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अस्थमा के रोग का करें इन आसान आयुर्वेदिक उपायों से इलाज

सदियों से किया जा रहा है आयुर्वेद से बीमारी ठीक

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बदलते समय के साथ लोग कई तरह की शारीरिक समस्याओं से घिरते जा रहे हैं। आज के समय में लगभग हर व्यक्ति किसी ना किसी बीमारी से ग्रसित है। कोई छोटी बीमारी से पीड़ित है तो कोई बड़ी बीमारी से पीड़ित है, शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा, जो किसी बीमारी की गिरफ़्त में नहीं होगा। आजकल तो छोटे-छोटे बच्चे की कई गम्भीर बीमारियों का शिकार जन्म लेते ही हो जाते हैं। इसके लिए लोगों का खान-पान तो ज़िम्मेदार है ही, साथ में प्रदूषण भी ज़िम्मेदार है। आज दुनिया के हर देश में प्रदूषण की समस्या बढ़ गयी है। भारत की बात करें तो यहाँ प्रदूषण का स्तर कुछ ज़्यादा ही है।

 

रहने मात्र से हो जाती है 5-6 साल आयु कम:

asthama

भारत के कुछ शहर ऐसे हैं, जहाँ रहने पर किसी भी व्यक्ति की 5-6 साल आयु अपने आप ही कम हो जाती है। इसी बात से आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि किस तरह का भयानक प्रदूषण भारत में है। भारत की राजधानी दिल्ली दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानियों में से एक है। यहाँ दिवाली के समय प्रदूषण का स्तर बहुत ही ज़्यादा बढ़ जाता है। ऐसे में लोग बीमार नहीं होंगे तो क्या होगा। एक रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली में दिवाली के समय हुए भयानक प्रदूषण की वजह से लोगों को साँस लेने में काफ़ी तकलीफ़ होती है। यहाँ तक की बच्चों को भी काफ़ी परेशानी होती है। इस वजह से यहाँ के लोगों को अस्थमा होना आम बात है।

 

सदियों से किया जा रहा है आयुर्वेद से बीमारी ठीक:

आयुर्वेद चिकित्सा की मदद से गम्भीर से गम्भीर बीमारी का इलाज किया जा सकता है। भारत में सदियों से किसी भी बीमारी को ठीक करने के लिए आयुर्वेद चिकित्सा का सहारा लिया जाता रहा है। अस्थमा भी इन्ही में से एक ख़तरनाक बीमारी है, आयुर्वेद में अस्थमा का इलाज कुछ प्रमुख लक्षणों को देखकर किया जाता है। अगर मरीज़ को ज़्यादा कफ बने या फेफड़ों में सूजन हो जाए तो मुलेठी के पाउडर को 500 मिली ग्राम से लेकर एक ग्राम की मात्रा को थोड़े शहद के साथ या वसावलेह (अड़ूसा और अन्य प्राकृतिक औषधियों से बनी हुई चटनी) के साथ दिया जा सकता है।

 

अस्थमा के इलाज के लिए अपनाएँ ये:

*- दो ग्राम की मात्रा में अड़ूसा, कटेरी व कायफल तीनों को बराबर मात्रा में लेकर मोटे पाउडर के रूप में पीस लें। अब इसके बाद इसे दो कप पानी लेकर अच्छी तरह से उबाल लें। बाद में जब ये थोड़ा ठंडा हो जाए तो इसमें शहद मिलाकर दिन में किसी भी समय इसका सेवन किया जा सकता है। इससे अस्थमा के मरीज़ों को काफ़ी राहत मिलती है।

 

*- आयुर्वेदिक दुकानों पर मिलने वाली जड़ी-बूटियों से तैयार गुर्जव्याधि काढ़े को 10-20 ग्राम की मात्रा में लेकर तीन कप पानी में अच्छी तरह से उबाल लें। जब पानी उबालकर एक कप बच जाए तो इसे छानकर किसी भी समय इसका सेवन करें। इससे कफ की समस्या में काफ़ी आराम मिलेगा।

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*- एक चम्मच अदरक के रस में में दो चम्मच शहद और आधा चम्मच हल्दी पाउडर मिलाकर सुबह-शाम रोगी को चटाएँ। इससे भी कफ की समस्या से राहत मिल जाती है।

*- अड़ूसा, कटेरी, तुलसी, काकड़ा शृंगी, हल्दी, कायफल, तालीस पत्र, जूसा, तेजपत्ता लें। इसके साथ में पीपल, पुष्करमूल, बहेड़ी, भारंगी, मुलेठी, सोमलता, आदि जड़ी-बूटियों को 2-3 ग्राम की मात्रा में अलग-अलग लेकर अच्छी तरह से पीसकर चूर्ण बना लें। इनमें से किसी एक को भी शहद के साथ प्रतिदिन लेने से खाँसी-ज़ुकाम जैसी समस्याओं से राहत मिलती है।

*- नमक और तिल के तेल को मिलाकर पीड़ित व्यक्ति की छाती की कुछ समय तक मालिश करें। इसके बाद स्वेदन (भाप से पसीना लाना) की क्रिया करें। इसके अलावा बालू या मिट्टी को किसी कपड़े में लपेटकर उसकी पोटली बना लें और इसे गरम करके छाती की सिकाई करें। इससे कफ पिघलकर निकल जाता है और साँस लेने में किसी तरह की कोई परेशानी नहीं होती है।

*- पाँच ग्राम मुलेठी, सनाय या हरड़े का काढ़ा बनाकर रोगी को पिलाकर विरेचन करवाएँ। इससे रोगी को उल्टी होती है और उल्टी के साथ छाती में जमा हुआ कफ बाहर निकल जाता है।

*- देवदाली या कायफल पाउडर को सूँघने से भी काफ़ी लाभ मिलता है। दवाओं का इस्तेमाल करना हो तो बिना किसी डॉक्टर की सलाह के ना लें।

 

रखें इस बात का ध्यान:

जिन लोगों को अस्थमा की परेशानी हो या कफ की समस्या का सामना कर रहे हों, उन लोगों को दिन में समय भूलकर भी नहीं सोना चाहिए। दिन में सोने से कफ में वृद्धि होती है। ऐसे लोगों को भारी व्यायाम, तला-भुना खाना और खट्टी चीज़ों से दूरी बनाकर रहनी चाहिए। मरीज़ को गर्म पानी, चीकू, सेब, दलिया, जौ की रोटी, गाय का दूध, मुनक्का, मूँग की दाल और हरी सब्ज़ियों का सेवन करना चाहिए। यह अस्थमा और कफ की समस्या में काफ़ी राहत पहुँचाने का काम करते हैं।

 


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