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बनी सरदार पटेल की 182 मीटर ऊँची प्रतिमा का उद्घाटन करेंगे मोदी

कहीं यह भाजपा का राजनीतिक दाव तो नहीं

Statue of Unity
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भारत के पहले उप-प्रधानमंत्री और गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल के बारे में किसी को कुछ भी बताने की ज़रूरत नहीं है। इन्होंने जो काम किए हैं, उसके लिए उन्हें देश हमेशा याद करेगा। उन्ही की याद में गुजरात में 182 मीटर ऊँची प्रतिमा का निर्माण करवाया जा रहा है। आपको बता दें सरदार वल्लभ भाई पटेल की इस मूर्ति को सरदार सरोवर डैम में बनाया जा रहा है। इस मूर्ति को बनाने के काम में 2500 से ज़्यादा मज़दूर लगे हुए हैं। सबसे हैरान करने वाली बात ये है कि काम करने वाले मज़दूरों में काफ़ी चीनी मज़दूर भी हैं।

सरदार पटेल के जन्मदिन पर मोदी करेंगे प्रतिमा का लोकार्पण:

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चीनी मज़दूरों के हाथों बनने वाली यह मूर्ति दुनिया की सबसे बड़ी मूर्ति यानी चीन के स्प्रिंग टेम्पल बुद्ध को भी पीछे छोड़ देगी। जानकारी के अनुसार स्प्रिंग टेम्पल में स्थापित बुद्ध की प्रतिमा 128 मीटर ऊँची हैं। आपको बता दें इस मूर्ति को बनाने में कुल 2990 करोड़ की लागत आ रही है। इस मूर्ति को स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी का नाम दिया गया है। स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी बनने के बाद दुनिया की सबसे ऊँची प्रतिमा हो जाएगी। अमेरिका में मौजूद स्टैच्यू ऑफ़ लिबर्टी से ऊँचाई में दुगुनी होगी। बताया जा रहा है कि 31 अक्टूबर को सरदार पटेल के जन्मदिन के मौक़े पर इस प्रतिमा का लोकार्पण पीएम मोदी करेंगे।

 

शुरू होगा 2019 लोकसभा चुनाव का प्रचार:

आपको बता दें स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट है। जब 2014 में नरेंद्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री बने थे, तभी उन्होंने इस प्रोजेक्ट को शुरू कर दिया था। पीएम मोदी का कहना है कि जिस तरह से स्टैच्यू ऑफ़ लिबर्टी अमेरिका में सैलानियों के लिए आकर्षण का मुख्य केंद्र बना रहता है, उसी तरह से भारत में स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी भी आकर्षण का केंद्र बनेगा। सरदार पटेल के जन्मदिन यानी 31 अक्टूबर को ही भाजपा लोकसभा 2019 चुनाव के लिए चुनाव प्रचार की शुरुआत भी करने जा रही है।

दो सालों से पाटीदार चल रहे हैं भाजपा से नाराज़:

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जानकारी मिली है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दुनिया की सबसे ऊँची सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी के लोकार्पण से ही चुनावी बिगुल भी फूकेंगे। भाजपा के सूत्रों के अनुसार 182 मीटर ऊँची स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी के लोकार्पण कार्यक्रम की ब्रांडिंग गुजरात सहित पूरे देश में ज़ोर-शोर से चल रही है। इस कार्यक्रम में सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को भी बुलाया जाएगा। यह बात किसी से छुपी हुई नहीं है कि पिछले दो साल से गुजरात में पाटीदार आरक्षण को लेकर पाटीदार समुदाय के लोग भाजपा से काफ़ी नाराज़ चल रहे हैं।

एक तीर से दो निशाना लगाना चाहते हैं मोदी:

पाटीदारों की भाजपा से नाराज़गी का असर गुजरात विधानसभा चुनाव में भी देखने को मिला है। ऐसे में माना जा रहा है कि यह पीएम मोदी का दाव है। वह एक तीर से दो निशाना लगाने के चक्कर में हैं। सरदार वल्लभ भाई पटेल भी पाटीदार समुदाय से ही ताल्लुक़ रखते थे। सरदार वल्लभ भाई पटेल आज़ाद भारत के पहले गृहमंत्री और उप-प्रधानमंत्री थे। बारदोली सत्याग्रह करने वाले वल्लभ भाई को सत्याग्रह की सफलता के बाद वहाँ की महिलाओं ने सरदार की उपाधि से नवाज़ा था। इसके बाद से ही ये सरदार वल्लभ भाई पटेल के नाम से मशहूर हो गए।

बिखरे भारत को एक करने के लिए कहा जाता है लौह पुरुष:

सरदार वल्लभ भाई पटेल पूर्ण स्वराज के पक्षधर थे। भारत छोड़ो आंदोलन में महात्मा गांधी के साथ इन्होंने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसकी वजह से इन्हें जेल भी जाना पड़ा था। जब भारत आज़ाद हो गया तो भारत कई रियासतों में बँटा हुआ था। बिखरे भारत के भू-राजनीतिक एकीकरण में केंद्रीय भूमिका निभाने के लिए सरदार वल्लभ भाई पटेल को बिस्मार्क और लौह पुरुष ने नाम से भी जाना जाता है। इन्होंने आज़ादी के बाद वीपी मेनन के साथ मिलकर देश के लगभग 565 रजवाड़ों को भारत में शामिल होने के लिए तैयार किया था। पहले कश्मीर, हैदराबाद और जूनागढ़ भारत में शामिल नहीं होना चाहते थे। लेकिन सरदार पटेल ने कुछ ऐसा किया कि ये तीनों भी भारत में शामिल होने के लिए तैयार हो गए।

 


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