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एक बार शेखर सुमन के लिए प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने रोक दी थी अपनी कार

प्रजातंत्र है आप जो चाहे मेरे बारे में बोलें

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मशहूर अभिनेता और हास्य कलाकार शेखर सुमन को आज किसी पहचान की ज़रूरत नहीं है। उन्होंने अपनी प्रतिभा के दम पर वो मुक़ाम पाया है, जो बहुत कम लोगों को मिल पाता है। शेखर सुमन का मानना है कि आज के समय में समाज अब ह्यूमर की तार्किकता को समझने से लगातार दूर होता जा रहा है। ह्यूमर के गिरते स्तर को लेकर शेखर सुमन ने कहा कि, अगर आपका पोस्टमार्टम हो तो देखेंगे कि आप ज़िंदगी में सेंसेटिव हो जाते हैं या बहुत ज़्यादा डिफ़ेंसिव हो जाते हैं। तो कहीं ना कहीं आप ज़िंदगी को नकार रहे होते हैं।

करते थे हनुमान और राम को लेकर कटाक्ष:

 शेखर सुमन

शेखर सुमन ने ह्यूमर में आ रहे बदलाव को लेकर कहा, पहले एक समय ऐसा भी था जब हम लोग राम और हनुमान को लेकर कटाक्ष करते थे। समाज सहनशील था। वो जानता था कि वो फूहड़ नहीं है। लेकिन आज के समय में लोग कहते हैं कि आपने फला चीज़ के बारे में यह कैसे कह दिया, वो क्यों कह दिया। भारत के सबसे चर्चित प्रधानमंत्रियों में से एक अटल बिहारी वाजपेयी अब हमारे बीच में नहीं है, लेकिन वो अपने कामों के ज़रिए हमेशा लोगों की दिलों में जीवित रहेंगे। उन्होंने देश के लिए एक से बढ़कर एक बेहतरीन काम किए। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से गाँवों को मुख्य सड़कों से जोड़ा और अमेरिका के प्रतिबंध के बाद भी परमाणु परीक्षण करके यह साबित कर दिया कि भारत किसी से पीछे नहीं है।

अब हर चीज़ पर लो मानने लगे हैं बुरा:

शेखर सुमन ने देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से जुड़ा एक बहुत ही मज़ेदार क़िस्सा भी सुनाया। आपकी जानकारी के लिए बता दें शेखर सुमन ने अपने शो में तत्कालीन प्रधानमंत्री अलट बिहारी वजपीयी पर ह्यूमर प्रस्तुत किया था। शेखर सुमन ने कहा, “अब हर चीज पर लोग बुरा मानने लगे हैं। अब कुछ भी कहना बहुत मुश्किल है। जब मैं अपना शो किया करता था “मूवर्स एंड शेखर्स” ये मेरे लिए सबसे बड़ा कॉम्प्लीमेंट था जो पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी से मिला। मुझे याद है मैं किसी फंक्शन में गया हुआ था। भुजबल साहब भी उस सम्मेलन में आए हुए थे। उनके बगल में मैं खड़ा था और जब वाजपेयी जी बाहर की ओर जा रहे थे। तो उनकी गाड़ी अचानक रुकी।

प्रजातंत्र है आप जो चाहे मेरे बारे में बोलें:

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सुमन ने आगे बताया, किसी को इस बात की जानकारी नहीं थी कि क्यों गाड़ी रुकी और जब गाड़ी रुकी प्रधानमंत्री जी उतरे। दो कदम आगे चले। हमने सोचा कि वो भुजबल साहब से मिलने जा रहे हैं। वो मेरी तरफ आए और उन्होंने मुझे गले लगाया। इसके बाद उन्होंने मुझसे कहा, बहुत दिनों से तुम्हारी तलाश थी। अटल बिहारी वजपीयी ने कहा जब तुम मेरे ऊपर टीका टिप्पणी करते हो तो सबसे ज्यादा मैं हंसता हूं। इसको रोकना नहीं। इसे करते रहना, क्योंकि ये बहुत ही सकारात्मक चीज है। उस तरह की सहनशीलता अगर सब में हो… जब प्रधानमंत्री कहता है कि प्रजातंत्र है आप मेरे बारे में जो भी कहना चाहते हैं कहें।

पढ़ा लिखा इंसान कभी नहीं मानेगा बुरा:

शेखर सुमन ने आगे कहा, ऑफकोर्स वो फूहड़ न हो। अगर कहीं-कहीं उसमें जहनी तर्क है और इंसान पढ़ा लिखा है तो वो उस बात का कभी बुरा नहीं मानेगा, क्योंकि उसमें कहीं न कहीं कोई तथ्य छिपा है। आपकी जानकारी के लिए बता दें शेखर सुमन ने ये बातें मंगलवार को आजतक के मुंबई मंथन 2018 में ‘कहां गया सेन्स ऑफ ह्यूमर’ सत्र के दौरान की। सत्र का संचालन निधि अस्थाना ने किया। इस दौरान महशूर कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव भी मौजूद रहे। कॉमेडी शोज के बिगड़ते स्तर को लेकर शेखर ने कहा, ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि यहां सोच इन्वॉल्व नहीं है। जहां सोच या अध्यात्म नहीं इन्वॉल्व हो रहा है, ऐसी जगहों पर ह्यूमर फूहड़ हो ही जाएगा।

विरोध के बाद ख़त्म हो जाती है ह्यूमर की जगह:

यही वजह है कि कई लोग आज व्यापार के लिए इसका (ह्यूमर) इस्तेमाल कर रहे हैं। ये फूहड़ दौर है। शेखर सुमन ने कार्यक्रम में कहा, पहले समाज ज्यादा पढ़ा लिखा था। लोग सभ्य थे। ऐसा था इसीलिए शरद जोशीजी, हरिशंकर परसाई जी या इन जैसे लेखकों ने लिखा और उसे लोगों ने सराहा। आज के दिन वो शायद लिखते तो कोर्ट में केस लड़ रहे होते कि, आपने मजहब या तमाम दूसरी चीजों के बारे में ये क्यों कह दिया। तो कहीं न कही जहिनियत समाज से गायब हो जाती है तो फूहड़ता आती है। अनपढ़ समझ नहीं पाते क्या बात हो रही है और फिर विरोध के बाद ह्यूमर की जगह ही ख़त्म हो जाती है।


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