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S-400 की इस ख़ासियत से होंगे अनजान, एक बार में 72 मिसाइल छोड़कर भेद सकता है 36 निशाने

स्टेल्थ विमान जैसी तकनीक को किया जा सकता है आसानी से तबाह

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किसी भी देश की ताक़त उस देश की सेना और उसके हथियारों से पता चलती है। जिस देश के पास जितने ज़्यादा सैनिक और जितने ज़्यादा आधुनिक हथियार होते हैं, वह देश उतना ही ताक़तवर माना जाता है। इस समय पूरी दुनिया में अमेरिका सबसे ज़्यादा ताक़तवर देश है, क्योंकि उसके पास सबसे आधुनिक हथियार और सक्षम सैनिक हैं। भारत भी इस दिशा में आगे बढ़ने का लगातार प्रयास कर रहा है। S-400 ट्रायम्फ वायु रक्षा प्रणाली की बात करें तो यह एक ऐसी आधुनिक रक्षा प्रणाली है, जो एक बार में 36 निशाने आसानी से भेद सकती है।

 

स्टेल्थ विमान जैसी तकनीक को किया जा सकता है आसानी से तबाह:

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केवल यही नहीं यह एक बार में 72 मिसाइल भी छोड़ सकती है। भारत और रूस के बीच इस आधुनिक मिसाइल तकनीक का शुक्रवार को समझौता हुआ। रूस पर लगे हुए प्रतिबंध को किनारे करते हुए भारत ने शुक्रवार को इस प्रणाली की ख़रीद के लिए रूस के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किया। वायुसेना प्रमुख बी एस धनोआ ने बताया कि लम्बी और मध्यम दूरी की वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली से वायुसेना को बहुत ज़रूरी प्रोत्साहन मिलेगा। इस प्रणाली के ज़रिए अमेरिका के सबसे आधुनिक स्टेल्थ विमान और दूसरे कई हवाई लक्ष्यों को आसानी से तबाह किया जा सकता है।

 

एयरपोर्ट से सीधे पुतिन गए थे प्रधानमंत्री निवास:

आपकी जानकारी के लिए बता दें रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन गुरुवार को ही भारत की यात्रा पर आए थे। भारत आने के बाद पुतिन सीधे प्रधानमंत्री आवास पर गए थे, जहाँ उनका स्वागत पीएम मोदी ने किया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन के बीच हुई प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत के बाद जारी किए गए एक संयुक्त बयान में कहा गया कि दोनों पक्षों ने भारत को सतह से हवा में वार करने वाली लम्बी दूरी की मिसाइल प्रणाली S-400 की आपूर्ति के लिए सौदे को अंतिम रूप देने का स्वागत किया।

 

चीन धीरे-धीरे आ गया रूस के क़रीब:

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बता दें 5 अरब डॉलर से ज़्यादा की क़ीमत की मिसाइल प्रणाली की आपूर्ति सौदे पर हस्ताक्षर करने के 24 महीने बाद शुरू हो जाएगी। बताया जा रहा है कि इस अतिआधुनिक मिसाइल प्रणाली को हासिल करने के बाद भारत को अपने दुश्मनों ख़ासतौर से पाकिस्तान और चीन के हवाई हमलों का मुक़ाबला करने में बहुत मदद मिलेगी। इस सौदे पर हस्ताक्षर करना बहुत ही महत्व रखता है। जानकारी के अनुसार चीन ने भी इस मिसाइल प्रणाली को ख़रीदने के लिए रूस के साथ सौदे पर हस्ताक्षर किया है। जिस चीन को कभी रूस देखना पसंद नहीं करता था, आज वह धीरे-धीरे रूस के काफ़ी क़रीब आ गया है।

 

1999 में की गयी थी पहली बार प्रदर्शित:

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एयर वाइस मार्शल (सेवानिवृत्त) मनमोहन बहादुर ने पीटीआई से बात करते हुए कहा कि, ‘ ‘यह दुनिया में सबसे मारक हथियार प्रणाली है और यह चार अलग-अलग तरह का वायु रक्षण मुहैया कराती है।’ हालांकि यह सौदा रूस, ईरान और उत्तर कोरिया को निशाना बनाने वाले अमेरिकी अधिनियम ‘काउंटरिंग अमेरिकाज एडवरसरीज थ्रू सैंक्शंस एक्ट’ (सीएएटीएसए) के समीक्षा दायरे में आता है। भारत ने अमेरिका को वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली खरीदने की अपनी जरूरत से वाकिफ कराया है। आपकी जानकारी के लिए बता दें 1999 में यह प्रणाली कपुस्तिन यार प्रैक्टिस रेंज (अस्त्रखन क्षेत्र) में रूस के तत्कालीन रक्षा मंत्री इगोर सर्गेयेव के सामने पहली बार प्रदर्शित की गयी थी।

 

मिसाइल में लगे हुए हैं कई आधुनिक सिस्टम:

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2000 के दशक में सबसे उन्नत वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली का परीक्षण किया गया. मिसाइल प्रणाली अप्रैल, 2007 से इस्तेमाल की जा रही है। S-400, S-300, PMU-2 वायु रक्षा मिसाइल कांप्लेक्स पर आधारित है। विशेषज्ञों ने बताया कि वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली में एक युद्धक नियंत्रण चौकी, हवाई लक्ष्यों का पता लगाने के लिए तीन कॉर्डिनेट जैम-रेजिस्टेंट फेज्ड एैरे रडार, छह-आठ वायु रक्षा मिसाइल कांप्लेक्स (12 तक ट्रांसपोर्टर लांचर के साथ) और साथ ही एक बहुपयोगी फोर-कॉर्डिनेट इल्यूमिनेशन एंड डिटेक्शन रडार), एक तकनीकी सहायक प्रणाली सहित अन्य लगे हैं।

 

बढ़ जाएगी भारत की ताक़त कई गुना:

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S-400 प्रणाली में हर ऊंचाई पर काम करने वाला रडार (डिटेक्टर) और एंटेना पोस्ट के लिए मूवेबल टॉवर भी लगाए जा सकते हैं। यह प्रणाली 600 किलोमीटर तक की दूरी तक लक्ष्यों का पता लगा सकती है और उसकी सामरिक बैलिस्टिक मिसाइल पांच से 60 किलोमीटर तक के लक्ष्यों को तबाह कर सकती है। बताया जा रहा है कि इस आधुनिक मिसाइल प्रणाली के भारत में आनें के बाद भारतीय सेना की ताक़त कई गुना ज़्यादा बढ़ जाएगी। इसके बाद भारत को किसी से भी डरने की ज़रूरत नहीं रहेगी। हालाँकि चीन भी इस प्रणाली का सौदा रूस के साथ कर चुका है, ऐसे में वह भारत के लिए मुश्किल खड़ी कर सकता है।


मिल गया भाजपा पर निशाना साधने का।


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