना चाहिए सार्वजनिक या नहीं:

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केन्द्र विमानों के दाम के मुद्दे पर दलीलें दे रहा था, जबकि पीठ ने कहा कि राफेल लड़ाकू विमानों के दाम पर चर्चा केवल तब हो सकती है। जब इस सौदे के तथ्य जनता के सामने आने दिए जाएं। पीठ ने कहा, ‘हमें यह निर्णय लेना होगा कि क्या कीमतों के तथ्यों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए या नहीं।’ पीठ ने अटार्नी जनरल वेणुगोपाल से कहा कि तथ्यों को सार्वजनिक किए बगैर इसकी कीमतों पर किसी भी तरह की बहस का सवाल नहीं है। हालांकि, पीठ ने अटार्नी जनरल को स्पष्ट किया कि यदि वह महसूस करेगी कि ये तथ्य सार्वजनिक होने चाहिए, तभी इनकी कीमतों पर बहस के बारे में विचार किया जायेगा।

 

नहीं करना चाहती गोपनीयता के प्रावधान का उलंघन:

सुनवाई के दौरान वेणुगोपाल ने कहा कि नवंबर, 2016 की विनिमय दर के आधार पर सिर्फ लड़ाकू विमान की कीमत 670 करोड़ थी। भारत ने अपनी वायु सेना को सुसज्जित करने की प्रक्रिया में उड़ान भरने के लिये तैयार अवस्था वाले 36 राफेल लड़ाकू विमान फ्रांस से खरीदने का समझौता किया था। इस सौदे की अनुमानित लागत 58,000 करोड़ रुपये है। वेणुगोपाल ने कहा कि पहले इन विमानों को जरूरी हथियार प्रणाली से लैस नहीं किया जाना था और सरकार की आपत्ति इस तथ्य को लेकर ही है कि वह अंतर-सरकार समझौता और गोपनीयता के प्रावधान का उल्लंघन नहीं करना चाहती।

 

 


 

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