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एनडीए सरकार से अलग हुई टीडीपी !

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एनडीए सरकार से अलग हुई टीडीपी !

टीडीपी ने कहा कि वह केंद्र सरकार  के खिलाफ सोमवार (19 मार्च) को अविश्वास प्रस्ताव लाएगी. टीडीपी ने एक बयान में कहा, हम 54 सांसदों का हस्ताक्षर 19 मार्च को लाएंगे और संसद में अविश्वास प्रस्ताव पेश करेंगे.`| 

सरकार से अलग हुई टीडीपी ने कहा बीजेपी का मतलब ही है (ब्रेक जनता प्रॉमिस`) जनता से वादाखिलाफी |
तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) से नाता तोड़ लिया है. पार्टी की शुक्रवार को हुई पोलित ब्यूरो की बैठक में यह फैसला लिया गया, जिसके बाद तेदेपा के 16 सांंसदों ने एनडीए से अपना समर्थन वापस ले लिया.

इस मुद्दे पर हाल ही में सरकार से अलग हुई सूबे की सत्ताधारी पार्टी टीडीपी भी वाईएसआर कांग्रेस के साथ है. अब सबकी निगाहें कांग्रेस, टीएमसी समेत अन्य दलों के रुख पर है. अगर इस प्रस्ताव को जरूरी 50 सांसदों का साथ मिला तो शुक्रवार को अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा होगी. अविश्वास प्रस्ताव पर समर्थन जुटाने के लिए वाईएसआर कांग्रेस ने कोशिश शुरू कर दी है. लेकिन इस कवायद में उसे सफलता मिलने की संभावना ना के बराबर है.

आंध्र प्रदेश को ‘विशेष राज्य’ का दर्जा दिए जाने के मुद्दे पर तेदेपा और वाईएसआर कांग्रेस

एनडीए सरकार से अलग हुई टीडीपी !

 लगातार भाजपा नीत केंद्र सरकार पर दवाब बना रही है. इससे पहले बीते 8 मार्च को तेदेपा के दो मंत्रियों ने राजग सरकार से इस्तीफा दे दिया था, हालांकि इसके बावजूद पार्टी ने कहा था कि वह केंद्र को अपना समर्थन जारी रखेगी. अमरावती में आयोजित पोलित ब्यूरो की बैठक में चंद्रबाबू नायडू ने अपने सांसदों से टेलीकॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कहा कि वे आंध्र प्रदेश को ‘विशेष राज्य’ का दर्जा दिलाने के मुद्दे पर दिल्ली में एनडीए सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाएं.

अविश्वास प्रस्ताव पेश करने और उसे स्वीकार करने के लिए लोकसभा के कम से कम 50 सदस्यों का हस्ताक्षर जरूरी होता है. खुद वाईएसआर कांग्रेस के पास नौ लोकसभा सदस्य हैं. अगर टीडीपी भी इसमें शामिल हो जाए, तो उसके 16 सदस्यों के साथ कुल संख्या 25 की हो जाएगी. कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, AIADMK जैसे बड़े विपक्षी दलों को अहसास है कि आंध्र की अंदरूनी राजनीति में उलझना उनके लिए फायदेमंद नहीं है. ऐसे में इस प्रस्ताव का भविष्य अंधकारमय नज़र आता है.

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आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू से मोदी द्वारा टेलीफोन पर बात करने और कथित रूप से राजग सरकार से बाहर निकलने के सवाल पर पुनर्विचार करने के लिए आग्रह करने के बाद मंत्रियों ने इस्तीफा दिया था, लेकिन नायडू ने प्रत्यक्ष रूप से उन्हें अपनी मजबूरी बताई. इसी से संबंधित कड़ी में भाजपा ने 8 मार्च की सुबह आंध्र प्रदेश में नायडू सरकार से अपने दो मंत्रियों को वापस बुला लिया था. तेदेपा के इस कदम से मोदी सरकार की स्थिरता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि उसके पास संसद में पर्याप्त संख्या है, लेकिन उसके लिए यह किसी झटके से कम नहीं है क्योंकि तेदेपा करीब चार साल में केंद्र से बाहर होने वाली पहली पूर्व चुनाव सहयोगी पार्टी है. तेदेपा के लोकसभा में 16 और राज्यसभा में छह सदस्य हैं.

सोमवार को अविश्वास प्रस्ताव लाएगी टीडीपी

तेदेपा ने कहा कि वह केंद्र सरकार के खिलाफ सोमवार (19 मार्च) को अविश्वास प्रस्ताव लाएगी. तेदेपा ने एक बयान में कहा, ‘हम 54 सांसदों का हस्ताक्षर 19 मार्च को लाएंगे और संसद में अविश्वास प्रस्ताव पेश करेंगे.’ आंध्र प्रदेश के मंत्री केएस जवाहर ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने हमारे साथ धोखा किया. मंत्री ने कहा, भाजपा ने तेलुगू जनता को धोखा दिया. हम राजग सरकार के खिलाफ संसद में अविश्वास प्रस्ताव लाने जा रहे हैं.’ |

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