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यह चमत्कारी शिवलिंग है पाताल तक लम्बा, शिवलिंग तक पहुँचने के लिए बनी हैं 14 सीढ़ियाँ

धरती से अपने आप प्रकट हुआ है शिवलिंग

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भारत एक धार्मिक देश है, इस वजह से यहाँ देवी-देवताओं की पूजा-पाठ का बहुत ज़्यादा महत्व है। भारत को मंदिरों का देश भी कहा जाता है। इसकी वजह यह है कि यहाँ मंदिरों की संख्या सबसे ज़्यादा है। भारत के कई इलाक़े तो अपने बेहतरीन मंदिरों की वजह से ही जानें जाते हैं। भारत में कई मंदिर हैं तो  इतने प्राचीन हैं, कि उनके निर्माण के बारे में किसी को कुछ पता नहीं है। हिंदू धर्म के तीन प्रमुख देवताओं में भगवान शिव की पूजा हर जगह की जाती है।

अपनी ख़ासियत की वजह से देशभर में चर्चित है मंदिर:

भगवान शिव के देशभर में कई शिवालय हैं। कुछ शिवालय तो अपनी चमत्कारी शक्तियों के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध हैं। कई शिवालय अपने पौराणिक महत्वों की वजह से जानें जाते हैं। हिंदू धर्म के पुराणों में 12 ज्योतिर्लिंगों के बारे में बताया गया है। लेकिन उसके अलावा भी कई शिवधामों का उल्लेख मिलता है। उन सभी शिवालयों से जुड़ी कई कहानियाँ भी प्रचलित हैं। ऐसे ही एक अद्भुत शिव धाम के बारे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं, जो अपनी ख़ासियत की वजह से देशभर में चर्चित है।

धरती से अपने आप प्रकट हुआ है शिवलिंग:

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आपकी जानकारी के लिए बता दें आज हम आपको जिस शिवालय के बारे में बताने जा रहे हैं, वह उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के रूद्रपुर में स्थित है। इस शिवालय के बारे में कहा जाता है कि इसका निर्माण 11वीं सदी में हुआ था। इस शिवालय को दुग्धेश्वरनाथ मंदिर के नाम से जाना जाता है। यह अपनी अनूठी विशेषता की वजह से पूरे विश्व में जाना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि सी शिवालय में स्थित शिवलिंग की लम्बाई पाताल लोक तक है। यहाँ स्थित शिवलिंग धरती से प्रकट हुआ है। इसे किसी मनुष्य ने नहीं बनाया है।

प्रसिद्ध चीनी यात्री व्हेन सांग ने भी किए थे दर्शन:

इसी वजह से यह मंदिर देशभर में प्रसिद्ध है और यहाँ देश के कोने-कोने से लोग अपनी मनोकामना पूर्ति की कामना लिए आते हैं। मंदिर में जो भी भक्त आते हैं, वह इस शिवलिंग को स्पर्श करने के लिए 14 सीढ़ियाँ नीचे उतरकर जाते हैं। यह शिवलिंग हर समय भक्तों के दूध और चढ़ावों से भरा रहता है। इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि दुग्धेश्वरनाथ महादेव मंदिर में प्रसिद्ध चीनी यात्री व्हेन सांग ने भी महादेव के दर्शन किए थे। उस समय उन्होंने मंदिर के धार्मिक महत्व को देखते हुए मंदिर की दीवार पर चीनी भाषा में कुछ लिखा था, जो आज भी मौजूद है।

अपने आप ही निकलने लगता था गाय के स्तन से दूध:

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मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है कि सैकड़ों साल पहले यह स्थान घने जंगलों से घिरा हुआ था। यहाँ कुछ चरवाहे अपनी गायों को चराने के लिए आते थे। लोगों के अनुसार इस जंगल में एक टीले के पास एक गाय आकर खड़ी हो जाती थी और उसके स्तन से अपने आप ही दूध की धारा बहने लगती थी। धीरे-धीरे यह बात आग की तरह फैलने लगी। इस बात की जानकारी उस समय के राजा हरी सिंह को भी हुई। उन्होंने इसके बारे में काशी के महान पंडितों से भी पूछा। पंडितों से पूछने के बाद उस स्थान की खुदाई करवाना शुरू किया।

खुदाई के दौरान अंदर धँसता गया शिवलिंग:

खुदाई के बाद वहाँ पर एक शिवलिंग दिखाई दिया। जैसे-जैसे शिवलिंग को निकालने के लिए खुदाई होती गयी, शिवलिंग अंदर की तरफ़ धँसता गया। बाद में राजा हरी सिंह ने काशी से पंडितों को बुलाकर वहाँ पर एक मंदिर की स्थापना करवाई। वहीं इस मंदिर के बारे में मंदिर के पुजारियों का कहना है कि इस मंदिर का वर्णन शिवपुराण में भी मिलता है। कहा जाता है कि दुग्धेश्वरनाथ महादेव मंदिर को महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग, उज्जैन की तरह ही महत्ता प्रदान की गयी है।

 


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