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सुप्रीम कोर्ट के इन पाँच ऐतिहासिक फ़ैसलों से बदल सकता है लोगों का जीवन

सबरीमाला मंदिर में महिलाओं को प्रवेश का अधिकार

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2018 का साल भारत के लिए काफ़ी महत्वपूर्ण रहा है। राजनीतिक दृष्टि से भी और क़ानून की दृष्टि से भी। जी हाँ यह साल क़ानून में बदलाव की दृष्टि से काफ़ी महत्वपूर्ण रहा है। भारतीय संविधान में कई ऐसे क़ानून थे जो भारत को दुनिया के मुक़ाबले काफ़ी पीछे कर रहे थे। सुप्रीम कोर्ट ने लोगों के बुनियादी अधिकारों को महत्व देते हुए अंग्रेज़ों द्वारा बनाए गए कई क़ानूनों को असंवैधानिक क़रार दिया। 2018 में 5 ऐसे बड़े फ़ैसले हुए हैं, जो यक़ीनन भारतीय समाज में कई बड़े बदलाव करेंगे। इन क़ानूनों में बदलाव के बाद लोगों का जीवन बदल जाएगा।

 

2018 में इन क़ानूनों में हुआ है बदलाव:

 

*- सबरीमाला मंदिर में महिलाओं को प्रवेश का अधिकार:

landmark judgement by supreme court of India

सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितम्बर को एक बहुत ही क्रांतिकारी फ़ैसला दिया है। दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर लगी रोक को ख़त्म कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट के 5 जजों की बेंच ने आपना ऐतिहासिक फ़ैसला 28 सितम्बर को सुनाया। बता दें यह मंदिर लगभग 800 साल पुराना है और यहाँ ऐसी मान्यता सदियों से चल रही थी। इसकी वजह से मंदिर में रजस्वला महिलाओं को प्रवेश करने नहीं दिया जाता था। मुख्य न्यायधीश दीपक मिश्रा ने फ़ैसला पढ़ते हुए कहा कि आस्था के नाम पर लिंगभेद नहीं किया जा सकता है। क़ानून और समाज का काम सभी को बराबरी से देखने का है।

 

*- आधार कार्ड संवैधानिक लेकिन कुछ शर्तें:

landmark judgement by supreme court of India

केंद्र सरकार आधार कार्ड को हर जगह ज़रूरी बना रही थी। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को झटका देते हुए 26 सितम्बर को आधार पर एक बहुत ही क्रांतिकारी फ़ैसला सुनाया। पाँच जजों की खंडपीठ ने यह आदेश दिया कि आधार संवैधानिक है, लेकिन उसे सभी सरकारी सेवाओं में अनिवार्य नहीं किया जा सकता है। इस तरह आधार को PAN से लिंक तो करना ज़रूरी है, लेकिन बैंक खातों या मोबाइल नम्बर से लिंक करने की कोई ज़रूरत नहीं है।

 

 

*- विवाहेतर सम्बंध अब अपराध नहीं:

landmark judgement by supreme court of India

27 सितम्बर ने विवाहेतर सम्बन्धों को लेकर एक ऐतिहासिक फ़ैसला दिया। सुप्रीम कोर्ट ने 27 सितम्बर को अपने आदेश में लगभग 150 साल पुराने व्यभिचार क़ानून (धारा 497) को असंवैधानिक क़रार देते हुए कहा कि अब इसे अपराध नहीं माना जाएगा। इस क़ानून के अंतर्गत किसी महिला को पुरुष की सम्पत्ति माना जाता था, इसी वजह से इस क़ानून की आलोचना होती थी।

 

 

*- सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही का लाइव प्रसारण:

landmark judgement by supreme court of India

 

पहले सुप्रीम कोर्ट के लाइव प्रसारण की इजाज़त नहीं थी, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही के लाइव प्रसारण की इजाज़त दे दी गयी है। सुप्रीम कोर्ट ने 26 सितम्बर को अपने आदेश में कहा कि कार्यवाही के लाइव प्रसारण से न्यायिक प्रक्रिया में और पारदर्शिता आएगी। इसके साथ ही इससे लोगों के जानने के अधिकार को और बल भी मिलेगा।

 

 

*- समलैंगिक यौन सम्बंध नहीं रहा अब अपराध:

landmark judgement by supreme court of India

सुप्रीम कोर्ट ने 6 सितम्बर को अब तक का सबसे क्रांतिकारी फ़ैसला सुनाया। 6 सितम्बर के अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने LGBTQ समुदाय को बड़ी राहत देते हुए समलैंगिक यौन सम्बन्धों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया। मुख्य न्यायधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने धारा 377 के प्रावधानों में बदलाव किया। कोर्ट ने कहा कि दो वयस्कों द्वारा आपसी सहमति से किसी निजी स्थान पर बनाए गए यौन सम्बंध को अपराध नहीं माना जाएगा।

 


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