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निपाह वायरस, थोड़ी से लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है ! जानिये बचाव के उपाय

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आजकल समाचार पत्र से लेकर मीडिया चैनल तक सभी निपाह वायरस के बारे में बता रहे हैं। केरल में निपाह अपना कहर बरपा रहा है और 12 लोगों की मौत हो चुकी है। यह वायरस दूसरे राज्यों में न फैले इसलिए राज्य और केन्द्र सरकारों ने अलर्ट जारी कर दिया है। जिस वायरस ने लाखों लोगों के मन में दहशत को फैलाया है, आइए जाने उसके बारे में।

आखिर क्या है यह निपाह वायरस?निपाह वायरस
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार निपाह वायरस एक उभरती संक्रामक बीमारी है जो जानवरों और मनुष्यों दोनों में गंभीर बीमारी का कारण बनती है। यह वायरस पहली बार 1998 में मलेशिया और सिंगापुर में पाया गया था। उस समय, यह मुख्य रूप से सूअरों में पाया जाता था और उनके माध्यम से यह मनुष्यों मे फैलता था। तब निपाह वायरस/ Nipah virus ने करीब २५० से अधिक लोगों को संक्रमित किया। यह जानवरों से मनुष्यों में फैलने वाला एक वायरस है। इस वायरस का नाम निपाह इसलिए पड़ा क्योंकि इससे प्रभावित होने वाला मामला सबसे पहले मलेशिया के ‘कांपुंग सुंगई निपाह’ नामक क्षेत्र में सामने आया था। चिकित्सीय भाषा में इस वायरस को NiV कहा जाता है।

कैसे फैलता है यह वायरस?
यह चमगादड़ द्वारा फैलाया जाने वाला वायरस है। इसके साथ ही यह उन फलों द्वारा भी फैलता है जिसे वायरस प्रभावित चमगादड़ों ने खाया हो। इसके अतिरिक्त कोई भी खाद्य पदार्थ जिस पर वायरस प्रभावित चमगादड़ ने यूरिन की है उस खाद्य पदार्थ से भी यह वायरस फैलता है। यदि यह वायरस किसी मनुष्य में पहुंच जाए तो उस मनुष्य की छींक से यह दूसरे मनुष्य में फैल जाता है।

क्या हैं इसके लक्षण?निपाह वायरस
यह वायरस मुख्य रूप से चमगादड़ के मूत्र, लार, और तरल पदार्थ में मौजूद होता है। संभवतः, निपा वायरस संक्रमण की पहली घटना तब हुई जब मलेशियाई खेतों में सूअर चमगादडो के संपर्क में आए, जिन्होंने वनों की कटाई के कारण अपने आवास खो दिए थे।
निपाह वायरस/ Nipah Virus, जो एक संक्रामक बीमारी है, संक्रमित सूअरों, उनके मल मूत्र या स्राव के सीधे संपर्क में आने के बाद मलेशिया और सिंगापुर के लोगो मे फैला । इंसान के अंदर प्रवेश के पश्चात यह वायरस दो सप्ताह तक कुछ असर नहीं दिखाता है। इसके पश्चात यह वायरस हल्का असर दिखाना शुरू करता है जिससे अचानक बुखार का आना, मस्तिष्क मे सुजन, सिर दर्द, उनींदापन और विचलन, मांसपेशियों मे तेज दर्द, उल्टी आना, मानसिक भ्रम शुरूआती लक्षणों के रूप में प्रकट होते हैं। मलेशिया में इसके कारण करीब 50 फीसदी मरीजों की मौत तक हो गई थी।

भारत मे निपाह के मरीजो की जांच ELISA TEST द्वारा NIV (National Institute of Virology) मे की जाती है जो पुणे मे है.

क्या हैं इससे बचाव के उपाय?
इस वायरस से बचाव के लिए अभी कोई ड्रग या वैक्सीन नहीं है इसलिए सावधानी ही बचाव है। बाज़ार से घर वापस आने पर सबसे पहले अपने हाथों को अच्छे से धोएं उसके बाद ही किसी चीज़ को हाथ लगाएं। चमगादड़ इस रोग का मुख्य कारण है इसलिये जितना हो सके चमगादडो वाले इलाको मे जाने से बचे. यह वायरस सुअरों मे भी पाया गया है इसलिये सुअरों के संपर्क मे रहने वाले लोगो से भी दुरी बनाये, निपाह वायरस के सबसे ज्यादा मामले हाल ही मे केरल मे पाए गये है इसलिये केरल से आने वाले फलो जैसे केले, नारियल, आम खजूर आदि का सेवन ध्यान से करे. उदहारण के तौर पर फलो या सब्जियों पर कट के निशान है तो उन्हे न ख़रीदे.
इस प्रकार इन छोटी-छोटी सावधानियों से आप निपाह वायरस के खतरे से बच सकते हैं।
इसके साथ ही पेड़ से गिरे फलो या बाज़ार मे मिलने वाले कटे फलो को बिलकुल भी न खाये. ताड़ी का बिलकुल भी सेवन न करे. ज्यादा भीड़ वाली जगह पर जाने से बचे.

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