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जासूसी के आरोप में उत्तराखंड का DRDO इंजीनियर गिरफ़्तार, मिला था यंग साइंटिस्ट अवॉर्ड

2001 में किया गया था ब्रह्मोस का पहला सफल परीक्षण

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हाल ही में महाराष्ट्र के नागपुर में ब्रह्मोस यूनिट से जासूसी के आरोप में एक सीनियर इंजीनियर को गिरफ्तार किया गया है। उत्तर प्रदेश एंटी टेरर स्क्वॉड (एटीएस) की टीम ने यह कार्रवाई की है। मिली जानकारी के अनुसार निशांत अग्रवाल के ऊपर ब्रह्मोस मिसाइल यूनिट में काम करते हुए मिसाइल संबंधी तकनीक और अन्य खुफिया जानकारियां पाकिस्तान और अमेरिका को पहुंचाने का आरोप है। बता दें निशांत, मूल रूप से उत्तराखंड के रहने वाले हैं और पिछले पांच साल से डीआरडीओ की नागपुर यूनिट में काम कर रहे हैं। एटीएस टीम जांच के लिए निशांत अग्रवाल को उनके आवास पर ले गई।

 

साल की शुरुआत में ही मिला था प्रमोशन:

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इस गिरफ़्तारी के बारे में यूपी एटीएस के आईजी असीम अरुण का कहना है कि निशांत के कंप्यूटर से बहुत संवेदनशील जानकारी सामने आई है। असीम के मुताबिक निशांत के फेसबुक पर पाकिस्तानी लोगों से बातचीत के भी सबूत सामने आए हैं। आपको यह जानकर और भी हैरानी होने वाली है कि जासूसी के आरोप में गिरफ्तार ब्रह्मोस इंजीनियर निशांत अग्रवाल को हाल ही में ‘यंग साइंटिस्ट अवॉर्ड’ दिया गया था।

इस बात की पुष्टि खुद निशांत की फेसबुक प्रोफाइल से होती है। जिसमें उसने साफ-साफ लिखा कि उसे बेहतर काम करने की एवज में अवॉर्ड मिला है। इतना ही नहीं फेसबुक से ही पता चलता है कि निशांत को इस साल (2018) की शुरुआत में प्रमोशन मिला।

 

2001 में किया गया था ब्रह्मोस का पहला सफल परीक्षण:

अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आख़िर ऐसी कौन सी मजबूरी थी, जिसकी वजह से इतने बड़े साइंटिस्ट को ऐसा काम करना पड़ा। हालाँकि अभी इस मामले की जाँच एटीएस के द्वारा की जा रही है और बहुत जल्दी ही इस मामले में कई अन्य ख़ुलासे भी हो सकते हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें ब्रह्मोस कम दूरी की सुपरसॉनिक क्रूज मिसाइल है। इसे पनडुब्बी से, पानी के जहाज से, विमान से या जमीन से भी छोड़ा जा सकता है। यह कम ऊंचाई पर तेजी से उड़ान भरती है और इस तरह से रडॉर की आंख से बच जाती है। ब्रह्मोस का पहल सफल लॉन्च 12 जून, 2001 को हुआ था।

 

किया जा सकता है आतंकी ठिकानों पर हमला बोलने के लिए इस्तेमाल:

इसका ओडिशा के चांदीपुर तट से परीक्षण किया गया था। बहुत काम लोग ही इसके बारे में जानते हैं कि ब्रह्मोस मिसाइल का नाम भारत की ब्रह्मपुत्र नदी और रूस की मस्कवा नदी पर रखा गया है। ब्रह्मोस मिसाइल आवाज की गति से करीब तीन गुना गति से हमला करने में सक्षम है। फाइटर जेट से मार करने में सक्षम ब्रह्मोस मिसाइल के इस परीक्षण को बेहद मारक क्षमता वाला कहा जा रहा है। हवा से जमीन पर मार करने वाले ब्रह्मोस मिसाइल का दुश्मन देश की सीमा में स्थापित आतंकी ठिकानों पर हमला बोलने के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

 

ATS ने किया था बीएसएफ़ के जवान को भी गिरफ़्तार:

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यह मिसाइल अंडरग्राउंड परमाणु बंकरों, कमांड ऐंड कंट्रोल सेंटर्स और समुद्र के ऊपर उड़ रहे एयरक्राफ्ट्स को दूर से ही निशाना बनाने में सक्षम है। हाल ही में भारत ने रूस के साथ S-400 मिसाइल तकनीकी का सौदा किया है। इसके बाद भारत की ताक़त कई गुना और बढ़ जाएगी। भारत धीरे-धीरे रक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा है।

आपको बता दें कुछ दिन पहले जासूसी के आरोप में यूपी एटीएस ने बीएसएफ़ के एक जवान को भी गिरफ़्तार किया था। बीएसएफ़ का जवान पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई को भारत की कई ख़ुफ़िया जानकारियाँ दिया करता था। पता चला कि पाकिस्तानी आईएसआई के लोग फ़ेक फ़ेसबुक आईडी से जवानों को फँसाने का काम करते थे। बाद में इनसे जासूसी का काम करवाते थे।


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