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गिरते रुपए के मूल्यों की वजह से महँगी हुई राफ़ेल डील, पहले से 6400 करोड़ रुपए महँगी हुई डील

526 करोड़ में तय हुआ था एक राफ़ेल विमान का सौदा

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अब राफ़ेल डील के बारे में किसी को कुछ बताने की ज़रूरत नहीं है। आज के समय मी राफ़ेल डील के बारे में भारत का बच्चा-बच्चा जान गया है। राफ़ेल डील की वजह से मोदी सरकार को काफ़ी किरकिरी झेलनी पड़ी है। कांग्रेस लगातार राफ़ेल डील को लेकर भाजपा और पीएम मोदी पर हमलावर है। वहीं भाजपा का कहना है कि कांग्रेस उसके ऊपर बेबुनियाद आरोप लगा रही है। जानकारी के अनुसार कांग्रेस शुरू से ही रफ़ील डील को बदलने का आरोप लगा रही है। इसके साथ ही इस डील में अनिल अम्बानी को शामिल करने का भी आरोप लगाया जा रहा है। इसकी वजह से मोदी सरकार की छवि काफ़ी गिरी है।

गिरती हुई मुद्रा का असर पड़ा है राफ़ेल डील पर:

राफ़ेल डील

वहीं इस मामले पर अब तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुप्पी साधे हुए हैं। कभी कांग्रेस की सरकार के दौरान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को मौनमोहन कहकर चिढ़ाने वाले मोदी आज ख़ुद मौन हो गए हैं। लगातार डॉलर के मुक़ाबले गिरते रुपए की वजह से भी मोदी सरकार को काफ़ी परेशानियों का सामना करना पड़ा। इसके अलावा बढ़ते पेट्रोल-डीज़ल की क़ीमतों ने भी केंद्र सरकार के सामने मुसीबत खड़ी कर दी है। इन सभी मुसीबतों के बीच यह जानकारी मिली है कि लगातार भारतीय मुद्रा के गिरते स्तर का असर फ़्रांस की साथ हुए राफ़ेल लड़ाकू विमान सौदे पर भी पड़ा है।

क़ीमतों का असर पड़ा है ऑफ़सेट क़रार पर भी:

मिली जानकारी के अनुसार पहले जो राफ़ेल सौदा 59600 करोड़ रुपए में हुआ था, वही राफ़ेल लड़ाकू विमान सौदा आज के समय में 6400 करोड़ रुपए बढ़कर 66000 करोड़ रुपए हो गयी है। बता दें सितम्बर 2016 में यूरोपीय मुद्रा यूरो के हिसाब से फ़्रांस की साथ राफ़ेल सौदा 7.89 बिलियन यूरो में किया गया था, जो उस समय भारतीय रुपए के हिसाब से 59600 करोड़ रुपए था। लेकिन यूरो के मुलाबले रुपए के गिरते स्तर की वजह से अब इसकी क़ीमत 66000 करोड़ रुपए हो गयी है। बता दें क़ीमतें बढ़ने का असर राफ़ेल डील के ऑफ़सेट क़रार पर भी पड़ा है।

526 करोड़ में तय हुआ था एक राफ़ेल विमान का सौदा:

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जिसके तहत अनिल अम्बानी समेत दसॉ के साथ ऑफसेट करार करने वाली अन्य कंपनियों का हिस्सा भी बढ़ जाएगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि राफेल फाइटर जेट डील भारत और फ्रांस की सरकारों के बीच सितंबर 2016 में हुई थी। जिसके तहत भारतीय वायुसेना को 36 अत्याधुनिक लड़ाकू विमान मिलेंगे। कांग्रेस इस सौदे में भारी करप्शन का आरोप लगा रही है और कह रही है कि सरकार 1670 करोड़ रुपये प्रति विमान की दर से राफेल खरीद रही है, जबकि यूपीए के समय इस सौदे पर बातचीत के दौरान इस विमान की कीमत 526 करोड़ रुपये प्रति राफेल तय हुई थी।

कांग्रेस को बाल मिला ओलांद के बयान से:

गौरतलब है कि कांग्रेस लगातार सरकार पर विमान की कीमतों के बारे में जानकारी मांग रही है, लेकिन सरकार की तरफ से गोपनीयता का हवाला देकर राफेल लड़ाकू विमान की कीमत बताने से इनकार किया जाता रहा है। कीमतों के अलावा राफेल डील पर कांग्रेस का मुख्य आरोप सरकारी कंपनी हिंदुस्तान ऐरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के साथ सौदा रद्द कर अनिल अंबानी की कंपनी और दसॉ के बीच हुए ऑफसेट करार को लेकर केंद्रित है। कांग्रेस के इस आरोप को फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांसवा ओलांद के हालिया बयान से और बल मिल गया।

ओलांद के बयान से आ गया भारतीय राजनीति में भूचाल:

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उल्लेखनीय है कि फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के उस बयान ने देश में सियासी भूचाल ला दिया है, जिसमें उन्होंने दावा किया है कि अनिल अंबानी की कंपनी का नाम भारत की तरफ से आगे बढ़ाया गया। जबकि फ्रांस की सरकार और दसॉ की तरफ से बयान जारी कर कहा गया है कि ऑफसेट करार में सरकार का कोई योगदान नहीं है और कंपनी अपनी निजी पार्टनर चुनने के लिए स्वतंत्र है। ओलांद के इस बयान के बाद ना केवल कांग्रेस बल्कि देश की कई अन्य विपक्षी पार्टियों ने भाजपा और मोदी के ऊपर हमला बोल दिया। राहुल गांधी ने तो इस मामले में पीएम मोदी को चोर तक कह दिया। राजस्थान में एक सभा को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा, ‘गली-गली में शोर है देश का चौकीदार चोर है।’

क्या डूब जाएगी भाजपा की लुटिया:

राहुल गांधी लगातार राफ़ेल लड़ाकू विमान डील पर सरकार को घेरे हुए हैं। राहुल गांधी ने इस मामले मी रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण तक को भी नहीं छोड़ा। पीएम मोदी के साथ ही सीतारमण पर भी राहुल समय-समय पर हमला बोलते रहते हैं। इस समय पाँच राज्यों में होने वाली विधानसभा चुनाव को देखते हुए राहुल गांधी अपनी हर सभा में राफ़ेल डील के मुद्दे को लगभग उठाते ही हैं। इस मामले में कांग्रेस को कई अन्य पार्टियों का भी समर्थन मिला है। ऐसी उम्मीदें लगायी जा रही हैं कि कहीं राफ़ेल डील का मामला इस बार भाजपा की लुटिया ना डुबो दें। हालाँकि क्या होगा यह तो आने वाला समय ही बताएगा।


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