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गणेश चतुर्थी के अवसर पर कैसे करें विधिवत पूजा जानिए

हर शुभ कार्य से पहले याद किया जाता है गणेश जी को

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गणेश चतुर्थी का त्यौहार पूरे देश में तो मनाया जाता ही है लेकिन मुंबई, महाराष्ट्र में इसे खास तौर पर मनाया जाता है. गणेश चतुर्थी के दिन बप्पा की मूर्ति को घर में स्थापित किया जाता है और दसवें दिन उन्हें विदा किया जाता है. पूरे 10 दिन मुंबई, महाराष्ट्र भक्ति में डूबा रहता है. भाद्रपद मास की चतुर्थी को सौभाग्य के देवता गणेश जी का जन्म हुआ था. गणेश जी को सुख और समृद्धि का देवता माना जाता है, इसलिए भाद्रपद मास की चतुर्थी को उनको घर में स्थापित किया जाता है. अनंत चतुर्दर्शी को इनको विदा किया जाता है. माना जाता है की बप्पा के आगमन से सारे कष्ट विकार मिट जाते हैं.

 

गणेश चतुर्थी का महत्व:

गणेश जी को हर शुभ कार्य में सबसे पहले याद किया जाता है. हिन्दू धर्म की मान्यता के अनुसार किसी भी कार्य को करने से पहले गणेश जी का आशीर्वाद लिया जाता है. गणेश जी के जन्म को लेकर एक पौराणिक कथा भी प्रचलित है. एक बार माता पार्वती ने मिट्टी की एक बाल प्रतिमा बनाई और उसमें प्राण फूँक दिए. इस बाल रूप को देखकर माँ पार्वती का ममत्व जाग गया और उन्होंने इस बालक को अपना पुत्र मान लिया. माँ पार्वती ने उनका नाम विनायक रखा. विनायक को माँ ने स्नान कक्ष की रखवाली का आदेश दिया और कहा किसी को भी अंदर आने की अनुमति नहीं है.

 

लगा दिया हाथी का मुख:

vinayaka chavithi

विनायक ने माता के आदेशनुसार पहरेदारी का कार्य प्रारम्भ कर दिया. इसी बीच भगवान शिव वहां पहुंचे और उन्होंने देखा कि एक बालक स्नान कक्ष की पहरेदारी कर रहा है और उन्हें भीतर जाने से रोक रहा है. इस बात से रुष्ट होकर भगवान शिव ने विनायक का सर धड़ से अलग कर दिया. माता पार्वती को जब इस बात का ज्ञान हुआ तो वो इस बात से बहुत क्रोधित हुई. उनके क्रोध की अग्नि में पूरी सृष्टि जलने लगी। तब भगवान शिव ने एक हाथी के बच्चे के कटे हुए सर को विनायक के धड़ से जोड़कर उस पर अमृत की बूंदे बरसाई. विनायक जीवित हो उठे और तब से गजमुख, गणेश, गणपति आदि नामों से पुकारे जाने लगे. गणेश जी को देवताओं से कई आशीर्वाद दिए और उनकी स्तुति की.

 

गणपति स्थापना का समय:

13 सितंबर की सुबह 11 बजकर 09 मिनट से 01 बजकर 35 मिनट तक के समय काल में गणेश जी को स्थापित किया जान चाहिए.

 

गणपति स्थापना: 

गणपति जी के मूर्ति को स्थापित करने का सबसे अच्छा समय है मध्यान. नए वस्त्र पहन के गणेश जी की मूर्ति लेके आएं आप खुद भी बना सकते हैं. पूजा स्थल पर स्वास्तिक का चिन्ह बनाएं अब इसके ऊपर लाल रंग का कपड़ा बिछाएं. अब गणेश जी के मूर्ति को स्थापित करें. मूर्ति के स्थान पर तांबे का कलश पानी भर कर, आम के पत्ते और नारियल के साथ उसे सजाएं. मूर्ति के दाएं-बाएं रिद्धि और सिद्धि की सुपारी रखें.

 

vinayaka chavithi

 

पूजन विधि:

गणपति पूजन विधि इस प्रकार है.

  • सबसे पहले घी का दिया जलाएं फिर संकल्प लेकर गणेश जी का आह्वान करें.
  • अब गणेश को पहले जल से स्नान कराएं फिर पंचामृत से स्नान कराएं एक बार फिर से शुद्ध जल से गणपति जी को स्नान कराएं.
  • इसके बाद गणेश जी को वस्त्र अर्पित कर सिंदूर, चंदन, फूल चढ़ाएं.
  • अब धूप और दीपक जलाकर हाथ धों लें.
  • अब प्रतिमा के आगे नैवेद्य अर्पित करें.
  • गणेश जी को नारियल और दक्षिणा भेंट करें और आरती करें अब गणेश जी की मूर्ति की एक बार परिक्रमा करें.
  • अब गणेश जी को प्रणाम करें.

 

 


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