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पटाखों पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाना चाहिए या नहीं, इसपर पुनः विचार करेगा उच्चतम न्यायालय

20-25 प्रतिशत बच्चे पीड़ित हैं साँस सम्बंधी बीमारियों से

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नई दिल्ली: आजकल शादी-विवाह हो या अन्य कोई फ़ंक्शन लोग अपनी ख़ुशी का इज़हार करने के लिए पटाखे छोड़ते ही हैं। लोगों की इसी आदत की वजह से दिनो-दिन प्रदूषण बढ़ता ही जा रहा है। आज हालत ऐसी हो गयी है कि लोगों को साँस लेने के लिए शुद्ध हवा तक नहीं बची है। ऐसे में लोग तरह-तरह की शारीरिक बीमारियों की चपेट में आ गए हैं। किसी को साँस की बीमारी है तो किसी को अन्य कोई शारीरिक समस्या है। बढ़ता प्रदूषण इसके लिए मुख्य रूप से ज़िम्मेदार है।

 

दिवाली के समय ख़तरनाक स्तर पर पहुँच जाता है प्रदूषण:

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Source: Deccon Cronical

नई दिल्ली जैसे शहर की बात की जाए तो यहाँ पर प्रदूषण का स्तर इस क़दर है कि लोगों का जीना हराम हो गया है। प्रदूषण इस क़दर बढ़ गाय है कि लोग खुली हवा में साँस लेने की बजाय अपने घर में साँस लेना ज़्यादा बेहतर समझते हैं। दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को ध्यान में रखते हुए उच्चतम न्यायालय इस बात पर फिर से विचार करेगा कि क्या पटाखों के इस्तेमाल पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाया जाए या नहीं। कोर्ट ने इस बात पर ध्यान दिया कि दिवाली के समय में वायु प्रदूषण ख़तरनाक स्तर पर पहुँच जाता है।

 

20-25 प्रतिशत बच्चे पीड़ित हैं साँस सम्बंधी बीमारियों से:

उच्चतम न्यायालय का कहना है कि त्योहारों के दौरान प्रदूषण के इस तरह से बढ़ जाने की वजह से शहरों में लगभग 20-25 प्रतिशत बच्चे श्वास सम्बंधित बीमारियों से पीड़ित रहते हैं। यह एक बहुत ही गम्भीर मुद्दा है। अगर इसके बारे में आज नहीं सोचा गया तो आने वाले समय में स्थितियाँ और भी भयावह हो जाएँगी। न्यायमूर्ति एके सीकरी और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की पीठ ने कहा कि क्या हमें समग्र दृष्टिकोण अपनाना चाहिए या अस्थायी दृष्टिकोण अपनाना चाहिए और केवल पटाखों के ऊपर रोक लगाना चाहिए?

 

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पटाखों पर प्रतिबंध लगाने से वायु प्रदूषण पर पड़ता है बहुत कम असर:

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Source: Scoop Woop

सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर भी ग़ौर किया है कि वायु प्रदूषण बच्चों के साथ ही बड़े लोगों के लिए भी बहुत ख़तरनाक है। ज़हरीले पटाखे जलाए जानें से हवा में ज़हर घुल रहा है और हवा को दूषित कर रहा है। ऐसी हवा में जो भी साँस लेगा वह बीमारी का शिकार ही होगा। यही वजह है कि गाँवों की अपेक्षा आज शहरों में कई गुना ज़्यादा प्रदूषण है। एक पटाखा निर्माता की तरफ़ से उपस्थित एक वरिष्ठ अधिवक्ता सीए सुंदरम ने यह तर्क दिया कि पटाखों पर प्रतिबंध लगाने से वायु प्रदूषण पर काफ़ी कम असर पड़ता है और इस मुद्दे पर वैज्ञानिक अध्ययन होना चाहिए।

 

दिवाली के समय भी ढील देने से कर दिया था मना:

जानकारी के अनुसार कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई की तारीख़ 8 अगस्त को निर्धारित की है। पिछले साल अदालत ने अपने अभिवावकों के माध्यम से तीन बलिगों द्वारा दाख़िल की गयी याचिका पर सुनवाई करते हुए कुछ समय के लिए पटाखों की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया था। केवल यही नहीं दिवाली के समय भी पटाखों की बिक्री पर ढील देने से भी सरकार ने मना कर दिया था। दिल्ली में हर साल कई करोड़ों रुपए के पटाखे दिवाली के समय जलाएँ जाते हैं, इससे दिल्ली सहित आस-पास के कई इलाक़ों में वायु प्रदूषण बहुत ज़्यादा होता है।


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