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वामपंथियों की गिरफ़्तारी पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई सरकार को फटकार

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मुंबई: भीम कोरेगाँव मामले में वामपंथी विचारकों की गिरफ़्तारी के बाद सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को जमकर फटकार लगायी है। कोर्ट ने कहा कि विरोध लोकतंत्र का सेफ़्टी वाल्व है, अगर प्रेशर कुकर में सेफ़्टी वाल्व नहीं होगा तो वह फट जाएगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें सरकार के इशारे पर की गयी वामपंथी विचारकों की गिरफ़्तारी के ख़िलाफ़ इतिहसकार रोमिला थापर, देवकी जैन, अर्थशास्त्री प्रभात पटनायक, सतीश देशपांडे और मज़ा दारुवाला ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाख़िल की थी। जिसपर मुख्य न्यायधीश दीपक मिश्रा, जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एएम खानविलकर की बेंच ने सुनवाई की।

 

एफआईआर में नहीं है गिरफ़्तार लोगों का ज़िक्र:

Supreme court

इस दौरान याचिकाकर्ताओं की तरफ़ से वरिष्ठ वक़ील अभिषेक मनु सिंघवी, दुष्यंत दवे, राजू रामचन्द्रन, प्रशांत भूषण और वृंदा ग्रोवर थे वहीं सरकार की तरफ़ से एडिशनल सोलिसिटर जनरल तुषार मेहता कोर्ट में मौजूद थे। आपको बता दे सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की बेंच के सामने याचिकाकर्ताओं की तरफ़ से पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मनु सिंघवी ने कहा कि पुलिस की एफआईआर में गिरफ़्तार लोगों का कोई ज़िक्र नहीं है और ना ही आरोपियों के ऊपर किसी तरह की मीटिंग करने का आरोप है।

 

मामला जुड़ा हुआ है जीने के और आज़ादी के अधिकार से:

सिंघवी ने आगे कहा कि गिरफ़्तार लोगों में एक ने अपनी अमेरिकी नागरिकता छोड़ते हुए भारत में वकालत करने को अपने पेशे के तौर पर चुना। यहाँ आपको बता दें सिंघवी सुधा भारद्वाज के बारे में बात कर रहे थे। सिंघवी ने कहा कि सुधा दिल्ली के लॉ यूनिवर्सिटी में पढ़ाती भी हैं। लेकिन यहाँ बड़ा मामला सरकार से असहमति का है। वहीं सिंघवी का विरोध करते हुए एडिशनल सोलिसिटर तुषार मेहता ने कहा कि जिन लोगों का इस केस से कोई लेना देना नहीं है वे सुप्रीम कोर्ट के समक्ष हैं। इसपर सिंघवी ने कहा कि यह मामला संविधान के अनुच्छेद 21 द्वारा सुनिश्चित जीने के अधिकार और आज़ादी के अधिकार से जुड़ा हुआ है। इस वजह से इन गिरफ़्तारियों पर रोक लगाई जाए।

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बिना सोचे समझे की गयी है गिरफ़्तारियाँ:

Supreme court

वहीं दूसरी तरफ़ वक़ील दुष्यंत दवे ने कहा कि यह गिरफ़्तारियाँ बिना सोचे समझे की गयी है। जिसका इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है। सभी पक्षों को ध्यान से सुनने के बाद जस्टिस चंद्रचूड़ ने महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए कहा कि असहमति हमारे लोकतंत्र का सेफ़्टी वाल्व है, यदि प्रेशर कुकर में सेफ़्टी वाल्व ना हो तो वो फट सकता है। लिहाज़ अदालत आरोपियों को अंतरिम राहत देते हुए अगली सुनवाई तक इस गिरफ़्तारी को रोकने का ऐलान किया। तब तक सभी आरोपियों को हाउस अरेस्ट में रखा जाएगा। आपको बता दें इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई 6 सितम्बर को होगी।

 

कई वामपंथी विचारकों को पुलिस ने किया गिरफ़्तार:

ज्ञात हो कि भीम कोरेगाँव हिंसा से जुड़े मामले में देश के कई हिस्सों से मंगलवार को पुणे पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने कई वामपंथी विचारकों के घर छापे मारकर उन्हें गिरफ़्तार किए थे। पुलिस की यह छापेमारी महाराष्ट्र, गोवा, तेलंगाना, दिल्ली, झारखंड में की गयी थी। पुणे पुलिस ने स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर छापेमारी को अंजाम दिया था। इस मामले में सामाजिक कार्यकर्ता गौतम नवलखा, वरवरा राव, सुधा भारद्वाज अरुण फरेरा और वर्णों गोंजालविस को गिरफ़्तार किया गया था।

 


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