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धूम्रपान ना करने वाले लोग इस वजह से बन रहे हैं फेफड़े के कैंसर के शिकार

बढ़ते वायु प्रदूषण की वजह से भी हो सकता है फेफड़े का कैंसर

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आज के समय में हर दूसरा व्यक्ति किसी ना किसी बीमारी से ग्रस्त है। जिस तेज़ी से तकनीकी का विकास हो रहा है उसी तेज़ी से बीमारी का भी विकास हो रहा है। आए दिन वैज्ञानिक नए-नए रोगों के बारे में पता लगा रहे हैं। पहले ज़माने में भी रोग हुआ करते थे, लेकिन आजकल कई नए रोगों के बारे में पता चला है। जानकारों का इस बारे में कहना है कि पहले भी यही रोग हुआ करते थे, लेकिन इसे पता लगानें की तकनीक नहीं थी। इस वजह से व्यक्ति गम्भीर रोगों से पीड़ित होता था तो पता ही नहीं चल पाता था।

 

सिगरेट पीने से होती है कैंसर जैसी घातक बीमारी:

smoking

लेकिन आज के समय में सबकुछ सम्भव हो गया है। दो मिनट के अंदर ही बड़ी से बड़ी बीमारी के बारे में पता लगाया जा सकता है। आजकल लोग अपने स्वास्थ्य के प्रति कुछ ज़्यादा ही सजग रहते हैं, लेकिन स्वास्थ्य को नुक़सान पहुँचाने वाली चीज़ों का सबसे ज़्यादा इस्तेमाल आज के समय में ही किया जा रहा है। जिन चीज़ों के बारे में लोगों को पता है कि इससे यह रोग होगा, उसका भी आज के समय में धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है। लोगों को पता है कि सिगरेट पीने से कैंसर जैसी घातक बीमारी हो सकती है, लेकिन फिर भी लोग इसका इस्तेमाल करते हैं।

 

धूम्रपान नहीं करने वाले लोगों को भी होता है फेफड़े का कैंसर:

अक्सर सिगरेट पीने वाले लोगों को देखकर लोग कहते हैं कि हो ना हो यह एक दिन फेफड़े के कैंसर से ही मरेगा। लेकिन कई मामलों में ऐसा भी देखा गया है कि जो लोग धूम्रपान नहीं करते हैं, वो भी फेफड़े के कैंसर से मरते हैं। जी हाँ आपकी जानकारी के लिए बता दें कि फेफड़े के कैंसर से केवल धूम्रपान करने वाले ही नहीं बल्कि धूम्रपान नहीं करने वाले लोग भी जूझ रहे हैं। ऐसा किस वजह से हो सकता है, आप यही सोच रहे हैं ना? तो ज़्यादा मत सोचिए हम आपको बताते हैं कि यह किस वजह से हो रहा है। आपमें से ज़्यादातर लोग यह समझ चुके होंगे कि हम किसकी बात कर रहे हैं?

 

50 प्रतिशत मरीज़ ऐसे हैं जो धूम्रपान नहीं करते थे:

जी हाँ आप बिलकुल सही हैं, ऐसा बढ़ते प्रदूषण की वजह से हो रहा है। पिछले छह सालों के दौरान की गयी एक रिसर्च से इस बात का ख़ुलासा हुआ है। बता दें सर गंगाराम हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने अपने यहाँ भर्ती हुए फेफड़े के कैंसर से जूझ रहे मरीज़ों पर किए गए एक शोध से यह पता लगाया है। शोध के नतीजे काफ़ी परेशान करने वाले हैं। इस शोध में मार्च 2012 से जून 2018 तक के लगभग 150 से ज़्यादा मरीज़ों को शामिल किया गया था। गंगाराम अस्पताल में फेफड़े के सर्जन अरविंद कुमार ने कहा कि इन मरीज़ों में से लगभग 50 प्रतिशत ऐसे भी मरीज़ हैं जो धूम्रपान नहीं करते थे।

 

बढ़ते वायु प्रदूषण की वजह से भी हो सकता है फेफड़े का कैंसर:

smoking

अरविंद कुमार ने बताया कि फेफड़े का कैंसर एक घातक जानलेवा बीमारी है। इसके उपचार के बाद पाँच साल तक और जीने की उम्मीद रहती है। डॉक्टर ने बताया कि धूम्रपान नहीं करने वाले युवक और युवतियों में फेफड़े के कैंसर के बढ़ते हुए मामले को देखकर वह हैरान हैं। डॉक्टर अरविंद ने बताया कि धूम्रपान फेफड़े के कैंसर की एक सबसे मुख्य वजह है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि फेफड़े का कैंसर केवल धूम्रपान की वजह से ही होता है, फेफड़े का कैंसर तेज़ी से बढ़ते वायु प्रदूषण की वजह से भी हो सकता है। आजकल ज़्यादातर मामलों में फेफड़े के कैंसर के बढ़ने की वजह दूषित हवा है।

 

पिछले कुछ सालों में बढ़ गयी है हवा में प्रदूषण की मात्रा:

डॉक्टर अरविंद ने बताया कि आज के समय में प्रदूषित शहर में रहने वाले लोग बिना धूम्रपान किए भी हर समय अपने अंदर धूम्रपान वाला धुआँ लिए घूमते रहते हैं। धूम्रपान ना करने वाले युवक-युवतियों में बढ़ते फेफड़े के कैंसर के मामलों को देखकर यह कहा जा सकता है कि हवा में प्रदूषण की मात्रा पिछले कुछ सालों में कितनी ज़्यादा बढ़ गयी है। पहले लोग केवल धूम्रपान करने की वजह से फेफड़े के कैंसर के शिकार होते थे, लेकिन आज के समय में जो लोग धूम्रपान नहीं करते हैं, वो भी फेफड़े के कैंसर के शिकार हो रहे हैं। अगर आप भी किसी बड़े शहर जैसे दिल्ली या मुंबई में रहते हैं तो आपको भी इसके बारे में सोचने की ज़रूरत है, वार्न आने वाले दिनों में शायद भी इस जानलेवा बीमारी की चपेट में आ सकते हैं।


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