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नोटबंदी के ठीक बाद इन पाँच समस्याओं का मोदी सरकार को करना पड़ा था सामना

एटीएम की लाइन में हुई थी लगभग 80 लोगों की मौत

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8 नवम्बर 2016 का दिन भारतीय जनता कभी नहीं भूल सकती है। यह वही दिन था जब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी की घोषणा की थी। नोटबंदी की घोषणा के बाद मोदी सरकार को यह उम्मीद थी कि स्थिति दो सप्ताह में धीरे-धीरे ठीक हो जाएगी। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। स्थिति धीरे-धीरे और गम्भीर होने लगी और लोगों की समस्याएँ कम होने की बजाय बढ़ने लगी। नोटबंदी के 30 दिन के बाद भी एटीएम और बैंक में लगने वाली लम्बी लाइन कम नहीं हुई। कैश की कमी की वजह से लोगों में ग़ुस्सा नज़र आने लगा था।

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इन समस्याओं से घबरा गयी थी मोदी सरकार:

इस दौरान कुछ ऐसी ख़बरें भी आने लगी, जिससे मोदी सरकार की चिंता बढ़ गयी। जोश-जोश में लिए गए नोटबंदी के फ़ैसले में हर रोज़ नए-नए बदलाव किए जानें लगे। आज हम आपको पाँच ऐसी ही समस्याओं के बारे में बताने जा रहे हैं जो नोटबंदी के बाद सामने आयी थी और इन्ही समस्याओं की वजह से मोदी सरकार बिलकुल घबरा गयी थी।

इन समस्याओं ने उड़ा दी थी मोदी सरकार की नींद:

बैंक में भ्रष्टाचार:

नोटबंदी के बाद सबसे ज़्यादा किसी को फ़ायदा हुआ तो वह बैंक और बैंक कर्मचारियों को हुआ। उस समय कई बैंक और उनके कर्मचारियों द्वारा काला धन को सफ़ेद करने की भी ख़बरें आयी थी। कर्मचारी कमीशन लेकर काले धन को सफ़ेद कर देते थे। इस वजह से कई जगहों पर छापेमारी भी हुई और कई लोगों को गिरफ़्तार भी किया गया। नोटबंदी के बाद भ्रष्टाचार कम होने की बजाय बढ़ा था।

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प्रवासी मज़दूरों का पलायन:

कमाने के लिए गाँवों और छोटे शहरों से बड़े शहरों में आए मज़दूरों के ऊपर नोटबंदी का सबसे बुरा असर पड़ा था। एक अनुमान के अनुसार दिल्ली-एनसीआर से लगभग 40 प्रतिशत प्रवासी मज़दूरों को अपने घर लौटना पड़ा था। कैश की कमी की वजह से इनकी दिहाड़ी अटक गयी थी। नोटबंदी ने ऐसे लोगों की कमर तोड़ दी थी।

एटीएम की क़तार में मौतें:

नोटबंदी ठंड के समय में हुई थी। लोग कैश के लिए कड़कड़ाती ठंड में रात से ही लाइन लगाकर एटीएम और बैंक के सामने खड़े हो रहे थे। इस वजह से कई लोगों की मौत भी हुई थीं। उस समय देशभर में लगभग 80 लोगों की मौत एटीएम और बैंक की लाइन में हुई थी।

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जन-धन खाते में काला धन:

करोड़ों रुपए का काला धन बदलने का मामला सामने आया था। लोगों ने अपने काले धन को सफ़ेद करने के लिए कई तरीक़े अपनाए। कुछ लोगों ने दूसरों के जन-धन खातों में अपना काला धन जमा कर दिया। एक अनुमान के अनुसार 9 नवम्बर 2016 तक इन खातों में 45 हज़ार 627 करोड़ रुपए थे जो 30 नवम्बर 2016 तक बढ़कर 74 हज़ार 322 करोड़ रुपए हो गए थे।

बाज़ार में मंदी:

नोटबंदी के एक महीने बाद तक बाज़ार काफ़ी मंदा हो गया था। ऐलान से 7 दिसम्बर तक शेयर बाज़ार में बड़ी गिरावट दर्ज की गयी थी। बीएसई 8 नवम्बर को जहाँ 27591 था वहीं 7 दिसम्बर को 26237 तक पहुँच गया था। नोटबंदी के बाद ख़रीददार सोने से दूर रहे वहीं रियल एस्टेट, सेवा और कृषि क्षेत्र पर भी काफ़ी असर पड़ा था।


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