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अल्ज़ाइमर जैसी गम्भीर बीमारी का इस तरह से आसानी से और सस्ते में करें इलाज

मस्तिष्क की कोशिकाओं में केमिकल की कमी ही अल्ज़ाइमर है

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बीमारियों के बारे में कहा जाता है कि ये कभी भी किसी को बताकर नहीं आती हैं। कई बीमारियाँ बढ़ती उम्र के साथ किसी को भी हो जाती हैं। Alzheimer की बीमारी भी उन्ही में से एक है। अल्ज़ाइमर को केवल एक भूलने की बीमारी समझना बड़ी भूल होगी। इस बीमारी की वजह से पीड़ित व्यक्ति की याददाश्त कमज़ोर हो जाती है और परिवार के लोगों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बता दें अल्ज़ाइमर की बीमारी डिमेंशिया का ही एक प्रकार है। डिमेंशिया की तरह ही अल्ज़ाइमर में मरीज़ किसी भी वस्तु, व्यक्ति या घटना को याद नहीं रख पाता है।

 

चोट लगने की वजह से बढ़ जाती है इस बीमारी की आशंका:

Symptoms of Alzheimer

कई बार इसकी वजह से उसे अपनी भावनायें व्यक्त करने में भी दिक़्क़त होती है। आज हम आपको इस मर्ज़ के बारे में सबकुछ बताने जा रहे हैं। सबसे पहले अल्ज़ाइमर एक भूलने की बीमारी है। इसके लक्षणों में याददाश्त की कमी होना, निर्णय लेने की क्षमता खो देना, बोलने में दिक़्क़त होना आदि हैं। रक्तचाप, मधुमेह, आधुनिक जीवनशैली और सिर में चोट लगने की वजह से इस बीमारी के होने की आशंका बढ़ जाती है। यह बीमारी लगभग 60 वर्ष की उम्र के आस-पास ही होती है। सबसे हैरानी की बात यह है कि इस बीमारी का अभी तक कोई स्थायी इलाज नहीं है।

 

मस्तिष्क की कोशिकाओं में केमिकल की कमी ही अल्ज़ाइमर है:

व्यक्ति की उम्र बढ़ने के साथ मस्तिष्क की कोशिकाएँ (न्यूरांस) सिकुड़ने लगती है। इसकी वजह से न्यूरांस के अंदर कुछ ज़रूरी केमिकलों की कमी हो जाती है। इसी स्थिति को मेडिकल साइंस की भाषा में अल्ज़ाइमर कहते हैं। अन्य कारणों में 30-40 प्रतिशत मामले आनुवंशिक होते हैं। इसके अलावा सिर में चोट, वायरल इन्फ़ेक्शन और स्ट्रोक जैसे लक्षण भी उत्पन्न हो सकते हैं। हालाँकि इन्हें अल्ज़ाइमर की बीमारी में शामिल नहीं किया जा सकता है। बता दें ब्रेन सेल्स जिस केमिकल का निर्माण करती है, उसे एसीटिलकोलीन कहते हैं। जैसे-जैसे ब्रेन सेल्स सिकुड़ती जाती है, वैसे-वैसे एसीटिलकोलीन के निर्माण की प्रक्रिया भी कम होती जाती है।

 

एमआरआई जाँच से भी पता चलता है अल्ज़ाइमर का:

दवाओं के ज़रिए एसीटिलकोलीन और अन्य केमिकल्स के कम होने की प्रक्रिया को बढ़ाया जाता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें व्यक्ति की बढ़ती उम्र के साथ ब्रेन सेल्स में केमिकल का कम हो जाना एक स्वाभाविक शारीरिक प्रक्रिया है। लेकिन अल्ज़ाइमर की बीमारी में यह न्यूरो केमिकल बहुत तेज़ी से कम होता है। इस रोग का अभी तक कोई इलाज इजाद नहीं किया गया है। यानी अल्ज़ाइमर हो जानें के बाद इससे मुक्ति नहीं पायी जा सकती है। हालाँकि ज़रूरी दवाओं के इस्तेमाल से रोगी को थोड़ी राहत ज़रूर मिल जाती है। पॉजीट्रॉन इमीशन टोमोग्राफ़ी (पी॰ई॰टी॰) जाँच से इस रोग का पता चलता है। इसके अलावा एमआरआई भी करवाई जाती है।

 

दवाओं के साथ-साथ होती है ख़ास देखभाल की ज़रूरत:

Symptoms of Alzheimer

मस्तिष्क कोशिकाओं में केमिकल की मात्रा को संतुलित करने के लिए दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है। दवाओं के सेवन से रोगियों की याददाश्त और उनकी सूझ-बुझ में सुधार होता है। दवाएँ जितनी जल्दी शुरू हो जाती है, उसका उतना ही फ़ायदा मिलता है। दवाओं के साथ-साथ रोगी और उसके परिवार वालों को काउंसलिं की भी ज़रूरत होती है। काउंसलिंग के तहत रोगी के लक्षणों की सही पहचान करके उसके परिजनों को उससे निपटने की सही और व्याहारिक जानकारी दी जाती है। जिसकी वजह से उन्हें किसी प्रकार की परेशानी का सामना ना करना पड़े।

 

भारत में बहुत कम पायी जाती है ये बीमारी:

अल्ज़ाइमर के खरते को कम करने के लिए गुणों का ख़ज़ाना हल्दी का इस्तेमाल किया जा सकता है। एक नए शोध के अनुसार भारत में आमतौर पर इस्तेमाल होने वाली हल्दी से बढ़ती उम्र में याददाश्त बेहतर करने के साथ ही भूलने की बीमारी अल्ज़ाइमर के ख़तरे को भी कम किया जा सकता है। अमेरिकी शोधकर्ताओं ने डिमेंशिया पीड़ितों के मस्तिष्क पर करक्यूमिन सप्लिमेंट के प्रभाव पर ग़ौर किया। बता दें करक्यूमिन हल्दी में पाया जाना वाला एक तत्व है। पूर्व के अध्ययनों के अनुसार इस तत्व में सूजन रोधी और एंटीआक्सिडेंट गुण होते हैं। यही वजह है कि भारत के बुज़ुर्गों में अल्ज़ाइमर की बीमारी बहुत ही कम पायी जाती है।

 

आशंका होने पर तुरंत लें डॉक्टर की सलाह:

Symptoms of Alzheimer

अगर आपके आस-पास या किसी सगे-सम्बंधी को अल्ज़ाइमर की बीमारी हो तो उसके लिए कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत ज़रूरी होता है। आज हम आपको कुछ लक्षणों के बारे में बताने जा रहे हैं, ऐसा होने पर आपको तुरंत बिना देर किए किसी डॉक्टर से इसके बारे में सलाह लेनी चाहिए। डॉक्टर मरीज़ को देखने के बाद सबसे पाले यह निश्चित करते हैं कि वास्तव में यह लक्षण डिमेंशिया के प्रकार अल्ज़ाइमर के हैं या फिर किसी और वजह से ऐसा हो रहा है।

 

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अल्ज़ाइमर के लक्षण:

  • याददाश्त में कमी की वजह से व्यक्ति धीरे-धीरे कई बातें भूलने लगता है। उदाहरण के लिए कई बार वह नहाना ही भूल जाता है।

  • नाश्ता किया है या नहीं इसके बारे में ही भूल जाना।

  • दवा खाई है या नहीं खाई है, यह भूल जाना।

  • अपने ही घर के सदस्यों के नाम भूल जाना या याद ना रख पाना।

  • किसी चीज़ या किसी जगह का नाम याद ना रख पाना। किसी और चीज़ को किसी दूसरे नाम से पुकारना।

  • अपने घर का रास्ता भूल जाना।

  • संख्याओं को याद ना रख पाना।

  • किस जगह कोई सामान रखकर भूल जाना।

  • बहुत ज़्यादा चिड़चिड़ा पन महसूस करना।

  • एक ही काम को लगातार कई बार करते रहना या एक ही बात को बार-बार पूछना।

  • बात करते समय रोगी विषय, नाम और शब्दों को ही भूल जाना।

 

अल्ज़ाइमर का इलाज:

Symptoms of Alzheimer

जो लोग याददाश्त की कमी की समस्या से जूझ रहे हैं, ऐसे लोगों को डॉक्टर की सलाह के बाद नियमित रूप से दवा लेनी चाहिए। अल्ज़ाइमर की कुछ वजहों का इलाज ऑपरेशन के बाद आसानी से किया जा सकता है। सबड्यूरल हिमेटोमा, नॉर्मल प्रेशर हाइड्रोसेफ़ेलस और ब्रेन ट्यूमर या सिर में चोट आदि कारणों से अलग किसी व्यक्ति को अल्ज़ाइमर की बीमारी हुई है तो कुछ मामलों में सर्जरी करके सफल इलाज किया जा सकता है। इसके साथ ही मरीज़ों और उनके परिजनों को कुछ महत्वपूर्ण बातें याद रखनी होगी।

 

 

अल्ज़ाइमर के मरीज़ और परिजन याद रखें ये बातें:

    • रोगी के परिजन रोगी को एक सक्रिय जीवन जीने के लिए प्रेरित करें। इसके साथ ही आस-पास के वातावरण को ख़ुशनुमा बनाएँ।

    • रोगी से थोड़ा शारीरिक श्रम करवाएँ।

    • रोगी को यह बताए की उन्हें कैसे ख़ुश रहना है। कई बार इसका निर्णय ख़ुद रोगी भी कर सकता है।

    • अगर रोगी को डायबिटीज़ या उच्च रक्तचाप की समस्या है तो अपना खानपान नियमित रखें और समय पर दवाएँ लेते रहें।

    • परिजनों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि रोगी को कहीं भी अकेले घर से बाहर ना निकलने दें। इसकी वजह से वह कभी-कभी भटक भी जाते हैं। ऐसे में रोगी की जेब में पहचान पत्र रखें या उन्हें फ़ोन नम्बर लिखा हुआ लॉकेट पहनाएँ।

    • रोगी अक्सर गिरकर चोटिल हो जाते हैं। इस वजह से अल्ज़ाइमर के मरीज़ को कोई मज़बूत छड़ी या चलने के लिए वॉकर दें। रोगी की दिनचर्या को सहज और नियमित रखें। 

  •  अल्ज़ाइमर के रोगी के खान-पान का ख़ास ख़याल रखना बहुत ज़रूरी होता है। इसके साथ ही उनसे मेडिटेशन करवाएँ और सभी प्रकार के नशीली चीज़ों से उन्हें दूर रखें।


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