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इस मंदिर में देवी-देवताओं की नहीं बल्कि होती है राक्षसी की पूजा

मंदिर के अंदर रखी गयी है हिडिंबा की चरण पादुका

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भारत एक धार्मिक देश है, इस वजह से यहाँ आपको हर जगह मंदिर देखने को मिल जाएँगे। भारत के हर कोने में आपको विविधता देखने को मिल सकती है। हर जगह की अपनी संस्कृति और मान्यताएँ हैं। ठीक उसी तरह से हर जगह के मंदिर से भी अलग-अलग तरह की मान्यताएँ जुड़ी हुई हैं। आज हम आपको एक ऐसे ही मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जिससे जुड़ी हुई मान्यताएँ आपको हैरानी में डाल सकती हैं। अक्सर आपने देखा होगा कि मंदिरों में देवी-देवताओं की पूजा की जाती है, लेकिन यह मंदिर कुछ अलग है।

 

1553 में करवाया था मंदिर का निर्माण:

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आज हम आपको जिस मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, उस मंदिर को मनाली की शान कहा जाता है। यह मंदिर किसी और का नहीं बल्कि माता हिडिंबा का मंदिर है। अब यह बताने की ज़रूरत नहीं है कि हिडिंबा कौन थी। हिडिंबा एक राक्षसी थी। हिडिंबा का यह मंदिर मनाली मॉल से एक किलोमीटर की दूरी पर देवदार के घने व गगनचुंबी जंगलों के बीच में स्थित है। लगभग 82 फूट ऊँचे पगौड़ा शैली के इस मंदिर का निर्माण कुल्लू के राजा बहादुर सिंह ने 1553 में करवाया था।

 

 

 

मंदिर के अंदर रखी गयी है हिडिंबा की चरण पादुका:

इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यह ख़ूबसूरत मंदिर पर्यटन की नगरी मनाली के आकर्षक मंदिरों में से एक माना जाता है। मनाली घूमने आने वाला हर व्यक्ति इस मंदिर में ज़रूर जाता है। मंदिर के अंदर माता हिडिंबा की चरण पादुका रखी गयी है। लोक मान्यता के अनुसार इस मंदिर में प्राचीनकाल में जानवरों की बलि दी जाती थी। हालाँकि अब यह प्रथा बंद कर दी गयी है। लेकिन आज भी इस मंदिर की दीवारों पर सैकड़ों जानवरों के सींग रखे हुए हैं। लकड़ी से बने हुए इस मंदिर की चार छतें हैं। नीचे की तीन छतों का निर्माण देवदार की लकड़ी से किया गया है, जबकि चौथी छत का निर्माण ताम्बे और पीतल से किया गया है।

 

हर साल इस मंदिर में लगता है मेला:

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यह मंदिर एक कलश की तरह दिखाई देता है। इस मंदिर के परिसर में एक शिला है, जिसे देवी का विग्रह रूप मानकर पूजा जाता है। हर साल जेष्ठ महीने में यहाँ मेला भी लगता है। यहाँ पर हिडिंबा के पुत्र घटोत्कच का भी मंदिर है। प्राचीन मान्यताओं के अनुसार हिडिंबा एक राक्षसी थी, जिसके भाई हिडिंब का मनाली के आस-पास के इलाक़ों में राज था। हिडिंबा पांडवों में से भीम से शादी की थी। हिडिंबा ने यह क़सम खाई थी कि जो उसके भाई हिडिंब को युद्ध में पराजित करेगा, वह उसी से शादी करेगी। अज्ञातवास के दौरान पांडव मनाली के जंगलों में आए थे।

 

 

घटोत्कच ने महाभारत युद्ध में बचायी थी अर्जुन की जान:

उसी समय भीम ने हिडिंब से युद्ध किया था और उसे पराजित करके उसकी हत्या कर दी थी। इसके बाद हिडिंबा ने भीम से शादी कर ली थी। हालाँकि शादी के बाद हिडिंबा मनुष्य बन गयी थी। महाभारत में एक अहम भूमिका निभाने वाले घटोत्कच के बारे में कहा जाता है कि ये भीम और हिडिंबा के बेटे थे। माँ के आदेश के बाद घटोत्कच ने महाभारत के युद्ध में अपनी जान देकर कर्ण के बाण से अर्जुन की जान बचायी थी। इसके बाद से ही लोग हिडिंबा की पूजा मनाली में करने लगे।

 

अत्याचारी राजा का अंत करके बन गए ख़ुद राजा:

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मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है कि विहंगम नाम का एक व्यक्ति कुम्हार के यहाँ नौकरी करता था। हिडिंबा देवी ने विहंगम को सपने में दर्शन दिया और उसे कुल्लू का राजा बनने का आशीर्वाद दिया। इसके बाद विहंगम ने यहाँ के अत्याचारी राजा का अंत किया और ख़ुद राजा बन गया। इन्हें कुल्लू राजघराने का पहला राजा माना जाता है। इनके वंशज आज भी हिडिंबा देवी की पूजा करते हैं। कुल्लू राजघराने के ही राजा बहादुर सिंह ने कुल्लू में हिडिंबा देवी का मंदिर बनवाया था। आज यह मंदिर देशभर में प्रसिद्ध है।

 


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