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इस बार दो दिन मनाई जाएगी कृष्ण जन्माष्टमी, इस तरह से करें श्रीकृष्ण की पूजा

नियमों से की जाए पूजा तो भर जाता है जीवन ख़ुशियों से

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हिंदू धर्म में व्रत-त्योहार का बहुत महत्व होता है। हर महीने कोई ना कोई व्रत-त्योहार मनाया ही जाता है। लेकिन कुछ त्योहारों का महत्व ज़्यादा होता है, इन्ही में से एक है श्रीकृष्ण जन्माष्टमी। आपकी जानकारी के लिए बता दें इस बार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी दो दिन मनायी जाएगी। भाद्रपद महीने की अष्टमी को 2 सितम्बर की रात 8:47 बजे से शुरू होकर 3 सितम्बर की शाम 5:19 बजे तक शुभ योग है। रोहिणी नक्षत्र 2 सितम्बर की रात को 8:48 से शुरू होकर 3 सितम्बर की रात 8:04 तक है।

 

हिंदू धर्म में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का महत्व है ज़्यादा:

janmashtami 2018
lord krishna

2 सितम्बर की रात 10 बजे से लेकर रात 1:57 तक वृष लग्न होगी। आपको बता दें 3 सितम्बर को उदियात की अष्टमी तिथि होने की वजह से इस दिन गृहस्थ यानी वैष्णव सम्प्रदाय के लोग जबकि 2 सितम्बर को साधु-संत यानी स्मार्त सम्प्रदाय के लोग श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाएँगे। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी भगवान श्रीकृष्ण के जन्म उत्सव के तौर पर मनाया जाता है। हिंदू धर्म में भगवान श्रीकृष्ण एक प्रमुख देवता के रूप में पूजे जाते हैं। इसी वजह से इस पर्व का महत्व हिंदू धर्म में बहुत ज़्यादा है।

 

नियमों से की जाए पूजा तो भर जाता है जीवन ख़ुशियों से:

भगवान श्रीकृष्ण के बारे में कहा जाता है कि इनका जन्म भाद्रपद मास की अष्टमी तिथि को रात्रि 12 बजे वृष लग्न में हुआ था। इसी दिन रोहिणी नक्षत्र भी था। इस बार की ख़ास बात ये है कि यह योग 2 सितम्बर को बन तो रहा है, लेकिन इस दिन उदियात की अष्टमी नहीं है। इस वजह से वैष्णव सम्प्रदाय को मनाने वाले लोग 3 सितम्बर को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाएँगे। भगवान श्रीकृष्ण की पूजा के भी कुछ ख़ास नियम हैं। अगर उन नियमों का पालन करते हुए श्रीकृष्ण की पूजा की जाए तो व्यक्ति का जीवन ख़ुशियों से भर जाता है।

 

पूजा करने के लिए ज़रूरी चीज़ें:

janmashtami 2018

श्रीकृष्ण की पूजा करने के लिए इनकी मूर्ति को स्नान कराने के लिए ताम्बे की थाली और लोटा, जल कलश, दूध के अलावा उनके वस्त्र और आभूषण होने चाहिए। स्नान करवाने के बाद पूजन करने के लिए चावल, कुमकुम, दीपक, तेल, रुई, धूपबत्ती, फूल, अष्टगंध, तुलसी के पत्ते, तिल और जनेऊ होना ज़रूरी है। प्रसाद के रूप में माखन, मिश्री, धनिया की पंजीरी जैसे प्रसाद ही श्रीकृष्ण को अर्पित किए जाते हैं। इसके साथ फल भी प्रसाद के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।

 

 

इस तरह से करें श्रीकृष्ण का पूजन:

प्रथम पूज्यते श्री गणेश यानी भगवान गणेश की पहले पूजा की जाती है। श्री गणेश को स्नान करवाएँ और उन्हें वस्त्र अर्पित करें। फिर गंध, पुष्प, धूप, दीप, अक्षत यानी चावल से पूजा करें। गणेश जी की पूजा करने के बाद श्रीकृष्ण की पूजा करें। सबसे पहले श्रीकृष्ण को जल से स्नान करवाएँ। इसके बाद पंचामृत से स्नान करवाएँ और पुनः जल से स्नान करवाएँ। इसके बाद श्रीकृष्ण को वस्त्र और आभूषण से सजायें। फूलों की माला अर्पित करें। ॐ नमों भगवते वासुदेवाय नमः मंत्र का जाप करते हुए अष्टगंध का तिलक लगाएँ। अब धूप और दीप अर्पित करें। घी या तेल के दीपक से श्रीकृष्ण की आरती करें। इसके बाद नैवेद्य अर्पित करें। अंत में फल और मिठाई अर्पित करते हुए पूजा सम्पन्न करें।

 


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